जनहित याचिका: बढ़ रही कोरोना महामारी, फिर भी गुटखा और पान मसाले की बिक्री पर क्यों नहीं है प्रतिबंध?

पान-मसाला बनाने वाली कंपनी रजनीगंधा का अजीबो-गरीब बयान- 'कोरोना की हमें भी फिक्र, हमने पीएम केयर्स फंड में दस करोड़ रूपये दिए हैं।'

Daya SagarDaya Sagar   19 Jun 2020 10:30 AM GMT

"रजनीगंधा को भी कोरोना महामारी से उपजे देश की गंभीर स्थिति के बारे में पता है। इसलिए रजनीगंधा ने 10 करोड़ रूपये पीएम केयर्स फंड में दिए हैं। इसके अलावा उसने लगभग 10 करोड़ रूपये इस महामारी से लड़ रहे अन्य संगठनों के सहयोग के लिए भी दिए हैं।"

कोरोना काल के समय पान-मसाला पर प्रतिबंध लगाने संबंधी जनहित याचिका पर पान-मसाला बनाने वाली कंपनी रजनीगंधा ने एक हलफनामा उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिया है। ऊपर लिखे हुए वाक्य उसी हलफनामे का हिस्सा हैं, जिसके आधार पर रजनीगंधा ने पान-मसाले की बिक्री पर प्रतिबंध ना लगाने की बात कही है।

एक तरफ कोरोना महामारी का प्रकोप लगातार देश में फैलता जा रहा है, दूसरी तरफ देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारों ने पान मसालों की बिक्री से प्रतिबंध हटा दिए हैं। 18 जून को झारखंड सरकार ने पान-मसाले की बिक्री पर प्रतिबंध हटा लिया। इससे पहले राजस्थान सरकार ने 26 मई को और उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 मई को इसकी बिक्री से प्रतिबंध हटाए थे। अन्य कई राज्य भी इसकी बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटा चुके हैं या धीरे-धीरे करके हटा रहे हैं।

रजनीगंधा कंपनी द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट में दिए गए हलफनामे का हिस्सा

ऐसे समय में जब यह बीमारी भारत में लगातार तेजी से बढ़ रही है और रोज नए-नए रिकॉर्ड बना रही है, पान-मसालों की बिक्री पर हटाए जा रहे प्रतिबंध पर सवाल उठ रहे हैं। यह एक ज्ञात तथ्य है कि कोरोना महामारी ड्रॉपलेट्स, थूक और सलाईवा से फैलती है। हालांकि सार्वजनिक स्थानों पर इसके उपयोग पर अभी भी प्रतिबंध बरकरार है और कोई भी पान-मसाला या गुटखा खाकर कहीं भी थूक नहीं सकता।

लेकिन इस विषय में जानकार लोगों का कहना है कि अगर पान-मसाले की बिक्री होगी तो आदमी उसे चबाने के बाद कहीं थूकेगा ही, जिससे कोरोना बीमारी के फैलने का खतरा और भी बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार और 4 पीएम अख़बार के संपादक संजय शर्मा ने पान-मसाले की बिक्री के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है। इस याचिका में उन्होंने तमाम तथ्यों के आधार पर कोरोना काल में पान-मसाले की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

इस पीआईएल के जवाब में पान-मसाला बनाने वाली कंपनी रजनीगंधा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें उसने पान-मसाला को तंबाकू रहित और माउथ फ्रेशनर बताते हुए इसकी बिक्री को जारी रखने का अनुरोध हाईकोर्ट से किया है। इसके अलावा रजनीगंधा ने इस बात का भी जिक्र किया कि उसे भी इस महामारी की गंभीरता के बारे में भान है, इसलिए उसने कोरोना से लड़ने के लिए 10 करोड़ रूपये पीएम केयर्स फंड में जमा किए हैं। इसके अलावा वह कोरोना से लड़ रहे कोरोना योद्धाओं पर भी लगभग 10 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है।

पीआईएल दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा रजनीगंधा के इस हलफनामे पर कहते हैं कि रजनीगंधा के हलफनामें में ये सारे बिन्दु हास्यास्पद और विरोधाभासी हैं। "अगर आप पीएम केयर्स फंड में पैसा देते हैं इसका मतलब यह नहीं होता कि आपको किसी का जान लेने का अधिकार प्राप्त हो गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित देश का स्वास्थ्य मंत्रालय भी मान चुका है कि कोरोना काल में पान मसाला, गुटखा आदि थूकने वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग बहुत खतरनाक साबित हो सकता है, फिर भी राज्य सरकारों द्वारा इसकी बिक्री से प्रतिबंध हटाए जाना एकदम समझ से परे है," संजय शर्मा कहते हैं।

डब्ल्यूएचओ द्वारा दी गई गाइडलाइन और उत्तर प्रदेश सरकार का पूर्व का आदेश

दरअसल कोरोना महामारी के प्रसार के बीच भारत सरकार ने 24 मार्च 2020 को देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की। उसके बाद 25 मार्च 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में लगे प्रतिबंधों की विस्तृत गाइडलाइन की घोषणा की। इस गाइडलाइन के अनुसार, "कोविड 19 महामारी का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, जिसके रोकथाम के लिए पूरे प्रदेश में दिनांक 25 मार्च 2020 से लॉकडाउन की घोषणा की जाती है। इस दौरान प्रदेश में पान मसाला का उपयोग करने और पान मसाला खा कर थूकने पर प्रतिबंध रहेगा, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने की संभावना बहुत अधिक है। इसलिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 30(2)(क) में दिए गए शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार जनस्वास्थ्य के दृष्टिगत पान मसाला के विनिर्माण, वितरण एवं विक्रय पर अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से प्रतिबन्ध लगाती है।"

