सरकार ने माना, बेरोजगारी दर के आंकड़े हुए थे लीक

सरकार ने माना, बेरोजगारी दर के आंकड़े हुए थे लीक

लखनऊ। सरकार ने स्वीकार किया है कि देश में बेरोजगारी दर से जुड़े आंकड़े लीक हुए थे। सांख्यिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि आधिकारिक तौर पर जारी किए जाने से पहले इसके कुछ आंकड़े लीक हुए थे।

प्रश्नकाल के दौरान सर्वे पर एक पूरक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया, सर्वेक्षण का परिणाम लीक हुआ था, यह बात दुरुस्त है। सर्वेक्षण का परिणाम 30 मई 2019 को सार्वजनिक होना था मगर इसके पहले इसका डाटा लीक हो गया था।

सिंह ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा, हम यह नहीं कह सकते हैं कि डाटा किसने लीक किया था। लेकिन किसी ने लीक जरूर किया है। सरकार ने इसे गंभरता से लिया है। इसके पीछे शायद किसी का कोई एजेंडा हो, यह हम कह नहीं सकते हैं। हम यह पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि किसने डाटा लीक किया था।

उन्होंने सर्वेक्षण में बेरोजगारी दर अपने अधिकतम स्तर 6.1 प्रतिशत पर पहुंचने की वजह से जुड़े पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि जुलाई 2017 से जून 2018 के दौरान राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा किये गये श्रम बल सर्वेक्षण से उपलब्ध पहले अनुमान के आधार पर सामान्य स्थिति में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत रही है।

सिंह ने स्पष्ट किया कि पहले पांच साल के अंतराल पर यह सर्वेक्षण किया जाता था, लेकिन अब यह सर्वेक्षण नये तरीके से प्रतिवर्ष किए जाने की शुरुआत की गई है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष की तिमाही के आधार पर किये जाने वाले इस सर्वेक्षण में नया तरीका अपनाये जाने के कारण बेरोजगारी की दर 2011-12 में किये गये पिछले सर्वेक्षण में दर्शायी गयी 2.2 प्रतिशत से अधिक आयी है।

उन्होंने कहा कि अगर पिछले तरीके से ही सर्वेक्षण होता तो यह दर पहले के स्तर के आसपास ही रहती। सिंह ने कहा कि नये तरीके अपनाने, एक ही शहर में प्रत्येक परिवार को चार बार सर्वेक्षण में शामिल करने और हर साल सर्वेक्षण करने जैसे बदलावों के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में यह बढ़ोतरी हुई है। अगले साल अगर इसमें बढ़ोतरी होने पर यह माना जा सकता है कि बेरोजगारी से निपटने के लिये सरकार के प्रयास काबिल नहीं है।

गौरतलब है कि जनवरी, 2019 में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से खबर आई थी कि भारत में बेरोजगारी दर पिछले 45 साल की तुलना में सर्वाधिक है। चुनाव के बाद आए रोजगार सर्वेक्षण के आंकड़े में इस रिपोर्ट की पुष्टि हुई थी।

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