दालों के रेट पर काबू के लिए एक्शन, 200 मीट्रिक टन से ज्यादा का स्टॉक नहीं कर पाएंगे बड़े व्यापारी

अरहर, उड़द जैसी दालों की कीमतों पर कंट्रोल रखने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट तय कर दी है। उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आदेश के मुताबिक अब बड़े कारोबारी 200 मीट्रिक टन से ज्यादा दाल का भंडारण नहीं कर पाएंगे। ये नियम 31 अक्टूबर तक लागू रहेगा।

दालों के रेट पर काबू के लिए एक्शन, 200 मीट्रिक टन से ज्यादा का स्टॉक नहीं कर पाएंगे बड़े व्यापारी

दलहन के स्टॉक पर सरकार ने लगाई लिमिट। फोटो- गांव कनेक्शन

कोरोना महामारी के दौर में दाल की कीमतें काबू में रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने दालों के भंडारण की सीमा तय कर दी है। भारत सरकार ने थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, मिल मालिकों और आयातकों के लिए दालों की स्टॉक-सीमा लागू करते हुए 200 मीट्रिक टन से ज्यादा के भंडारण पर रोक लगा दी है।

उपभोक्ताा कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव ये नियम लागू कर दिया है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि 2 जुलाई से लागू ये आदेश 31 अक्टूबर तक लागू रहेगा। इसके थोक विक्रेताओं के लिए ये स्टॉक सीमा 200 मीट्रिक टन होगी लेकिन वो भी एक किस्म की दाल 100 मीट्रिक टन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे। इसके अलावा खुदरा विक्रेता 5 मीट्रिक टन का भंडारण कर सकेंगे। जबकि दलहन मिल मालिकों के लिए ये सीमा (स्टॉक) उत्पादन के आधार पर तय की जाएगी। मिल मालिकों के लिए स्टॉक का निर्धारण उत्पादन के अंतिम 3 महीनों या वार्षिक स्थापित क्षमता का 25 प्रतिशत के आधार पर किया जाएगा।

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मिल मालिकों और व्यापारियों को एतराज

हालांकि मिल मालिकों और दाल कारोबारियों ने भंडारण सीमा तय करने पर आपत्ति जताई है। दाल कारोबारी प्रदीप खंडेलवाल इंदोर से गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "ये सारी कोशिशें इसलिए की जा रही है ताकि हिंदुस्तान में सिर्फ अड़ाणी-अंबानी जैसे जैसे बड़े कारोबारी अपनी दाल बेच सकें। उनके लिए ये कोई नियम नहीं है। सरकार किस महंगाई को काबू करने की बात कर रही है। मसूर को छोड़कर सभी दालें न्यूनतम समर्थन मूल्य या उसके नीचे बिक रही हैं।"

वो आगे कहते हैं, "अरहर की एमएसपी भी 6000 रुपए है और बिक भी 6000 में रही है। अगर ऐसे ही महंगाई पर काबू करना है तो फिर किसान के लिए एमएसपी क्यों तय करते हैं।"

उपभोक्ताा कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय 2 जुलाई के बयान के अनुसार 2020-21 में प्रमुख दालों का कुल उत्पादन 255.8 एलएमटी रहा है, जो अब तक का सबसे अधिक उत्पादन है, जिनमें विशेष रूप से चना (126.1 एलएमटी) और मूंग दाल (26.4 एलएमटी) ने उत्पादन के अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत वित्त वर्ष 2021-22 में दालों के बफर स्टॉक की लक्षित मात्रा को बढ़ाकर 23 एलएमटी कर दिया गया है। इसके साथ ही दालों की कीमतों की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए एक वेब पोर्टल विकसित किया गया है, जो जमाखोरी जैसी अवांछनीय प्रथा पर नियंत्रण रखता है।

उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा 2 जुलाई 2021 से, तत्काल प्रभाव से निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ (संशोधन) आदेश, 2021 पर लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, स्टॉक सीमा और आवाजाही प्रतिबंधों को हटाना जारी किया गया है। इस आदेश के तहत सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मूंग को छोड़कर सभी दालों के लिए 31 अक्टूबर 2021 तक स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है। आयातकों के लिए ये स्टॉक सीमा 15 मई 2021 से पहले रखे गए/आयात किए गए स्टॉक के लिए किसी थोक व्यापारी के समान ही होगी और 15 मई 2021 के बाद आयात किए गए स्टॉक के लिए थोक विक्रेताओं पर लागू स्टॉक सीमा, सीमा शुल्क निकासी की तारीख से 45 दिनों के बाद लागू होगी।

इस वेबसाइट पर मिल मालिकों, थोक कारोबारियों और एक्सपोर्टर को देनी होती है जानाकारी

ये भी कहा गया है कि अगर संस्थाओं का स्टॉक निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें उपभोक्ता मामलों के विभाग के ऑनलाइन पोर्टल (fcainfoweb.nic.in) पर उसकी जानकारी देनी होगी और इस आदेश की अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के अंदर निर्धारित सीमा के भीतर लाना होगा।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत सरकार द्वारा लगातार किए गए प्रयासों की एक श्रृंखला के परिणामस्वरूप, दालों और खाद्य तेलों के मूल्यों में गिरावट का रुख देखा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पिछले 6 वर्षों में, प्रमुख दालों का कुल उत्पादन अब तक का सबसे अधिक 255.8 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) 2020-21 में हुआ, जिसमें चना (126.1 एलएमटी) और मूंग दाल (26.4 एलएमटी) ने विशेष रूप से उत्पादन के अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

मंत्रालय ने आगे कहा कि क्योंकि पूरा देश कोविड महामारी के प्रभाव से जूझ रहा है, और ऐसे में सरकार समय पर उचित उपाय अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है और आम आदमी की चिंताओं व समस्याओं को काफी हद तक कम कर दिया है। इस सुधार से समाज के सभी वर्गों द्वारा व्यापक राहत महसूस की गई है।



सदलहन-तिलहन बिक्री, उत्पादन और खेती के डाटा के लिए कंप्यूटर का सहारा

मंत्रालय के मुताबिक बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण प्रयास के एक हिस्से के रूप में, मूल्य डेटा की गुणवत्ता में सुधार की प्रतिबद्धता के साथ, सरकार द्वारा 1 जनवरी 2021 को मूल्य निगरानी केंद्रों से दैनिक आधार पर मूल्यों से संबंधित आंकड़ों को दर्ज करने के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया था। वास्तविक बाजार स्थान और मूल्य प्रवृत्तियों व अनुमानों का विश्लेषण प्राप्त करने के लिए एक डैशबोर्ड विकसित किया गया है। साथ ही, जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए एक विपणन एजेंसी की सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है।

सरकार के बयान के मुताबिक दालों के खुदरों मूल्यों में कमी लाने के उद्देश्य से बफर स्टॉक से दालों को बाजार में जारी करने के कदम के तत्कालिक प्रभाव में वृद्धि करने के लिए 2020-21 में खुदरा मूल्यों से संबंधित एक व्यवस्था शुरू की गई थी। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मूंग, उड़द और तुअर दाल की आपूर्ति खुदरा दुकानों जैसे कि एफपीएस, उपभोक्ता सहकारी समिति आउटलेट आदि के माध्यम से की गई थी।

नेफेड के दाल बनाने/प्रसंस्करण, परिवहन, पैकेजिंग और सेवा शुल्क से संबंधित लागत विभाग द्वारा ही वहन की गई थी। इसके अतिरिक्त, अक्टूबर, 2020 और जनवरी, 2021 के दौरान, कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 2 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तुअर दाल खुले बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा, कल्याण और पोषण कार्यक्रमों के लिए दालों की आपूर्ति के रूप में तुअर की दाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर और चने की दाल की आपूर्ति एमएसपी पर 5 प्रतिशत की छूट पर की गई थी।

