इस समय तोरिया ( लाही ) की करें बुवाई , होगा मुनाफ़ा 

इस समय तोरिया ( लाही ) की करें बुवाई , होगा मुनाफ़ा तोरिया की फसल 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क/गाँव कनेक्शन

अंबेडकरनगर। इस समय जिन किसानों का खेत खाली है, वे खेतों में तोरिया (लाही) की बुवाई कर सकते हैं या जिन किसानों ने धान की अगेती फसल लगाई है उस की कटाई कर तोरिया की बुवाई कर सकते हैं।

नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, फैजाबाद द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पाती अंबेडकर नगर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रवि प्रकाश मौर्य बता रहे हैं कि कैसे तोरिया की बुवाई कर सकते हैं। तोरिया खरीफ रबी के बीच में बोई जाने वाली तिलहनी फसल है। इसकी खेती करके अतिरिक्त आय अर्जित किया जा सकता है। पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई के बाद दो-तीन जुताई देसी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। तोरिया की उन्नत प्रजातियां है, टी-9, भवानी ,पीटी 303 एवं तपेश्वरी। है जो 90-95 दिन के अंदर पक जाती है।

इनकी उपज क्षमता 12 से 15 कुंटल प्रति हेक्टेयर होती है एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में चार किलोग्राम बीज लगता है। रोगों से सुरक्षा के लिए उपचारित व प्रमाणित बीज होना चाहिए। इसके लिए तीन ग्राम थीरम से प्रति किलोग्राम की दर से बीज को उपचारित करें। सितंबर के अंत तक बुवाई कर लें। गेहूं की अच्छी फसल लेने के लिए बुवाई सितंबर के पहले पखवाड़े में समय मिलते ही करना चाहिए।

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सितंबर के दूसरे पखवाड़े तक करें बुवाई

भवानी प्रजाति की बुवाई सितंबर के दूसरे पखवाडे तक कर सकते हैं। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए। बुवाई के पहले 110 किलोग्राम यूरिया, 312.5 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फे्ट और म्यूरेट आफ पोटाश 85 किग्रा. प्रति हेक्टेयर मे डाले। 110 किग्रा. यूरिया पहली सिंचाई यानि बुवाई के 25-30 दिन के अन्दर टाप ड्रेसिंग के रूप मे डाले। घने पौधों को बुवाई के 15 दिन के अंदर निकालकर पौधों की आप की दूरी 10 से 15 सेंमी. कर देनी चाहिए और खरपतवार नष्ट करने के लिए एक निराई-गुड़ाई भी साथ में कर देनी चाहिए। खरपतवार ज्यादा हो तो पेंडीमेथिलीन 30 ईसी का 3.3 लीटर की दर से 800 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के बाद और जमाव से पहले छिड़काव करना चाहिए। फूल निकलने के पूर्व की अवस्था पर सिंचाई करना आवश्यक है। जल निकास की व्यवस्था करें। फसल में कीट प्रकोप होने पर प्रबंन्धन करें।

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