दवाओं के नाम पर मची लूट से हैं परेशान तो अपनायें ये पारंपरिक घरेलू हर्बल नुस्खे

असल दवाएं तो आपके और हमारे इर्द गिर्द, हमारे परिवेश में ही हैं। इस सप्ताह कुछ खास चुनिंदा नुस्खों के बारे में ताकि आमतौर पर होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण आप घर बैठकर ही कर पायें।

Deepak AcharyaDeepak Acharya   26 Aug 2019 12:12 PM GMT

दवाओं के नाम पर मची लूट से हैं परेशान तो अपनायें ये पारंपरिक घरेलू हर्बल नुस्खे

कृत्रिम और रसायन आधारित दवाओं के दुष्प्रभाव से हर व्यक्ति परिचित है और इस तरह की दवाओं से लोग तौबा भी करना चाहते हैं। पिछले एक दशक में लोगों का हर्बल मेडिसिन्स की तरफ भी रुझान काफी होने लगा है। लेकिन हर्बल मेडिसिन के नाम पर बाजार में काफी लूट मची है, दवाओं के असर को लेकर खोखले दावों ने इस औषधि विज्ञान पर सवालिया निशान खड़े कर दिये हैं।

आखिर समस्या कहाँ है? समस्या है दवाओं की गुणवत्ता, यदि दवाओं का असर होगा तो आम लोगों का विश्वास भी इस तरफ बढ़ेगा। लेकिन सबसे मूल बात ये है कि हमें बाज़ार तक कूच करने की जरूरत भी क्यों हो? असल दवाएं तो हमारे इर्द-गिर्द, हमारे परिवेश में ही हैं। इस सप्ताह कुछ खास चुनिंदा नुस्खों को विस्तार से आपको बताएंगे ताकि आमतौर पर होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण आप घर बैठकर ही कर पायें।

दर्द निवारक तेल

बाजार में सैकड़ों दर्द निवारक तेल बिक रहे हैं और किस तेल का कितना असर है इसका कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं, आप खुद ही घर पर बैठकर एक अच्छा दर्द निवारक तेल तैयार कर सकते हैं। आदिवासियों के ज्ञान पर आधारित इस नुस्खे के क्लिनिकल प्रमाण भी चौंकाने वाले हैं।

काली उड़द की दाल (करीब 10 ग्राम), बारीक पीसा हुआ अदरक (4 ग्राम) को सरसों के तेल (50 मिली) में 5 मिनट तक गर्म किया जाए और जब यह पूरा गर्म हो जाए तो इसमें पिसा हुआ कपूर (2 ग्राम) चूरा करके डाल दिया जाए। इस तेल को छानकर अलग कर लिया जाए। जब तेल गुनगुना या हल्का सा गर्म हो तो इस तेल से दर्द वाले हिस्सों या जोड़ों की मालिश की जाए, जल्द ही दर्द में तेजी से आराम मिलता है। ऐसा दिन में 2 से 3 बार किया जाना चाहिए। यह तेल आर्थरायटिस जैसे दर्दकारक रोगों में भी गजब काम करता है।

डायबिटिस या मधुमेह के नियंत्रण के लिए देसी आदिवासी ज्ञान

पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल होने वाले इन दो नुस्खों को वैज्ञानिक तौर पर अति कारगर साबित किया जा चुका है। इन दोनों नुस्खों को पारंपरिक हर्बल जानकार बतौर कारगर उपाय मधुमेह के रोगियों को खूब देते हैं। एक चम्मच अलसी के बीजों को अच्छी तरह से चबाकर खाइये और दो गिलास पानी पीजिए। ऐसा प्रतिदिन सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले करना है।

कई इलाकों में अलसी के बीजों को हल्का सा भून लिया जाता है और इस पर थोड़े सा काले नमक का छिड़काव भी किया जाता है। प्रतिदिन खाना खाने के बाद इसका सेवन इंसुलिन के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मददगार होता है। इसके अलावा अलसी भोजन को पचाने के लिए भी बेहद मददगार होता है।

दालचीनी की छाल का चूर्ण भी डायबिटिस के लिए काफी असरदार होता है। बाज़ार से शुद्ध दालचीनी की छाल लाएं और इसे ग्राईंडर की सहायता से चूर्ण या पाउडर में तब्दील कर लें। आधा चम्मच दालचीनी का चूर्ण दो कप पानी में मिला लीजिए और इसे मध्यम आंच पर गर्म करिये।जब यह गर्म हो रहा हो तो इस मिश्रण में लौंग की दो कलियों को कुचल कर डाल दीजिए।

यह पूरा मिश्रण तब तक गर्म किया जाए जब तक कि मिश्रण की मात्रा आधी शेष ना बचे। इसे छान लिया जाए और सुबह खाली पेट लिया जाए और डायबिटिस बेकाबू होने की हालत में शाम को भी भोजन के बाद लिया जा सकता है। इन दोनों नुस्खों की शुरुआत करने से पहले अपने इंसुलिन लेवल की जाँच अवश्य करें ताकि पन्द्रह दिनों बाद जब पुन: जाँच की जाए तो फ़र्क दिखाई दे।

