झारखंड: कोरोना लॉकडाउन के दौरान भूख से जूझने वाली अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को यूनिसेफ अब बनाएगा बाल अधिकार अभियान का चेहरा

यूनिसेफ के झारखंड प्रमुख प्रशांत दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में बताया कि ये लड़कियां अभी नाबालिग हैं, ऐसे में उनके मानसिक और शारीरिक विकास से संबंधित चीजों के लिए यूनिसेफ मदद करेगा और जरूरी काउंसिलिंग मुहैया कराएगा।

Anand DuttaAnand Dutta   13 July 2020 3:31 PM GMT

झारखंड: कोरोना लॉकडाउन के दौरान भूख से जूझने वाली अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को यूनिसेफ अब बनाएगा बाल अधिकार अभियान का चेहरा

रांची: झारखंड की अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को यूनिसेफ ने बाल अधिकार अभियान का चेहरा बनाया है। झारखंड सरकार को इस संबंध में भेजे गए पत्र में यूनिसेफ ने कहा है कि इन खिलाड़ियों के कोचिंग में वह भी मदद करने जा रही है। वह इन्हें चाइल्ड राइट्स अभियान का 'चैंपियन ऑप चेंज' घोषित कर रही है।

इससे पहले लॉकडाउन के दौरान झारखंड की खिलाड़ियो की खराब आर्थिक स्थिति को लेकर गांव कनेक्शन ने स्टोरी की थी। जिसके बाद एआईएफएफ, झारखंड सरकार और फुटबॉल क्लब मिनरवा के मालिक रंजीत बजाज मदद को आगे आए थे। इसके बाद इन खिलाड़ियों के खाते में 50 हजार रुपए से अधिक रकम जमा कराए गए थे।

यूनिसेफ के झारखंड प्रमुख प्रशांत दास ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में बताया है कि झारखंड की आदिवासी लड़कियां खेल में केवल अपने बदौलत काफी आगे आती रही है। कई खेलों में नेशनल इंटरनेशनल लेवल तक का सफर तय कर रही है। ये बहुत ही उत्साह बढ़ानेवाली बात है। चूंकि ये लड़कियां अभी नाबालिग हैं, ऐसे में उनके मानसिक और शारीरिक विकास से संबंधित चीजों के लिए भी यूनिसेफ मदद करेगाऔर जरूरी काउंसिलिंग मुहैया कराएगा


अब रांची में लग सकता है विश्व कप के लिए कैंप

वहीं अगले साल फरवरी में होने वाले अंडर-17 वर्ल्ड कप की तैयारियों को देखते हुए रांची में नेशनल कैंप लग सकता है। पहले यह 20 जुलाई से गोवा में लगने जा रहा था, लेकिन अब यह कैंप झारखंड में लगेगा, ऐसी संभावनाएं जताई जा रही हैं। इस संबंध में झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन और खेल विभाग को एआईएफएफ की तरफ से पत्र भेजा गया है।

गोवा में लगने वाले कैंप के लिए झारखंड खेल विभाग ने सभी खिलाड़ियों को 15 जुलाई को रांची बुलाया था, जहां इनका कोविड टेस्ट कराया जाना था। इसके बाद 20 जुलाई को सीएम हेमंत सोरेन के साथ मुलाकात कर इन्हें गोवा रवाना होना था। फिलहाल झारखंड की सभी आठ खिलाड़ी सुमति कुमारी, पूर्णिमा कुमारी, अमीषा बाखला, अंजली मुंडा, अनीता कुमारी, नीतू लिंडा, सुनीता मुंडा और अष्टम उरांव 15 जुलाई को अपने-अपने घरों से राजधानी रांची पहुंच रही है। यहां कोविड टेस्ट के बाद अब वे रांची में ही प्रारंभिक अभ्यास शुरू करेंगी।

