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क्या है SSC का UFM नियम, जिससे हो रहा तैयारी करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़?

स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी) की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए सिरदर्द बना उसका यूएफएम नियम, ट्वीटर पर चला रहें #SSC_IMAGINARY_UFM और #SSC_UNFAIR_UFM ट्रेंड.

Daya SagarDaya Sagar   11 April 2020 9:16 AM GMT

What is SSC UFM rule which is ruining the future for its lakhs of candidates CHSL 2018 CGL 2018परीक्षाओं में धांधली को लेकर एसएससी के खिलाफ पहले भी होते रहे हैं प्रदर्शन (फाईल फोटो)

"शेष मिलने पर, माता-पिता को प्रणाम तथा छोटी को स्नेह देना !"

बिहार के बेगुसराय के प्रिंस कुमार (24 वर्ष) जब एसएससी सीएचएसएल-2018 की टियर टू की परीक्षा में 'छोटे भाई को पत्र लिखें' वाले प्रश्न के आखिरी में यह लिखकर आए थे, तो उन्हें लगा था कि उनकी सरकारी नौकरी का सपना लगभग पूरा हो गया। उनको यह आत्मविश्वास इसलिए था क्योंकि इस परीक्षा के प्रथम चरण ( टियर वन) में सफल होने के बाद उनके दूसरे चरण (टियर टू) के भी पेपर काफी अच्छे हुए थे और इसके बाद उन्हें बस टाइपिंग टेस्ट पास करना था।

लेकिन जब 25 फरवरी, 2019 को इस परीक्षा का परिणाम आया तो प्रिंस को शून्य अंक मिले थे और परीक्षा में गलत चीजों के उपयोग (Unfair Means- UFM) का दोषी बताकर उन्हें परीक्षा प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इस तरह से प्रिंस के लगभग तीन साल की मेहनत एक झटके में टूट गई।

ऐसा सिर्फ प्रिंस ही नहीं इस परीक्षा को देने वाले 30 हजार छात्रों में से लगभग 10 फीसदी यानी 3000 छात्रों के साथ हुआ। छात्रों को नहीं पता कि उन्हें किस गलती की वजह से शून्य नंबर या यूएफएम मिला है। इसके लिए ये छात्र आरटीआई लगाकर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की मांग कर रहे हैं और एसएससी पोर्टल पर अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।

कोई भी छात्र अपनी व्यक्तिगत पहचान और अन्य जानकारी ना जाहिर कर सके, इसके लिए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने यूएफएम (Unfair Means-UFM) नाम से एक नियम बनाया है। इस नियम के अनुसार कोई भी छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका में व्यक्ति या जगह का नाम, रोल नंबर, मोबाइल नंबर, पता आदि का प्रयोग नहीं कर सकता है। एसएससी ऐसा करने वाले छात्रों को शून्य अंक देती है और उन्हें यूएफएम के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।

प्रिंस ने जब आरटीआई लगाकर अपनी उत्तर पुस्तिका मंगवाई तो उन्होंने पाया कि उत्तर पुस्तिका में 'छोटी' लिखने की वजह से उन्हें परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। खुद प्रिंस के शब्दों में, "मुझे उस 'छोटी' सी गलती की सजा मिली, जो पिछले वर्षों के टॉपर्स लगातार करते आए हैं।"

आरटीआई द्वारा मिली प्रिंस की कॉपी, जहां लेटर राइटिंग में उन्हें पहले 40 नंबर मिला है लेकिन बाद में उत्तर पुस्तिका के पहले पेज पर उन पर यूएफएम लगाकर मिले अंक को जीरो कर दिया गया है।

कुछ छात्रों ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (Central Administrative tribunal-CAT) में जाकर इस मामले में एसएससी के खिलाफ केस भी दर्ज करवाई है। वहीं एसएससी सीजीएल 2018 टियर थ्री की परीक्षा देने वाले 30 हजार से अधिक छात्रों और एसएससी एमटीएस 2018 की परीक्षा दिए एक लाख से भी अधिक छात्रों को भी एसएससी के इन अस्पष्ट नियमों के तहत यूएफएम होने का डर सता रहा है, जिसका रिजल्ट आना अभी बाकी है।

एसएससी का यूएफएम नियम पिछले कई वर्षों से उनकी कई परीक्षाओं मसलन सीजीएल, सीएचएसएल और एमटीएस में लागू होता आ रहा है। तो सवाल यह उठता है कि इस बार के छात्र इस नियम का विरोध क्यों कर रहे हैं?