पीएसएफ के तहत बफर स्टॉक 23 लाख मीट्रिक टन घोषित

मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में दालों के बफर का लक्षित आकार बनाए रखने के लिए इसे बढ़ाकर 23 लाख मीट्रिक टन और चने के बफर को बढ़ाकर 10 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। साथ ही, पीएसएफ के तहत, मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक लाख मीट्रिक टन ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद की जा रही है क्योंकि राज्य द्वारा मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीद के लिए प्रस्तावित मात्रा इसके लिए अनुमोदित मात्रा से अधिक है। इस कदम से किसानों की आय में वृद्धि होगी क्योंकि उन्हें अपनी उपज के लिए लाभकारी मूल्य प्राप्त होंगे और यह सुनिश्चित होगा कि वे अगले सीजन के दौरान इस फसल के लिए अपने खेती के क्षेत्र में कमी न करें। सरकार इसके लिए खरीफ के सीजन में 300 करोड़ के 13.51 किसानों को मिनी बीज किट दे रही है।

14 मई को सरकार ने दालों को किया था आयात से मुक्त

मार्च-अप्रैल माह में दालों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। जिसके बाद सरकार ने कई कदम उठाए थे। केंद्र सरकार ने देश में दालों की मांग को पूरा करने और महंगाई को काबू करने के लिए 14 मई को मूंग, उड़द और तूर (अरहर) को आयात से मुक्त कर दिया था। तीनों दालों 31 अक्टूबर 2021 तक के लिए प्रतिबंधित से हटाकर निशुल्क की श्रेणी में डाल दिया गया है। सरकार की दलील है कि इस लचीली नीति से दालों का निर्बाध और समय पर आयात हो सकेगा। सरकार का दावा है कि इस कदम को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है क्योंकि अब तक 7001 पंजीकरण हो चुके हैं और 28.31 लाख मीट्रिक टन के स्टॉक घोषित किए गए हैं।

इसके अलावा, सालाना 2.5 एलएमटी उड़द और 1 एलएमटी तुअर का आयात करने के लिए म्यांमार और सालाना एक एलएमटी तुअर का आयात करने के लिए मलावी के साथ पांच वर्ष के लिए एमओयू किया गया है, और सालाना दो एलएमटी तुअर का आयात करने के लिए मोजाम्बिक के साथ एमओयू को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह एमओयू विदेशों में उत्पादित और भारत को निर्यात की जाने वाली दालों की मात्रा का पूर्वानुमान सुनिश्चित करेंगे, इस प्रकार भारत और दाल निर्यातक देश दोनों को ही लाभ होगा।

तेल की कीमतों पर काबू के लिए पाम तेल पर ड्यूटी में 5 फीसदी की कटौती

इसके अतिरिक्त, खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी लाने के लिए, बंदरगाहों पर कच्चे पाम तेल (सीपीओ) जैसी खाद्य वस्तुओं की त्वरित निकासी की निगरानी करने के लिए एक प्रणाली को संस्थागत रूप दिया गया है, जिसमें सीमा शुल्क विभाग, एफएसएसएआई और प्लांट क्वारंटाइन डिवीजन के नोडल कार्यालय शामिल हैं। इसके अलावा, उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए 30 जून 2021 से 30 सितंबर 2021 तक सीपीओ पर लगने वाले शुल्क में 5% कटौती की गई है। यह कटौती सीपीओ पर पहले के लागू 35.75 प्रतिशत कर की दर को घटाकर 30.25 प्रतिशत तक ले आएगी, और बदले में, खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में गिरावट आ जाएगी। इसके साथ, रिफाइंड पाम ऑयल/पामोलिन पर शुल्क को 45% से घटाकर 37.5% कर दिया गया है।

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