इस बीच 13 जुलाई को एआईएफएफ ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर बताया कि गोवा में लगने वाला कैंप रद्द किया जा रहा है। अगला कार्यक्रम निर्धारित कर सूचित किया जाएगा।

इस पूरे मामले में झारखंड सीएम हाउस के सूत्र ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफ्फुल पटेल से लंबी बातचीत की है। फेडरेशन के अधिकारी भी लगातार संपर्क में हैं। एक टीम जल्द ही रांची पहुंच रही है, जो हमारी ओर से की जा रही तैयारियों का जायजा लेगी। अधिक संभावना है कि 15 अगस्त के आपसास का शेड्यूल तय हो।

उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के साथ पूरे 46 लोगों का दल अगले साल फरवरी तक यहां रहेंगे। उन्हें तय मानक के अनुसार हर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इस कैंप के लिए झारखंड सरकार ने लगभग एक करोड़ रुपए का बजट प्लान किया है। सीएम खुद पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।


सीनियर खिलाड़ियों ने कहा- इससे बेहतर कुछ भी नहीं

झारखंड के गुमला जिले की रहनेवाली भारतीय फुटबॉल टीम की पूर्व खिलाड़ी और साल 2014 में एशियाड खेल चुकी गोलकीपर पुष्पा तिर्की कहती हैं कि यह महिला फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए बहुत अच्छी बात है। अगर कैंप झारखंड में लगता है तो झारखंड फुटबॉल के लिए इससे अच्छी बात और कुछ नहीं हो सकती है। हमारे समय में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। हम तो इससे बारे में सोच भी नहीं सकते थे। ज्यादा से ज्यादा पांच दिन का कैंप लगता था।

पुष्पा ने यह भी कहा कि अगर झारखंड सरकार और फेडरेशन की अनुमति हो तो वह अपने अनुभवों का लाभ इन संभावित खिलाड़ियों को जरूर देना चाहेंगी।

वहीं वर्तमान अंडर-18 महिला फुटबॉल टीम की प्रमुख खिलाड़ी और सैफ गेम में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी आशा कुमारी कहती हैं एक खिलाड़ी और झारखंड का होने के नाते मेरे लिए तो यह गर्व की बात है। इससे राज्य में फुटबॉल के लिए बेहतर माहौल बनेगा। ऐसा पहले नहीं हुआ था। हमारे लिए राज्य स्तरीय कैंप भी बहुत कम लगाए जाते रहे हैं। अंडर-17 के सहायक कोच एंब्रोज ने मुझे भी सिखाया है। वह बेहतरीन कोच में से एक हैं। मुझे उम्मीद है कि टीम प्रैक्टिस के दौरान मुझे भी इन खिलाड़ियों के साथ अभ्यास मैच खेलने का मौका मिलेगा।

अंडर-17 महिला फुटबॉल विश्व कप अगले साल भारत में होने जा रहा है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन गोवा में कैंप लगाकर इसकी तैयारी भी जोर-शोर से कर रहा था। इस बीच कोविड-19 की वजह से तैयारियों पर एक ब्रेक लगा। इन गतिविधियों के मद्देनजर कहा जा सकता है कि तैयारियों का सिलसिला एक बार फिर रफ्तार पकड़ने जा रही है।

वहीं इस फुटबॉल टीम की एक महत्वपर्ण खिलाड़ी साई सांखे ने दसवीं (आईसीएसई बोर्ड) के परीक्षा में सफलता हासिल की है। उसने कुल 96.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। एआईएफएफ की वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक खेल और पढ़ाई दोनों ही महत्वपूर्ण है। खिलाड़ी अगर बैलेंस बनाकर प्लान करें तो दोनों ही क्षेत्र में बेहतर कर सकती हैं।

(लेखक झारखंड से स्वतंत्र पत्रकार हैं)

अंडर-17 फुटबॉलः विश्वकप खेलने की दावेदारों को लॉकडाउन में पड़े खाने के लाले

अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे आए सरकार, फेडरेशन और क्लब


Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.