ऑनलाइन बाजार में चने पर लगा रहे सट्टा, किसान और व्यापारियों को हो रहा नुकसान

ऑनलाइन बाजार में चने पर लगा रहे सट्टा, किसान और व्यापारियों को हो रहा नुकसानफ्यूचर मार्केट से चना किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान।

रोज सुबह, दोपहर और शाम को कुछ चुनिंदा लोग फ्यूचर ट्रेडिंग व्यापार चना का उपयोग सट्टा के रूप में करते हैं। जिससे देश के व्यापारियों को और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में ऑल इण्डिया दाल मिल एसोसिएशन ने कृषि उपज चना (Chickpeas) को फ्यूचर मार्केट (NCDEX) के ऑनलाइन व्यापार से बंद करने की मांग की है।

ऑल इण्डिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष सुभाष गुप्ता एवं सचिव दिनेश अग्रवाल ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि कृषि उपज चना (Chickpeas) को फ्यूचर मार्केट (NCDEX) के ऑनलाइन व्यापार से बंद किया जाना चाहिए। इस संबंध में संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्रजी मोदी और कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह को ज्ञापन भेजकर अवगत कराया है कि प्रतिदिन सुबह, दोपहर एवं शाम को कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा फ्यूचर ट्रेडिंग व्यापार चना का उपयोग सट्टा रूपी कार्य में हो रहा है, जिससे देश के व्यापारियों को और किसानों को नुकसान हो रहा है। इसके बारे में पहले भी में भी भारत सरकार से अनुरोध किया था कि NCDEX से चना (Chickpeas) का व्यापार बंद किया जाना चाहिए।

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से चना वायदा कारोबार को देश में अति उत्पादन होने से बंद किया जाना चाहिए। देश में अधिकतर व्यापारी वर्ग, जो कि चना (Chickpeas) का व्यापार करते हैं, वो लोग NCDEX सट्टेबाजी (सट्टा बाजार) में काम नही करते हैं। कुछ चुनिंदा कंपनियां व बड़े व्यापारी ज्यादातर यह काम करते हैं, लेकिन पैसे के बल

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पर सट्टा का बड़ा व्यापार चल रहा है अभी। वे लोग अपने हिसाब से देश में फ्यूचर मार्केट में चना को चलाते हैं तथा प्राकृतिक एवं अव्यवहारिक रूप से बड़ी तेजी-मंदी कर रहे हैं, जिससे व्यापारी वर्ग एवं देश के किसानों को नुकसान हो रहा है।

फ्यूचर मार्केट (NCDEX) पर चने की वास्तविक कीमत का सिर्फ 10% से 20% रुपए लगाकर कई हजार टन चना खरीदा एवं बेचा (बिक्री किया) जाता है। पूरे देश में कोई भी किसान इतना माल न तो खरीदता है और ना ही बेचता है, क्योंकि किसान ऑनलाइन बाजार में इसके नियम-कानून से पूर्ण रूप से परिचित नहीं हैं। हमारे देश में ज्यादातर किसान छोटी भूमि (कम जमीन) के भी मालिक हैं, किसानों की छोटी भूमि, जिस पर लगभग 20 टन चना पैदा होता है, वह किसान एक हजार टन चना क्यों खरीदेगा व क्यों बेचेगा। यह सट्टात्मक कार्य सिर्फ कुछ चुनिंदा लोग एवं व्यापारी कर रहे हैं।

यह कैसे संभव है कि जिस देश में अधिकतम संख्या में गरीब किसान व व्यापारी वर्ग अपनी जमा पूंजी एवं अथक परिश्रम लगाकर कारोबार करता हो, वहीं पर बड़ी कंपनियां व बड़ा सट्टा करने वाले लोग देश के लाखों लोगों को सट्टेबाजी एवं भाव कम ज्यादा करके वर्तमान में नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर (NCDEX) में चना में जैसे 4% तेजी लाई जाती है तो अगले ही दिन 3% मंदी कर दी जाती है, जिससे वास्तविक व्यापार खराब (डिस्टर्ब) हो रहा है। बाजार को घटाना एवं बढ़ाना होता है, तो मार्जिन कम या ज्यादा कर देते हैं। उदाहरण के लिए एक हजार क्विंटल चना खरीदा, अचानक कुछ दिन बाद मार्जिन 10% बढ़ा देते हैं। जिससे व्यापारी को हजार क्विंटल पर डिफरेंस मार्जिन राशि तुरंत देना पड़ती है। यदि व्यापारी मार्जिन राशि तुरंत नहीं देते, तो रुपए के बदले

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में चने के सौदे का कुछ भाग स्टॉट मे से एक से दो दिन में बिक्री करना पड़ती है। प्रत्येक महीने की 20 तारीख को चने की कट (सेटलमेंट डिलेवरी) होती है। 10 तारीख बाद ही मार्केट को कम या ज्यादा करके लोगों को भ्रमित/विचलित किया जाता है। जिससे 20 तारीख तक कट (सेटलमेंट डिलेवरी) के समय कुछ चुनिंदा लोग, चुनिंदा सदस्य सट्टेबाजी करके जनता को भाव कम या ज्यादा करके नुकसान पहुंचाते हैं। एसोसिएशन ने सरकार से ऐसे लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

फ्यूचर क्या है

कम पैसे में बाजार में ट्रेडिंग फ्यूचर के जरिए मुमकिन है। मार्जिन मनी जमा करने पर ही ट्रेडिंग की जा सकती है। मार्जिन एक्सचेंज तय करता है। फ्यूचर ट्रेडिंग महीने भर के लिए होती है। फ्यूचर ट्रेड में हर दिन का नफा-नुकसान का हिसाब किताब होता है। नुकसान होने पर ब्रोकर की भरपाई ट्रेडर को करनी पड़ती है। फ्यूचर कारोबार इंडेक्स या स्टॉक्स में होता है। फ्यूचर कैश मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं। फ्यूचर अनुभवी ट्रेडर्स का काम है। फ्यूचर हेजिंग में भी काम आता है।

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