गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड की ज़बर्दस्त तैयारी, कईं राज्यों के किसान ट्रैक्टर लेकर दिल्ली रवाना

गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली में होने वाली किसानों की ट्रैक्टर परे़ड के लिए तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही हैं। दिल्ली पुलिस से ट्रेक्टर परेड के लिए मिली मंज़ूरी के बाद किसानों का उत्साह और बढ़ गया है। किसान संगठनों के मुताबिक, ये परेड ऐतिहासिक होगी। देश के कईं राज्यों से के गावों से किसान ट्रेक्टर लेकर दिल्ली की तरफ चल दिए हैं। बताया जा रहा है कि 26 जनवरी को बाहरी दिल्ली की सडकों पर लाखों ट्रैक्टरों की लंबी-लंबी कतारें दिखाई देंगी।

जसकरण सिंह (50 ) शेरखानवाला (मानसा) से अपने गाँव के पच्चीस अन्य लोगों के साथ 23 नवंबर को टिकरी बॉर्डर पहुंचे हैं। 26 जनवरी की परेड के लिए वो अपने गाँव से दस ट्रेक्टर लेकर आए हैं। उनका कहना है कि 26 जनवरी का दिन ऐतिहासिक होगा जब देश के अन्नदाता विशाल गणतंत्र दिवस परेड निकालेंगे। जसकरण सिंह 26 नवंबर से आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं। उस समय वो अपने साथ पांच ट्रेक्टर लेकर चले थे। उनका कहना है कि पहले के मुकाबले अब बॉर्डर पर भीड़ काफी बढ़ गई है। कई लोग अलग-अलग राज्यों से आंदोलन का समर्थन करने आ रहे हैं। किसान आंदोलन ने 'जनांदोलन' का रूप ले लिया है। ये केवल किसान का ही नहीं हर वर्ग का आंदोलन बन गया है।

जसप्रीत (23) लुधियाना के भैनी गाँव से किसानों की 26 जनवरी परेड मे हिस्सा लेने पहुंचे हैं। अपने गाँव से वो अकेले टिकरी बॉर्डर आए हैं। उनका कहना है कि परेड मे हर गाँव की भागीदारी अहम है फिर चाहे एक आदमी आए या सौ। उन्होंने बताया, "मेरे गाँव से मैं अकेले आया हूँ। मेरा मानना है कि हर घर, कस्बे , गाँव या शहर से एक आदमी ज़रूर आना चाहिए जो इस परेड का हिस्सा बने और किसानों के हक़ के लिए आवाज़ उठाए।"

निर्मल सिंह फतेहबाद से अपने साथ आठ ट्रैक्टर लेकर टिकरी बॉर्डर पहुंचे हैं। उन्होंने गाँव कनेक्शन को बताया कि बॉर्डर पर पहले से ही कई ट्रैक्टर मौजूद थे जिसके चलते उनको ट्रैक्टर रखने के लिए जगह ढूंढ़ने में घंटों लग गए। हर गाँव से दस से बीस ट्रैक्टर आ रहे हैं। 25 जनवरी तक किसानों और ट्रैक्टरों की संख्या तीन गुनी हो जाएगी।


सुखोन सिंह (37 ) बख्शवाड़ा (मानसा) से टिकरी बॉर्डर पहुंचे हुए हैं। शुक्रवार को किसान नेताओं ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने ऊपर हमले की साज़िश को बेनक़ाब किया था। इस घटना के मद्देनज़र बॉर्डर पर कड़े सुरक्षा इन्तेज़ामात किए गए हैं। मेन स्टेज के प्रवेश द्वार पर बैरिकेड लगाया गया है। सुखोन ने बताया कि प्रवेश करने से पहले सबके बैग की तलाशी की जाती है। संदिग्ध व्यक्ति की खबर पुलिस को दे देते हैं। 26 जनवरी को किसान शांतिपूर्वक अपनी ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। सुरक्षा टीम बनाई जाएगी जो किसी भी दुर्घटना या अनहोनी का ध्यान रखेगी।

भारत का गणतंत्र दिवस रंगबिरंगी विशाल झांकियों के लिए विश्व भर मे प्रसिद्ध हैं। किसानों ने भी ट्रेक्टरों को झाँकियों की तरह सजाना शुरू कर दिया है। हर ट्रैक्टर पर तिरंगा लगाया जा रहा है। युवा और बुज़ुर्ग कई लाख पोस्टर और बैनर तैयार करने मे लगे हुए हैं। इन पोस्टरों पर किसानों के संघर्ष और बलिदान को दिखाया जाएगा।

