मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा में उत्तर प्रदेश है सबसे आगे, 67 लाख से ज़्यादा पशुओं का हुआ इलाज़
Gaon Connection | Feb 04, 2026, 15:38 IST
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (MVU) के इस्तेमाल में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। राज्य में 520 मोबाइल यूनिट्स सक्रिय हैं, जिनसे अब तक 35.78 लाख किसानों और 67.49 लाख से ज्यादा पशुओं को इलाज मिला है। यह सेवा ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है।
ग्रामीण भारत में पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है, लेकिन बीमार पशुओं को समय पर इलाज न मिलना हमेशा एक बड़ी परेशानी रही है। इसी समस्या को दूर करने के लिए शुरू की गई मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (MVU) ने अब गाँव-गाँव तक डॉक्टरों की पहुंच आसान बना दी है। इस पहल में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे निकलकर सामने आया है।
उत्तर प्रदेश में इस समय 520 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ सक्रिय हैं, जो किसी भी राज्य से ज्यादा हैं। इन इकाइयों के जरिए अब तक करीब 35.78 लाख किसानों को सेवाएं मिल चुकी हैं और 67.49 लाख से अधिक पशुओं का इलाज किया गया है। सेवा कवरेज, किसानों तक पहुंच और इलाज किए गए पशुओं की संख्या, तीनों मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य आते हैं, लेकिन कुल प्रभाव के मामले में उत्तर प्रदेश अभी भी सबसे आगे बना हुआ है।
देश के दूर-दराज़ इलाकों में पशुपालकों को समय पर इलाज न मिल पाना लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की शुरुआत की। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021-22 से अब तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 4,019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इन यूनिट्स का उद्देश्य यह है कि किसानों को अपने पशुओं के इलाज के लिए दूर अस्पताल न जाना पड़े और डॉक्टर सीधे गाँवों में पहुंचकर इलाज, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
इस योजना की एक खास बात यह है कि किसान टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके सीधे मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा बुला सकते हैं। कॉल सेंटर पर मौजूद प्रशिक्षित कर्मचारी और पशु चिकित्सक जरूरत के अनुसार नजदीकी यूनिट को सूचना भेजते हैं। इसके बाद डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंचकर पशुओं का इलाज करती है। यह सुविधा खासतौर पर पहाड़ी, आदिवासी और सुदूर इलाकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक देशभर में करीब 1.24 करोड़ किसानों को इन मोबाइल यूनिट्स से सेवाएं मिल चुकी हैं, जबकि 2.54 करोड़ से अधिक पशुओं का इलाज किया गया है। इसमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और अन्य पशुधन शामिल हैं। बड़े पशुपालन राज्यों में इस योजना का असर साफ दिख रहा है। समय पर इलाज मिलने से पशुओं की सेहत बेहतर हुई है और दूध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।
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मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों का मुख्य उद्देश्य गाँव-गाँव जाकर पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। कई ऐसे इलाके हैं जहां स्थायी पशु अस्पताल नहीं हैं या दूरी बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह मोबाइल सेवा किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। फिलहाल MVU की संख्या बढ़ाने का कोई नया प्रस्ताव नहीं है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जा रही है। फंड के उपयोग, लाभार्थियों की संख्या और इलाज की गुणवत्ता के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और थर्ड पार्टी मूल्यांकन भी किया जा रहा है।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों ने न सिर्फ पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी हैं, बल्कि बीमारी से होने वाले नुकसान को भी कम किया है। समय पर टीकाकरण और इलाज से पशुओं की मृत्यु दर घटी है और किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिली है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालन को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
ये भी पढ़ें: Goat-Based Integrated Farming System: जलभराव इलाकों में खेती का नया रास्ता खोल रहा ये प्रयोग
उत्तर प्रदेश में इस समय 520 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ सक्रिय हैं, जो किसी भी राज्य से ज्यादा हैं। इन इकाइयों के जरिए अब तक करीब 35.78 लाख किसानों को सेवाएं मिल चुकी हैं और 67.49 लाख से अधिक पशुओं का इलाज किया गया है। सेवा कवरेज, किसानों तक पहुंच और इलाज किए गए पशुओं की संख्या, तीनों मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य आते हैं, लेकिन कुल प्रभाव के मामले में उत्तर प्रदेश अभी भी सबसे आगे बना हुआ है।
देश के दूर-दराज़ इलाकों में पशुपालकों को समय पर इलाज न मिल पाना लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की शुरुआत की। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021-22 से अब तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 4,019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इन यूनिट्स का उद्देश्य यह है कि किसानों को अपने पशुओं के इलाज के लिए दूर अस्पताल न जाना पड़े और डॉक्टर सीधे गाँवों में पहुंचकर इलाज, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालन को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
इस योजना की एक खास बात यह है कि किसान टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके सीधे मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा बुला सकते हैं। कॉल सेंटर पर मौजूद प्रशिक्षित कर्मचारी और पशु चिकित्सक जरूरत के अनुसार नजदीकी यूनिट को सूचना भेजते हैं। इसके बाद डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंचकर पशुओं का इलाज करती है। यह सुविधा खासतौर पर पहाड़ी, आदिवासी और सुदूर इलाकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक देशभर में करीब 1.24 करोड़ किसानों को इन मोबाइल यूनिट्स से सेवाएं मिल चुकी हैं, जबकि 2.54 करोड़ से अधिक पशुओं का इलाज किया गया है। इसमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और अन्य पशुधन शामिल हैं। बड़े पशुपालन राज्यों में इस योजना का असर साफ दिख रहा है। समय पर इलाज मिलने से पशुओं की सेहत बेहतर हुई है और दूध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।
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मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों का मुख्य उद्देश्य गाँव-गाँव जाकर पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। कई ऐसे इलाके हैं जहां स्थायी पशु अस्पताल नहीं हैं या दूरी बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह मोबाइल सेवा किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। फिलहाल MVU की संख्या बढ़ाने का कोई नया प्रस्ताव नहीं है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जा रही है। फंड के उपयोग, लाभार्थियों की संख्या और इलाज की गुणवत्ता के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और थर्ड पार्टी मूल्यांकन भी किया जा रहा है।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों ने न सिर्फ पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी हैं, बल्कि बीमारी से होने वाले नुकसान को भी कम किया है। समय पर टीकाकरण और इलाज से पशुओं की मृत्यु दर घटी है और किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिली है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालन को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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