करगिल में इंटरनेट सेवाएं बहाल, जम्मू-कश्मीर के लोगों को अभी भी इंटरनेट का इंतजार

जहां कारगिल के लोगों का इंटरनेट का इंतजार खत्म हुआ, वहीं जम्मू-कश्मीर के लोगों को अभी भी इंटरनेट बहाली का इंतजार है।

Daya SagarDaya Sagar   27 Dec 2019 2:20 PM GMT

करगिल में इंटरनेट सेवाएं बहाल, जम्मू-कश्मीर के लोगों को अभी भी इंटरनेट का इंतजार

धारा 370 हटने और लद्दाख के केंद्र शासित राज्य बनने के बाद पहली बार करगिल जिले में इंटरनेट सेवाओं की बहाली हुई है। पांच अगस्त के बाद से लगातार 145 दिनों तक यहां पर इंटरनेट सेवा निलंबित थी। हालांकि जम्मू कश्मीर राज्य के अधिकांश हिस्से में अभी भी इंटरनेट सुविधाओं की बहाली नहीं हुई है।

बीते पांच अगस्त को भारतीय संसद ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करते हुए जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने का फैसला किया था।

इस फैसले की घोषणा से पहले ही राज्य में कानून व्यवस्था का हवाला देकर इंटरनेट सेवाओं, लैंडलाइन टेलीफोन सेवाओं और मोबाइल फोन-इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया था। जम्मू कश्मीर और लद्दाख, दोनों राज्यों में धीरे-धीरे लैंडलाइन सेवा और पोस्टपेड मोबाइल सेवा की बहाली तो हो गई है लेकिन प्रीपेड मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की बहाली का इंतजार दोनों राज्यों की जनता लंबे समय से कर रही है।

कारगिल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि बीते चार महीने में कोई अप्रिय घटना लद्दाख में नहीं घटी है। इसी को देखते हुए इंटरनेट सेवा राज्य में बहाल कर दी गई है। उन्होंने स्थानीय नेताओं से अपील की है कि वे इंटरनेट का उपयोग गलत दिशा में ना करें। आपको बता दें कि लद्दाख क्षेत्र में ब्रॉडबैंड सुविधा पहले से ही बहाल है। वहीं लद्दाख के लेह जिले में मोबाइल इंटरनेट सुविधा भी पहले से ही बहाल थी।

जहां कारगिल के लोगों का इंटरनेट का इंतजार खत्म हुआ, वहीं जम्मू-कश्मीर में अभी भी इंटरनेट बहाली का इंतजार है। कश्मीर घाटी में इंटरनेट पूरी तरह से प्रतिबंधित है जबकि जम्मू में कुछ हिस्सों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सेवा बहाल की गई है। हालांकि मोबाइल इंटरनेट सेवा अभी भी जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह से प्रतिबंधित है, जो कि आम लोगों तक इंटरनेट के पहुंच का प्रमुख माध्यम है।

श्रीनगर में ग्रामीण विकास विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्यरत जमीर अहमद कहते हैं कि इंटरनेट बंद होने से कश्मीर के आम नागरिकों को बहुत नुकसान हो रहा है और उन्हें पढ़ाई, नौकरी, स्वास्थ्य से लेकर कई तरह की सरकारी सेवाओं और सुविधाओं की सूचना नहीं मिल पा रही है।

जमीर कहते हैं, "मुझे अजमेर जाने के लिए एक टिकट चाहिए थी, लेकिन इंटरनेट ना होने की वजह से मैंने मुंबई में रह रहे अपने दोस्त से टिकट करने को कहा। उन्होंने टिकट कराकर फिर मुझे फैक्स किया। अब मैं कहीं जा सकता हूं।"

जमीर अहमद बताते हैं, "हाल ही में आई सीटीईटी के फॉर्म को उनके सहित कई युवा भरना चाहते थे, लेकिन इंटरनेट शटडाउन के कारण नहीं भर सके। कई लोग हज के लिए जाना चाहते थे लेकिन वे फॉर्म नहीं भर पाए। इंटरनेट बंद होने से मनरेगा की पुरानी लिस्ट अपडेट नहीं हो पाई है और लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।"

जमीर ने बताया कि छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों कर रहे अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए प्रशासन ने जिलाधिकारी कार्यालय पर इंटरनेट की व्यवस्था की है लेकिन वहां पर भी कुछ वेबसाइट के अलावा अन्य वेबसाइट नहीं चलती।

आप जमीर अहमद से हमारी बातचीत को यहां सुन सकते हैं-


कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार गुलजार भट्ट कहते हैं कि मीडिया के लोगों के लिए मीडिया सेंटर बना है। वहीं पर इंटरनेट की सुविधा थोड़ी-बहुत मिल पाती है। बाकी किसी आम आदमी के लिए अभी भी इंटरनेट तक पहुंच नहीं हो पाई है।

गुलजार कहते हैं, "मीडिया सेंटर में सिर्फ 10 कम्प्यूटर हैं जबकि श्रीनगर में 200 से अधिक पत्रकार हैं। इसलिए पत्रकारों को लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसी तरह जिला मुख्यालय में भी फॉर्म भरने के लिए युवाओं की भीड़ लग जाती है। कई बार तो संभालना मुश्किल हो जाता है।" गुलजार ने बताया कि कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं की बहाली कब होगी, प्रशासन इसके बारे में कुछ नहीं बता रहा।

शुक्रवार 27 दिसंबर 2019 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित 15 शहरों में फिर से इंटरनेट बंद किया गया। यह 2019 में भारत में इंटरनेट बंदी का 105वां मामला है जो कि विश्व में सबसे अधिक है। सॉफ्टवेयर और लॉ के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (एसएलएफसी) की 'लिविंग इन डिजिटल डार्कनेस' नाम की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भी इंटरनेट सेवा बंद करने के मामले में भारत अव्वल था। तब नेटबंदी के कुल 134 मामले सामने आए थे।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने के मामले में दुनिया के दूसरे देशों से कहीं आगे हैं। अर्थव्यवस्था से संबंधित मामलों पर रिसर्च करने वाली संस्था इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक के एक रिसर्च के अनुसार लगातार हो रहे इंटरनेट शटडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2012 से लेकर 2017 तक हुए इंटरनेट शटडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 21584 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। (2018 और 2019 की रिपोर्ट अभी नहीं आई है।)

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