विज्ञान जगत के कई रिसर्च पेपर्स में इन फ़ार्मूलों से गजब के परिणामों का दावा किया गया है। आदिवासी हर्बल जानकार तो इन फ़ार्मूलों को सैकड़ों सालों से लोग पर आजमा रहे हैं। आपको किसी प्रकार की लंबी बीमारी या दवाओं के दुष्प्रभावों या एलर्जी की शिकायत हो तो इन नुस्खों के इस्तेमाल से पहले पारिवारिक डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

पैरों की बिवाइयों का देसी आदिवासी इलाज

आदिवासियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 20 ग्राम मोम लीजिए और लगभग इतनी ही मात्रा में गेंदे की ताजी बारीक-बारीक कटी हरी पत्तियाँ लीजिए। दोनों को एक बर्तन में लेकर धीमी आंच पर गर्म कीजिए, कुछ देर में मोम पिघलने लगेगी और साथ ही पत्तियों का रस भी मोम के साथ घुल जाएगा। जब मोम पूरी तरह से पिघल जाए, हल्का-हल्का खौलने लगे, बर्तन को आंच से नीचे उतार दीजिए और ठंडा होने दीजिए। मोम को सोने से पहले पैरों की बिवाइयों पर लगाइये, दिन में भी इस मोम को लगाकर जुराबें पहन लें। पैरों की बिवाइयों या कटे-फ़टे हिस्से दो दिन में ठीक होने लगेंगे।

चेहरे के दाग और मुहांसे

चेहरे पर मुहांसों और काले निशानों के बनने के बाद चेहरे की रंगत खो जाती है। पका हुआ पपीता चेहरे पर दिन में दो बार रगड़ा जाए और सूखने दिया जाए और सूखने के बाद साफ पानी से धो लिया जाए तो तेजी से फायदा होता है। ऐसा तब तक करना चाहिए जब तक कि समस्या पूर्णरूप से खत्म ना हो जाए। गर्मियों में सूरज की लपटों से त्वचा जल सी जाती है, ऐसी स्थिति में भी यह नुस्खा बेहद कारगर होता है। प्रतिदिन चेहरे पर इसे लगाकर हल्की-हल्की मालिश करने से चेहरे की खूबसूरती बढ़ जाती है। आदिवासियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतिदिन पके हुए पपीते का सेवन करने से मुहांसे नहीं होते हैं।

हॄदय विकारों के लिए देसी ज्ञान

हृदय से जुड़ी समस्याओं पर काबू पाने के लिए अर्जुन नाम के पेड़ की छाल को अति महत्वपूर्ण माना जाता है। अर्जुन की छाल से बनी चाय हॄदय विकारों से ग्रस्त रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अर्जुन की छाल का चूर्ण (1 ग्राम) एक कप पानी में खौलाया जाए, फिर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पियें तो फायदा होता है। जो लोग प्रतिदिन अर्जुन छाल के 1 ग्राम चूर्ण का सेवन करते हैं उन्हें हृदय विकारों से दूर रहने में बेहद मदद मिलती है। कच्चे लहसुन को चबाना भी हॄदय के लिए अच्छा माना जाता है।

मोटापा दूर करने और स्फूर्ति के लिए लेमन ग्रास चाय

गौती चाय या लेमन ग्रास एक घास होती है। हल्की सी नींबू की सुंगध लिए इस चाय की चुस्की गजब की ताजगी ले आती है। लेमन ग्रास की तीन पत्तियों को हथेली पर कुचलकर दो कप पानी में डाल दिया जाता है और उबाला जाता है। स्वादानुसार शक्कर डालकर इसे तब तक उबाला जाता है जब तक कि यह एक कप बचे। जो लोग अदरक का स्वाद पसंद करते हैं, वे एक चुटकी अदरक कुचल कर इसमें डाल सकते हैं। इस चाय में भी दूध का उपयोग नहीं होता है।

गौती चाय में कमाल के एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और शरीर के अंदर किसी भी प्रकार के संक्रमण को नियंत्रित करने में गौती चाय काफी असरकारक होती है। यहाँ के आदिवासियों की मानी जाए तो यह चाय मोटापा कम करने में काफी सक्षम होती है। आधुनिक शोध भी इस तथ्य को प्रमाणित करते दिखाई देती है।

हरी चाय वसा कोशिकाओं यानि एडिपोसाइट्स के निर्माण को रोकती है, इसी वजह से दुनिया के अनेक देश गौती चाय को मोटापा कम करने की औषधि के तौर पर देख रहे हैं और इस पर निरंतर शोध जारी है। नई शोधें बताती है कि वसा और कोलेस्ट्राल को कम करने वाले प्रोटीन काईनेस को क्रियाशील करने में गौती चाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

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हृदय से जुड़ी दिक्‍कतों के लिए पारंपरिक हर्बल ज्ञान


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