चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी के संकेत, कीमतों में आयेगी गिरावट

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   20 Jan 2018 11:30 AM GMT

चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी के संकेत, कीमतों में आयेगी गिरावटज्यादा उत्पादन से घटेगा दाम।

ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2017-18 में चीनी का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है। ऐसे में चीनी मिलों को इस वर्ष नुकसान उठाना पड़ सकता है। चीनी उत्पादन बढ़ने से कीमतों में गिरावट भी आ सकती है। मांग में कमी के चलते महाराष्ट्र में इस समय चीनी के दाम 3,000 रुपए प्रति क्विंटल के नीचे आ गये हैं।

इस बारे में शुगर मिल्स एसोसिएशन के महाप्रबंधक अविनाश वर्मा कहते हैं "चालू सीजन में पेराई बेहतर हुई है जिससे उत्पादन भी बढ़ेगा जिसके चलते कीमतों में गिरावट हो रही है। एक महीना पहले थोक बाजार में चीनी 3,600-3,700 रुपए प्रति क्विंटल थी जो इस समय 3,000 रुपए प्रति क्विंटल के करीब पहुंच चुकी है। एक महीने पहले खुदरा बाजार में चीनी 40-42 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रही थी।

इस सीजन में कीमतों में अभी तक 15 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। इस साल चीनी का उत्पादन पिछले साल की अपेक्षा करीब 30 फीसदी अधिक हुआ है। देश में इस साल करीब 2.5 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले 2.03 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। उत्तर प्रदेश में 12 जनवरी तक चीनी का उत्पादन 41.73 लाख टन हो चुका है जबकि पिछले साल इस अवधि तक यहां उत्पादन 33.26 लाख टन हुआ था।"

ये भी पढ़ें- यूपी के 600 गाँव देंगे उन्नत प्रजाति का गन्ना बीज  

ये भी पढ़ें- 2030 तक 35 मिलियन टन चीनी की होगी आवश्यकता

2015-16 के अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, क्योंकि यह अनुमानित 145.39 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन करता है, जो अखिल भारतीय उत्पादन का 41.28 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल 2.17 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में बोई जाती है, जो कि अखिल भारतीय गन्ने की खेती का 43.79 प्रतिशत हिस्सा है।

महाराष्ट्र 2015-16 में गन्ने के 72.26 मिलियन टन अनुमानित उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है, जो कि अखिल भारतीय गन्ना उत्पादन का 20.52 प्रतिशत है। महाराष्ट्र की कृषि भूमि का क्षेत्रफल जहां गन्ने की कुल बुवाई 0.99 मिलियन हेक्टेयर पर की जाती है वह मोटे तौर पर काली मिट्टी से युक्त क्षेत्र है।

वर्ष 2015-16 में कर्नाटक 34.48 मिलियन टन गन्ना उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर आता है, जो कि देश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 11 प्रतिशत है। राज्य की कृषि भूमि के 0.45 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र के कुल क्षेत्र पर गन्ने की बुवाई की जाती है। तमिलनाडु गन्ने का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो कि 26.50 मिलियन टन गन्ना का अनुमानित उत्पादन करता है, जो कि देश के गन्ना उत्पादन का लगभग 7.5 प्रतिशत है। बिहार 14.68 मिलियन टन गन्ना के उत्पादन के साथ आता है – यह देश के गन्ना उत्पादन का 4.17 प्रतिशत है।

ये भी पढ़ें- गन्ने से चीनी मिलें मालामाल, फिर भी किसान खस्ताहाल  

चालू पेराई सीजन में बेहतर पेराई के चलते चीनी उत्पादन अधिक रहने की संभावना है। चीनी उत्पादन बढ़ने के कारण कीमतों में गिरावट हो रही है। उत्पादन बढऩे के साथ मांग में कमी के चलते महाराष्ट्र में आज चीनी के दाम 3,000 रुपए प्रति क्विंटल के नीचे लुढ़क गए।