एसएससी सीएचएसएल 2018 के लिए यूएफएम निर्देश, जो एसएससी ने परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी करते वक्त और फिर अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र पर दिए थे।

इसका जवाब हमें एसएससी के ही अभ्यर्थी मितुल पालीवाल देते हैं। राजस्थान के उदयपुर के मितुल भी पिछले ढाई साल से एसएससी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि पिछले साल तक एसएससी सिर्फ उन्हीं लोगों को यूएफएम देता था जिन्होंने वास्तव में अपनी पहचान बताने की कोशिश कॉपी में की होती थी। लेकिन इस बार ऐसे कई लोगों को यूएफएम दे दिया गया है, जिन्होंने लेटर फॉर्मेट (पत्र प्रारूप) को पूरा करने के लिए कोई आभासी (डमी) पता, नाम या नंबर उत्तर में लिखा है।

"हमने वही किया जो पिछले साल के रैंकर्स और टॉपर्स करते आए हैं और जो एनसीईआरटी की किताबों में लेटर राइटिंग के फॉर्मेट में पढ़ाया गया है। कोई भी पता तब तक पूरा नहीं होता, जब तक उस पर मकान नम्बर, मुहल्ला या पिनकोड ना हो। उम्मीदवार पहले भी अपने सुविधानुसार काल्पनिक नामों और पते (जैसे-123, क ख ग और XYZ) या कोई आम (Generic) नाम, पता, पिन कोड डालकर लेटर के दिए गए फॉर्मेट को पूरा करते थे, ताकि पूरा नंबर मिल सके। इस बार भी हमने ऐसा ही किया, लेकिन इस बार हमें नंबर की जगह यूएफएम मिला," मितुल की बातों में निराशा झलकती है।

किताबों में लेटर राइटिंग को लेकर दिए गए निर्देश

मितुल ने गांव कनेक्शन को की आरटीआई से मिले कई ऐसे पुराने उत्तर पुस्तिकाओं और इस बार की उत्तर पुस्तिकाओं को गांव कनेक्शन से साझा भी किया, जिसमें काफी समानताएं थीं। लेकिन जहां पिछली बार के उम्मीदवारों को अच्छे नंबर मिले, वहीं इस बार के उम्मीदवारों को शून्य अंकों के साथ अयोग्य ही घोषित कर दिया गया।

अपनी उत्तर पुस्तिका में 'छोटी' लिखने के सवाल पर प्रिंस कुमार बताते हैं, "छोटी लिखने से मेरा मतलब छोटी बहन से था, यह पत्र में भी साफ-साफ पता चल रहा है। आप जब भी अपने घर वालों या रिश्तेदारों को इनफॉर्मल (अनौपचारिक) पत्र लिखते हो तो उसके अंत में 'बड़ों को प्रणाम और छोटों को प्यार' लिखते हैं। यही बचपन से ही हमें पढ़ाया गया है और पुराने रैंकर्स भी ऐसा लिखकर अच्छा नंबर लेते आए हैं। चूंकि मुझे अपने छोटे भाई को पत्र लिखना था इसलिए 'मैंने माता-पिता को प्रणाम तथा छोटी को स्नेह देना!' लिखा था।"