पश्चिम बंगाल से ख़ास कलाकारों की एक टीम टिकरी बॉर्डर पहुंची है। ये लोग किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों की प्रतिमाएँ तैयार कर रहे हैं। देबरंजन रॉय कोलकाता से ट्रैन का सफर तय कर अपने साथी कलाकारों के साथ टिकरी बॉर्डर पहुंचे हैं। देबरंजन रॉय पिछले बीस साल से मूर्तियां बना रहे हैं और देश के बड़े कलाकारों में उनका नाम भी शुमार है। गाँव कनेक्शन से हुई बातचीत मे उन्होंने हमें बताया कि वो यहाँ किसानों का साथ देने आए हैं। लोगों को समझना चाहिए ये आंदोलन केवल किसानों के लिए नहीं है। सरकार ने जमाखोरी को मंज़ूरी दे दी है। इन क़ानूनों का ख़ामियाज़ा आम जनता को भी उठाना पड़ेगा जब खाना महंगा हो जाएगा। देबरंजन और उनकी टीम संत बाबा राम सिंह और छोटू राम जी की मूर्तियां बना रहे हैं। बता दें संत बाबा राम सिंह ने किसानों की मांगे न माने जाने पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। देबरंजन ने पांच लाख की लागत से इन मूर्तियों को तैयार किया है। इन मूर्तियों को बनाने और झाँकियाँ सजाने के लिए उन्होंने किसी से पैसे नहीं लिए हैं और वो अपनी इच्छा से किसानों का समर्थन करने दिल्ली आए हैं । देबरंजन का मानना है कि आर्टिस्ट होने के नाते ये उनका कर्त्तव्य है कि वो अपनी कला के माध्यम से सामाजिक उत्थान के लिए काम करे।


26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के लिए, भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) की अगुवाई में लगभग 20,000 ट्रैक्टरों का एक काफिला 23 जनवरी को संगरूर जिले से रवाना हुआ जो टिकरी बॉर्डर पहुँच रहा है। सभी ट्रेक्टर अलग-अलग ज़िलों से हैं। संगठन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलान ने कहा कि किसानों का ये मार्च शांतिपूर्वक होगा। युवा, महिलाएँ और बुज़ुर्ग उत्साहित हैं और सभी इसका हिस्सा बनेंगे।

गणतंत्र दिवस रेड की फ़ुल ड्रेस रिहर्सल की ही तरह किसान भी फ़ुल ड्रेस रिहर्सल कर रहे हैं। सुरेवाला गाँव (हिसार) की महिलाएँ ट्रैक्टर लेकर निकल पड़ी हैं। उनका कहना है कि परेड मे नारी शक्ति का प्रदर्शन होगा। सबको पता चल जाएगा महिला किसान भी इस आंदोलन का उतना ही हिस्सा हैं जितना पुरुष। छारा गाँव से आए किसान भी ट्रेक्टर पर सवार होकर 26 जनवरी की तैयारी मे लग गए हैं और बॉर्डर पर जगह-जगह जाकर तिरंगा बाँट रहे हैं।

नए कृषि क़ानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन पिछले दो महीने से जारी है और किसान लगातार क़ानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सरकार के साथ हुई पिछले ग्यारह दौर की बातचीत के बावजूद किसानों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। ऐसे मे किसान 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड को लेकर गंभीर हैं। पुलिस ने भी मंजूरी दे दी है जिसके बारे में अभी और जानकारी मिलनी बाकी है। इस बीच किसानों ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। सभी उम्र और वर्ग के लोग इस परेड का हिस्सा बनेंगे। परेड के दिन किसानों द्वारा जगह-जगह पानी और लंगर सेवा का प्रबंध भी किया जाएगा। ट्रैक्टर के अलावा कई लोग कारें लेकर भी बॉर्डर पहुँच रहे हैं। माना जा रहा है परेड मे लाखों की संख्या मे लोग जुड़ सकते हैं।


दिल्ली पुलिस और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच इस बात की सहमति बन गई है कि किसानों की ट्रैक्टर परेड, जिसे किसान गणतंत्र परेड कहा गया है, दिल्ली के अंदर होगी। दिल्ली पुलिस से मुलाकात के बाद योगेंद्र यादव ने कहा कि हमारे और दिल्ली पुलिस के बीच मार्ग तय हो गया है। बैरीकेड्स खोले जाएंगे और किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे। किसान संगठनों ने किसानों से ट्रैक्टर परेड में पर्याप्त अनुशासन बरतने की अपील की है। परेड में सबसे आगे महिलाएं, फिर किसान नेता, फिर बुजुर्ग और अंत में युवा रहेंगे।

वहीं किसानों ने 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर परेड का भी रूट तय कर लिया है-

1. सिंघु बॉर्डर के किसान संजय गांधी ट्रांसपोर्ट होते हुए बवाना तक जाएंगे।

2. टिकरी बॉर्डर के किसान नांगलोई, नजफगढ़ होते हुए ढांसा तक रैली निकलेंगे।

3. गाजीपुर बॉर्डर के किसान यूपी गेट, अप्सरा बॉर्डर होते हुए दुहई तक जाएंगे।

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