ये भी पढ़ें- चमकदार गुड़ आप को कर सकता है बीमार , होता है केमिकल का इस्तेमाल

चालू पेराई सीजन में एक अक्टूबर से अभी तक चीनी के दाम 15 फीसदी गिरे हैं जिनमें फिलहाल सुधार की उम्मीद भी नहीं दिख रही है। हाजिर (नकदी बाजार) बाजार में 30 एस किस्म की चीनी के दाम गिरकर 2,990 रुपए प्रति पहुंच गए। एपीएमसी मार्केट में चीनी के दाम 3,150-3,250 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए, लेकिन मंडी चार्ज और दूसरे शुल्क काटने के बाद इसके दाम 3,000 रुपये के नीचे जा रहे हैं। चालू सीजन में चीनी की कीमतों में 15 फीसदी से अधिक की गिरावट हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश चीनी मिल्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी की दर बढ़कर 10.19 फीसदी की आ रही है जबकि पिछले पेराई सीजन में यह दर 9.87 फीसदी की ही मिल रही थी। ज्यादा गन्ना पेराई के अनुमानों से इस साल चीनी के अलावा शीरा, रेक्टिफाइड स्पिरिट और खोई जैसे उत्पादों की कीमतों में भी 75-80 फीसदी तक की गिरावट आई है।

पिछले साल चीनी मिलों को लाभ मिल रहा था क्योंकि गन्ने की कम उपलब्धता के कारण एक्स फैक्टरी कीमत उत्पादन लागत से करीब 10-12 फीसदी अधिक थी, लेकिन इस साल मिलों को गन्ने की अधिक उपलब्धता के कारण चीनी उत्पादन लागत से 8 से 10 फीसदी कम पर बेचनी पड़ रही है जिससे चीनी मिलों को नुकसान हो रहा है।

ये भी पढ़ें- बांग्लादेश, श्रीलंका में भारतीय चीनी पर कम शुल्क चाहता है इस्मा 

देश में 30.11.2012 की स्‍थिति के अनुसार 682 चीनी मिलें स्‍थापित हैं जिनकी पिराई क्षमता लगभग 300 लाख टन चीनी उत्‍पादन की है। यह क्षमता मोटे तौर पर निजी क्षेत्र की तथा सहकारिता क्षेत्र की यूनिटों में बराबर विभाजित है। कुल मिलाकर चीनी मिलों की क्षमता 2500 टीसीडी से 5000 टीसीडी के रेंज में है लेकिन इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है तथा यह क्षमता 10000 टीसीडी को पार कर रही है। दो आधुनिक रिफाइनरीज भी देश में गुजरात तथा पश्‍चिम बंगाल के तटवर्ती क्षेत्रों में स्‍थापित की गई हैं। ये रिफाइनरियां मुख्‍यतया आयातित कच्‍ची चीनी तथा घरेलू कच्‍ची चीनी से रिफाइंड चीनी का उत्‍पादन करती हैं।

इंडस्ट्री संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार ब्राजील के बाद भारत चीनी उत्पादन में सबसे आगे है। चालू शुगर सीजन ( 2016-17) में देश में 2.02 करोड़ टन चीनी का उत्पादन रहा था। शुगर सीजन अक्टूबर में शुरू होकर सितंबर तक चलता है। घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने अप्रैल-मई के बीच 5 लाख टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट को मंजूरी दी है। सरकार आगे भी त्योहारी सीजन को देखते हुए चीनी महंगी न हो इसके लिए और चीनी आयात की योजना बना रही है। देश में हर साल करीब 2.40 करोड़ टन से लेकर 2.50 करोड़ टन चीनी की खपत होती है।

ये भी पढ़ें- 6000 साल पहले भारत में शुरू हुई थी गन्ने की खेती, पढ़िए गन्ने से शक्कर तक का पूरा सफर

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top