प्रिंस जब अपनी इस शिकायत को लेकर लोधी रोड, नई दिल्ली स्थित एसएससी मुख्यालय गए, तो पहले तो अधिकारियों ने उनकी कुछ भी सुनने से मना कर दिया। लेकिन बाद में एक अधिकारी ने उन्हें बताया कि छोटी' लिखने के कारण इसलिए यूएफएम मिला क्योंकि 'छोटी' से किसी के नाम का बोध हो रहा है। "अगर आप पेपर में 'छोटी' की जगह 'छोटी बहन' पूरा लिखते तो आपका यूएफएम नहीं होता," एसएससी के अधिकारी ने प्रिंस को बताया।

इसके जवाब में प्रिंस कहते हैं, "लेटर राइटिंग में एक निश्चित शब्द सीमा होती है, जिसके अंदर ही उम्मीदवार को पत्र लिखना होता है। अगर मैं 'छोटी' को 'छोटी बहन' लिखता तो एक शब्द और बढ़ जाता और पत्र के मुख्य विषय को लिखने में कमी होती। इसके अलावा अपने छोटे भाई को लिखे एक इनफॉर्मल लेटर में भी मुझे अपनी छोटी बहन को 'बहन' लिखना पड़े, तो यह थोड़ा सा अजीब है ना?"

"एसएससी ने यूएफएम नियम इसलिए बनाया है ताकि कोई उम्मीदवार अपना व्यक्तिगत पहचान पेपर में ना जाहिर कर सके। आप ही बताइए 'छोटी' से मेरी कोई व्यक्तिगत पहचान जाहिर हो रही है क्या?", प्रिंस के इस सवाल में नाउम्मीदी का पुट भी होता हैं।

प्रिंस ने गांव कनेक्शन से कुछ ऐसे कॉपी साझा किए जिसमें उम्मीदवारों को छोटा, छोटी या अनुज लिखने पर यूएफएम नहीं मिला है, बल्कि अच्छे नंबर मिले हैं। "अगर 'छोटी' से किसी के नाम का बोध होता है, तो 'अनुज' भी तो एक नाम है। इसका साफ मतलब है कि एसएससी ने रैंडमली किसी को भी यूएफएम दिया है तो किसी को अच्छे नंबर दे दिए है। यह पूरी तरह से धांधली और हमारे जैसे लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो पिछले तीन साल से बिहार से आकर दिल्ली जैसे महंगे शहर में तैयारी कर रहे हैं।"

एक अभ्यर्थी जिसने छोटे भाई की जगह 'अनुज' लिखा, जो कि 'छोटी' की तरह कोई नाम भी हो सकता है। लेकिन उसे यूएफएम नहीं मिला। इस अभ्यर्थी की निजता का ध्यान रखते हुए उनका नाम प्रकट नहीं किया जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि छात्रोंं को सिर्फ कोई आभासी नाम या पदनाम लिखने की वजह से यूएफएम मिला है। कई ऐसे छात्र हैं जिन्होंने पत्र में दिए गए पते को पूरा करने के लिए कुछ आभासी नंबर 123 या काल्पनिक पता XYZ डाल दिए, उन्हें भी यूएफएम के तहत अयोग्य घोषित किया गया है, जबकि पिछली परीक्षाओं में ऐसा लिखने पर छात्रों को पूरे नंबर मिले थे।

ऐसे ही एक छात्र अभिषेक त्यागी हैं, जिन्हें दिए गए पता को पूरा करने के लिए आभासी नंबर (C-22) लिखने के लिए यूएफएम मिला है। वहीं दिल्ली के अभिजीत चौहान को भी यूएफएम मिला है, जो पिछले तीन साल से एसएससी की परीक्षा दे रहे हैं और हाल ही में उनका चयन एसएससी सीएचएसएल 2017 में हुआ है। अभिजीत चौहान कहते हैं कि यह एसएससी का विरोधाभास है कि एक ही उम्मीदवार को वह वही चीज लिखने पर एक साल में पास कर नौकरी देता है तो दूसरे साल यूएफएम लगाकर अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।

एक अभ्यर्थी की कॉपी, जिसे अपने पते को पूरा करने के लिए एक आभासी संख्या (150) जोड़ने की वजह से यूएफएम कर दिया गया।

