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निःस्वार्थ भाव से घायल पशुओं की सेवा और मृत पशुओं का समाधि बनाने वाले भगत राम

रमेश जायसवाल के घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है लेकिन उनका हौंसला उन्हे हर रोज सड़कों पर भेजता है ताकि वह असहाय पशुओं की मदद कर सकें।

Ramji MishraRamji Mishra   29 Jun 2020 6:30 AM GMT

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के मीरानपुर कटरा के रहने वाले रमेश जायसवाल को गायों और पशुओं के प्रति उनके सेवा भाव के कारण लोग अब भगतराम के नाम से बुलाते हैं। वह अब तक सैकड़ों घायल पशुओं का इलाज कर चुके हैं जिनमें बंदर, गाय, कुत्ते, भैंस सभी शामिल हैं। भगत का अधिकतर समय गौ शाला में ही बीतता है। वह मृत पशुओं का अंतिम संस्कार भी करते हैं और उनकी समाधि भी बनवाते हैं।

भगत राम की पत्नी सरला देवी कहती हैं, "वह घुमंतू, आवारा और घायल हुए पशुओं का इलाज करते हैं। अगर कोई आकर बता दे कि फलां जगह कोई जानवर घायल है तो वह तुरंत ही घर बिना बताए ही निकल जाते हैं। वह पशुओं के इलाज में सावधान भी रहते हैं और कई बार कीड़े पड़े घावों को हाथ से साफ करते हैं जिसे लेकर हम घर के लोग इन पर नाराज भी हो जाते हैं। वह घर से निकल कर गोशाला निकल जाते हैं और वहां गायों के साथ ही रहते हैं उनकी सेवा में लग जाते हैं।"

"घर में परचून की एक दुकान है वह उसके पैसे निकाल ले जाते हैं और उसे पशुओं पर खर्च कर देते हैं। कई कई दिन गौ शाला में गायों के पास रहते हैं। उन्होने कई मृत पशुओं की समाधि भी बनाई है जिनमें कुछ पक्की भी हैं। वह घायल पशुओं का निस्वार्थ इलाज करते हैं। बंदर गाय या फिर और कोई पशु हो जितना भी संभव होता है, वह पशुओं के लिए करते हैं। अगर कोई पशु इलाज के बाद भी नहीं बचता है तो वह उसकी अंतिम यात्रा निकाल कर उसका अंतिम संस्कार विधिवत ढंग से कर देते हैं," सरला देवी आगे कहती हैं।

भगत जी के बारे में एक और घटना का उल्लेख करते हुए कस्बे के ही एक शख्स आशीष जायसवाल बताते हैं कि नहरिया से गोशाला की तरफ जाने वाली सड़क पर ईदगाह भी है। यहां पर पहले लोग खुले में शौच करते थे। भगत ने आस पास के लोगों को कई बार समझाया कि यह उचित नहीं है लेकिन लोग नहीं माने और इसके बाद भगत खुरपी लेकर दिन में वहाँ शौच से फैली गंदगी हर रोज साफ करने लगे। इसके बाद लोगों को अपना रवैया बदलना ही पड़ा और उन लोगों ने खुले में शौच करना बंद कर दिया।

भगतराम मृत जानवरों के लिए पक्की समाधि भी बनाते हैं। यह समाधि करीब 30 से लेकर 20 साल पहले की हैं। इसमें गाय और बंदर की समाधि है। यह भगत ने उन पशुओं की याद में बनवाई थी। भगत के पड़ोस में रहने वाली किरण बताती हैं कि वह ना सिर्फ पशुओं की सेवा करते हैं, बल्कि उन्हे नहलाते हैं। चारा पानी की व्यवस्था करते हैं। इतना ही नहीं अगर किसी पशु की मृत्यु होती है तो वह उसका अंतिम संस्कार भी करते हैं।

उनके इस काम में अब स्थानीय लोग भी साथ आए हैं। मीरानपुर कटरा की गौशाला में कार्यरत कर्मचारी जय सिंह ने बताया कि भगत गौशाला में रोज आते हैं। गायों की अपने हाथों से सेवा करते हैं, उन्हे पानी पिलाते हैं, चारा डालते हैं और घायल पशुओं की देखभाल करते हैं। हाल ही में उनके घर के पास में ही एक बार कुछ पिल्ले दुर्घटना में मर गए जिसके बाद भगत ने इसकी शिकायत की और अब घर के पास निकली सड़क पर गति अवरोधक बना दिए गए हैं ताकि भविष्य की संभावित दुर्घटना को टाला जा सके।

रमेश जायसवाल के घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है लेकिन उनका हौंसला उन्हे हर रोज सड़कों पर भेजता है ताकि वह असहाय पशुओं की मदद कर सकें।

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