Pashudhan Registration: देसी पशुधन संरक्षण पर जोर, 2047 तक 100% पंजीकरण का लक्ष्य

Preeti Nahar | Jan 16, 2026, 14:35 IST
Share
सरकार ने देसी पशुधन नस्लों की कमी को एक गंभीर चिंता का विषय माना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, 2008 में 242 नस्लों को पंजीकृत किया गया था और अब 2047 तक सभी देसी नस्लों का 100 फीसदी पंजीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), दिल्ली में देसी पुशधन के संरक्षण को लेकर कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को वर्ष 2025 के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार से नवाजा गया।
2047 तक सभी देसी नस्लों का 100 फीसदी पंजीकरण का लक्ष्य
2047 तक सभी देसी नस्लों का 100 फीसदी पंजीकरण का लक्ष्य
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ देसी पशुओं की नस्लों की खेती से अलग करके नहीं देखा जा सकता। लेकिन पिछले कुछ समय से देसी पशुओं की कई नस्लें लुप्त हो रही हैं। देसी पशुधन को बचाने, उनकी किस्मों को संरक्षित करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की देसी पशुधन नस्लों के संरक्षण के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत का पशुधन से रिश्ता सिर्फ़ आर्थिक या पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह असल में इकोलॉजिकल है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देसी पशुओं की घटती आबादी को रोकना और उनकी विलुप्त होती किस्मों को बचाना था, जो भारत के कृषि और दुग्ध उत्पादन के लिए बेहद ज़रूरी हैं।

किन नस्लों को मिला रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट

देसी पशुधन, जैसे मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे जुगाली करने वाले जानवर, खेती की इकॉनमी की रीढ़ हैं। इनका विकास सीधे किसानों की खुशहाली, मजबूती और इनकम सिक्योरिटी से जुड़ा है। सरकार ने इन देसी पशुधन नस्लों की कमी को एक गंभीर चिंता का विषय माना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, 2008 में 242 नस्लों को पंजीकृत किया गया था और अब 2047 तक सभी देसी नस्लों का 100 फीसदी पंजीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।

किन्हें मिला नस्ल संरक्षण पुरस्कार

ICAR  नस्ल संरक्षण पुरस्कार  2025
ICAR नस्ल संरक्षण पुरस्कार 2025


इस कार्यक्रम में नई पहचानी गई पशुओं और पोल्ट्री नस्लों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिए गए। साथ ही, किसानों, ब्रीडर्स और संस्थाओं को उनके योगदान के लिए ब्रीड कंजर्वेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए 2019 में शुरू की गई नेशनल पहल का भी ज़िक्र किया गया। कार्यक्रम में स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को वर्ष 2025 के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार से नवाजा गया। व्यक्तिगत श्रेणी में, जीतुल बुरागोहेन को लुइट भैंस के संरक्षण के लिए पहला पुरस्कार मिला। कुडाला राम दास को पुंगनूर मवेशियों के संरक्षण के लिए दूसरा पुरस्कार दिया गया। तिरुपति और रामचंद्रन काहनार को नस्ल संरक्षण में सराहनीय काम के लिए सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2008 से 242 जानवरों की नस्लें रजिस्टर

जाने-माने एग्रोनोमिस्ट डॉ मांगी लाल जाट
जाने-माने एग्रोनोमिस्ट डॉ मांगी लाल जाट


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ मांगी लाल जाट ने आर्थिक कारणों से भैंसों की तुलना में मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता जताई और सुधार पर ध्यान देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नस्ल रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ संरक्षण से कहीं ज़्यादा है। यह बायोलॉजिकल रिसोर्स पर सॉवरेन अधिकार, किसानों के लिए फायदा-शेयरिंग और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों की सुरक्षा को मुमकिन बनाता है। क्योंकि देसी पशुओं की नस्लों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि देश के सतत विकास के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पिछले पंद्रह सालों में किसानों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया और कहा कि वे नस्ल संरक्षण की कोशिशों के केंद्र में बने हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2008 से 242 जानवरों की नस्लें रजिस्टर की गई हैं और 2047 तक सभी देसी जानवरों की नस्लों का 100 परसेंट रजिस्ट्रेशन करना है।

ये भी पढ़ें: ब्रह्मपुत्र के टापुओं से राष्ट्रीय सम्मान तक: लुइट भैंस को बचाने वाले किसान जितुल बुरागोहेन
Tags:
  • Agriculture
  • किसानों के समृद्धि
  • न्यूट्रिशन
  • shivraj singh chouhan
  • Animal Husbandry
  • Animal Registration
  • ICAR
  • Pashudhan Registration