किसान आंदोलन: सिंघु बॉर्डर पर जिन धार्मिक गुरु ने आत्महत्या की थी, उनकी पंजाबी में लिखी चिट्ठी का मतलब पढ़िए

किसान आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले संत बाबा राम सिंह जी का एक और पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे अन्नदाताओं का कष्ट उन्हें अब देखा नहीं जा रहा है।

किसान आंदोलन: सिंघु बॉर्डर पर जिन धार्मिक गुरु ने आत्महत्या की थी, उनकी पंजाबी में लिखी चिट्ठी का मतलब पढ़िए

किसान आंदोलन के दौरान बुधवार को संत बाबा राम सिंह जी नानकसर सिंघरा वाले ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। उनके मृत्यु के बाद एक पत्र मिला था जिसमें लिखा था कि वे किसानों के प्रति हो रहे ज़ुल्म को नहीं देख सके और खुद को किसानों के लिए कुर्बान कर दिया। इस बीच संत बाबा राम सिंह जी का एक और पत्र मिला है।

पंजाबी क्षेत्रीय न्यूज चैनल पीटीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक इस 6 पन्ने की चिठ्ठी में संत बाबा राम जी सिंह जी ने गुरु नानक देव जी समेत अन्य गुरुजनों को प्रणाम करते हुए किया है।

इसके बाद उन्होंने लिखा, "दास कल (सिंघू बॉर्डर पर) किसान आंदोलन में गए थे। दास का दिल बहुत दुखी था। किसान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर रहा है, सरकार नहीं सुन रही है। वे कुछ भी नहीं मांग रहे हैं, लेकिन अपनी जमीन जो खोती हुई दिखाई दे रही है, वह जब्त ना हो, यह मांग की जा रही है। हमारी जमीन हमारे पास ही रहने दो, यही मांग है।


यह एक छोटे बच्चे से एक टुकड़ा छीनने की तरह है। बहुत दुख की बात है, मैं पूरी रात आराम नहीं कर सका। ट्रॉलियों, ट्रकों पर तिरपाल डाल कर आश्रय बनाया हुआ है। किसान का क्या हाल है?

मेरा मन और आत्मा बहुत भारी लग रहा है। आज ' शाह - मार्ग ' मेरी कौम का घर बन गया है। सभी बच्चे, बूढ़े और जवान औरतें दुखी मन से घूमती हैं।अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे अन्नदाताओं का दुःख अब देखा नहीं जाता।

आर एस एस ने सिख समुदाय और सिख समुदाय की गरिमा को नष्ट करने का फैसला कर किया है। सिख धर्म पर कई तरह से हमला करते आए हैं और कर रहे हैं, कुछ सिख उनकी पीठ बने हैं, यह शर्म की बात है। कोई कुर्सी के लिए, तो कोई धन के लालच में तो कोई मजबूरी में, आर एस एस की झोली में गिर चुके हैं। आरएसएस अजगर की तरह सिख समुदाय को लपेट रही है।


बाबा जंग सिंह जी ने अपना सीना ढाल बना लिया था ताकि निः हत्थों पर गोलियां ना चल सकें। दीन दुखियों का दुख नहीं देख सका। यह ऐसा है जैसे बंदूक की गोली नहीं बल्कि अन्याय की गोली चल रही हो।

वह गोली कई लोगों को लगती है, यह गोली सभी किसानों को लग रही है। वह गोली जिसको लगेगी वही मरेगा, अन्याय की गोली हर सदस्य और हर पीढ़ी को लगेगी, भूख की गोली, गुलामी की गोली।

अमर शहीद बाबा जंग सिंह जी की आवाज हमें कुछ बता रही है, आज मैं उस आवाज को सुन रहा हूं, वे कहते हैं कि कुछ करो, तुम क्यों बैठे हो। कई लोगों ने सम्मान को वापस कर दिया है। सिख समुदाय और पंथ पर हमले बर्दाश्त नहीं होते। और कल तो छलनी छलनी हो गया हूं।


मेरे इस दुःख को बाहर कोई नहीं देख सकता, केवल मन ही जानता है कि यह क्या है। कुछ दिनों से हम जो सुन रहा था वह बहुत दुखद था लेकिन कल जब देखा तो सहन नहीं कर सका। किसानों के प्रति अन्याय और तानाशाही को देखते रहें, यह जलालत का जीवन है। आर एस एस और बी.जे.पी. के अधिकारियों ने इंदिरा गांधी को स्वर्ण मंदिर पर हमला करने के लिए उकसाया था, उन्होंने खुद स्वीकार किया है।

इसलिए अपमान में मत जीना, अपमान में मत मरना। किसानों के साथ बहुत अन्याय हो रहा है, सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।

मैं वर्तमान मोदी सरकार का विरोध करता हूं। समय-समय पर लोग अपने तरीके से सच्चाई के लिए बलिदान करते रहे हैं, आज मैं भी बलिदान दे रहा हूं।





बाबा ईशर सिंह जी महाराज सैनिकों और किसानों की कमाई को पवित्र मानते थे और मज़दूरों से बहुत प्यार करते थे। यदि वे आज भौतिक रूप में होते, तो वे बहुत कुछ करते, जो किसान सक्षम थे। उन्होंने जुल्म की तलवार तोड़ी थी, लेकिन मैं तो उनका कूकर हूं। उनका आशीर्वाद अमर शहीद बाबा जंग सिंह पर था।

मैं सरकार के अत्याचार के खिलाफ अपने शरीर को खत्म कर रहा हूं। कोई यह ना समझे कि यह आत्महत्या है, नहीं नहीं:

गुरबानी का वचन है: "ਨਾਮ ਨਾ ਜਪਹਿ ਤੇ ਆਤਮਘਾਤੀ",

यह आत्मबलिदान है। मेरे सभी सहयोगियों ने हमेशा मुझे बहुत प्यार और सम्मान दिया है। मैंने भी उनसे प्यार किया है। सभी बिहंगमों ने मुझे हमेशा अपने सिर माथे पर रखा है। सभी संघों ने बहुत प्यार दिखाया है।

वाहे गुरु जी का खालसा

वाहे गुरु जी की फतेह!

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