मार्च माह से 45 किलोग्राम की पैकिंग में बिकेगी यूरिया  

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   6 March 2018 11:45 AM GMT

मार्च माह से 45 किलोग्राम की पैकिंग में बिकेगी यूरिया  खेत में यूरिया फेंकते किसान । फाइल फोटो

नयी दिल्ली। खेतों में उर्वरकों के उपयोग को संतुलित करने के प्रयासों के तहत इस महीने से यूरिया को 50 किलोग्राम के बजाय 45 किलोग्राम की पैकिंग में बेचा जाएगा। सरकारी अधिसूचना के अनुसार 45 किलोग्राम की यूरिया की एक बोरी की कीमत 242 रुपए होगी। इसमें कर शामिल नहीं है। यह कीमत सरकार द्वारा तय 5,360 रुपए प्रति टन की कीमत पर आधारित है। यूरिया का उत्पादन खर्च करीब 16 हजार रुपए प्रति टन आता है।

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भारत यूरिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश का यूरिया उत्पादन कुल मांग 320 लाख टन से कम रहने के कारण करीब 50-70 लाख टन यूरिया का सालाना आयात करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि यूरिया सबसे आम उर्वरक है और इस पर सरकार बहुत अधिक सब्सिडी देती है। सरकार यूरिया पर सालाना 40,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देती है।

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अधिसूचना के अनुसार, 45 किलो के बैग की बिक्री मार्च 1, 2018 से प्रभावी है। सरकार ने डीलरों को 25 किलो से कम मात्रा में यूरिया बेचने की भी अनुमति दी है। डीलर 2 किलो यूरिया पर 1.5 रुपए, प्रति 5 किग्रा 2.25 रुपए, 10 किलो पर 3.5 रुपए, 25 किलो पर 5 रुपए पैकिंग चार्ज ले सकते हैं।

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केंद्र सरकार अधिकतम खुदरा मूल्य और उत्पादन लागत के बीच के अंतर का वहन करेगी। उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनियों को अगले दो महीनों में पुराने 50 किलोग्राम की पैकिंग वाले स्टॉक को बेचने की अनुमति दी गई है। अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद यूरिया के उपयोग को कम करना और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को प्रसारित करना है। चूंकि यूरिया सस्ता होता है, इसलिए किसान इसका बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं।

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इनपुट भाषा

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