कुछ छात्रों ने ध्यान दिलाया कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि एसएससी ने इस बार के प्रश्न पत्र के निर्देश में यूएफएम वाले कॉलम में व्यक्तिगत जानकारी जाहिर करने वाले किसी भी वास्तविक या काल्पनिक नाम, स्थान या नंबर को भी कॉपी में नहीं लिखने का निर्देश दिया था।

इस पर छात्रों का कहना है कि एसएससी ने परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया था कि उम्मीदवार अब पत्रों में काल्पनिक नाम और नंबर भी नहीं जोड़ सकते और ना ही परीक्षा के तीन दिन पहले जारी हुए प्रवेश पत्र में ऐसा कुछ लिखा था।

अभिषेक त्यागी कहते हैं, "हमें तो परीक्षा के 5 मिनट पहले ये नियम पता चला जब हमारे हाथ में पेपर और कॉपी आई। कई छात्रों का तो इस पर ध्यान भी नहीं गया। पेपर के एक कोने में पिछले सालों के सामान्य निर्देशों के साथ वास्तविक और काल्पनिक शब्द जोड़े गए थे। वहां पर भी उसे बोल्ड करके नहीं दिखाया गया था, इसलिए अभ्यर्थी कुछ समझ ही नहीं पाएं। अगर एसएससी को ऐसा करना था तो वह अपने वेबसाइट पर परीक्षा के नोटिफिकेशन के साथ ही ऐसे नए नियमों को स्पष्ट करती और हमें एक डमी लेटर भी दिखाती कि बिना आभासी नाम, नंबर या पता जोड़े कोई पत्र कैसे लिखा जा सकता है।"

सीएचएसएल 2018 के प्रश्न पत्र में दिया गया निर्देश, जो कि नोटिफिकेशन जारी करते वक्त नहीं था


एसएससी के ऐसे ही एक पुराने सफल अभ्यर्थी, जो अभी सरकारी नौकरी में हैं, ने नाम ना छापने की शर्त पर गांव कनेक्शन को बताया कि 2017 में जब नॉर्मलाइजेशन को लेकर कई छात्र एसएससी से परीक्षा प्रक्रिया के बीच में कुछ नियमों को बदलने की मांग कर रहे थे, तब केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने कहा थी कि खेल के बीच में खेल के नियम नहीं बदले जा सकते। तो अब एसएससी नोटिफिकेशन और प्रवेश पत्र जारी करने के बाद यह नियम कैसे बदल सकती है?

कैट द्वारा एसएससी को दिया गया निर्देश

उन्होंने यह भी बताया कि ऐसा 2016 में भी हुआ था जब कई अभ्यर्थियों को उत्तर-पुस्तिका में हिंदी या अंग्रेजी माध्यम नहीं लिखने के कारण शून्य अंक मिले थे। तब भी कैट और सुप्रीम कोर्ट ने एसएससी को निर्देश दिया था कि ऐसे छोटी भूलों पर किसी भी उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द नहीं की जा सकती। "लेकिन यह एसएससी कहां मानने वाली है, उनके लिए यह परीक्षा एक खेल है और एसएससी परीक्षार्थियों के जिंदगी के साथ खेल करता रहा है," 2017 के पेपर लीक की घटना को याद करते हुए वह कहते हैं।

शून्य अंक देने के संदर्भ में एसएससी को CAT का 2016 का आदेश

इस संबंध में हमने एसएससी के चेयरमैन ब्रजराज शर्मा जी से बात की। उन्होंने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया कि उन्हें कई अभ्यर्थियों की इस मामले में शिकायतें मिली हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से कार्यालय बंद होने के कारण इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। "लॉकडाउन खुलने के बाद हम निश्चित रूप से इन शिकायतों की जांच करेंगे और नियमों के अनुसार जो भी हो सके, उचित कार्रवाई की जाएगी।" इसके बाद उन्होंने किसी भी सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जाए।

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