हालांकि इस दौरान भी देश और प्रदेश में कई-जगहों से छिपे-चोरी और अवैध रूप से पान-मसाले की बिक्री और उपयोग की खबर आती रही। लेकिन व्यापक रूप में यह प्रतिबंध प्रभावी रहा और लॉकडाउन के दौरान कई जगहों से लोगों की गुटखे की आदत छूटने की भी खबर आईं। लेकिन लॉकडाउन-3 आते-आते कई उद्योगों को गति देने के लिए उन पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए गए। इसी के तहत पान मसाले की बिक्री से भी लगा प्रतिबंध हटा दिया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के फूड सेफ्टी और ड्रग विभाग के कमिश्नर ने 6 मई, 2020 को यह प्रतिबंध हटाए जाने का आदेश दिया। इस आदेश के अनुसार, ''खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 30(2)(क) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कार्यालय आदेश संख्या दिनांक 25 मार्च 2020 द्वारा प्रदेश में जनस्वास्थ्य के दृष्टिगत पान मसाला के विनिर्माण, वितरण एवं विक्रय पर लगाए गए प्रतिबन्ध को तत्काल प्रभाव से समाप्त करती है।"



संजय शर्मा बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने 7 मई, 2020 को ही इस आदेश के खिलाफ कमिश्नर, फूड सेफ्टी और ड्रग विभाग, उत्तर प्रदेश को एक विस्तृत पत्र ई-मेल के द्वारा भेजा। लेकिन उनके इस पत्र को फूड सेफ्टी और ड्रग विभाग द्वारा 15 मई, 2020 को नकार दिया गया। इसके बाद उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। फिलहाल इस मामले में 17 जून को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अगली तारीख 8 जुलाई को तय कर दी है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा हुई इस सुनवाई में 17 जून को सरकार और रजनीगंधा की तरफ से कोई वकील नहीं पेश हुआ। इसके बाद अगली सुनवाई 8 जुलाई के लिए निश्चित की गई। इस दौरान हाईकोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। गांव कनेक्शन से फोन से बातचीत में संजय शर्मा कहते हैं कि प्रदेश सरकार और रजनीगंधा ने ऐसा जान-बूझकर किया ताकि मामले को अधिक से अधिक दिनों तक टाला जा सके। उन्होंने बताया कि इसके पहले हुई 12 जून को पिछली सुनवाई में प्रदेश सरकार की तरफ से महाधिवक्ता और रजनीगंधा की तरफ से एक वरिष्ठ वकील पेश हुए थे और उन्होंने कोरोना महामारी को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई की अपील उच्च न्यायालय में की थी।

संजय शर्मा कहते हैं, "यह सब बहुत खतरनाक है। एक तरफ देश और प्रदेश में कोरोना महामारी तेजी से फैल रही है, रोज 10 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं और रोज मरने वालों की संख्या भी हजार में पहुंच गई है, दूसरी तरफ पान-मसाला कंपनियां पीएम केयर फंड में पैसा देने का हवाला देकर जहर बेचने का लाइसेंस लेने में लगी हुई हैं।"

संजय शर्मा की जनहित याचिका


उन्होंने प्रदेश सरकार के नीयत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं ना कहीं प्रदेश सरकार का इन पूंजीपतियों से सांठ-गांठ है, तभी मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। वहीं रजनीगंधा का कहना है कि वे लोग सिर्फ पान-मसाला बनाते और बेचते हैं, जो कि एक तरह से माउथ फ्रेशनर है। इसमें तंबाकू नहीं होता। वहीं प्रदेश सरकार का कहना है कि इस व्यवसाय से हजारों मजदूर जुड़े हुए हैं इसलिए इसको लंबे समय तक बंद नहीं रखा जा सकता।

संजय शर्मा कहते हैं कि दोनों के दोनों दलील महज बहाने हैं। "लॉकडाउन के लगभग तीन महीने होने के बाद भी अब भी कई ऐसे व्यवसाय हैं, जो कि पूरी तरह से बंद हैं क्योंकि उससे संक्रमण फैलने का खतरा है। सिनेमा हाल पूरी तरह से बंद है, मॉल अभी कुछ समय पहले खोले गए हैं। ऐसे कई सारे उद्योग और व्यवसाय हैं जो कि अभी तक बंद है क्योंकि यह महामारी की असाधारण और अभूतपूर्व परिस्थिति है।"

"दूसरी तरफ माउथ फ्रेशनर वाला जवाब भी बचकाना है क्योंकि अगर मान भी लिया जाए कि यह माउथ फ्रेशनर है फिर भी इसे खाने के बाद थूका ही जाएगा और डब्ल्यूएचओ सहित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह तक बोल चुके हैं कि यह बीमारी थूकने से फैलता है और इस संबंध में तंबाकू बिक्री पर राज्य सरकारों को उचित कदम उठाने चाहिए। हम तो बस इस महामारी के समय इसकी बिक्री और प्रतिबंध की बात कर रहे हैं ताकि इसका सेवन करने वाले लाखों मजदूरों और गरीब लोगों और उनके परिजनों को इस महामारी की कोप से बचाया जा सके," संजय शर्मा अपनी बातों को समाप्त करते हैं।

रजनीगंधा का माउथ फ्रेशनर संबंधी हलफनामे में दिया गया बयान

इस संबंध में हमने फूड सेफ्टी विभाग, उत्तर प्रदेश की कमिश्नर अनीता सिंह से बात की तो उन्होंने महामारी के बीच पान-गुटखा पर पहले प्रतिबंध लगाने और फिर हटाने के पीछे के कारणों के बारे में कोई भी सूचना देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि हम अगली सुनवाई में सरकार और विभाग का पक्ष एक हलफनामा दायर कर हाई कोर्ट में रखेंगे, इसके पहले हम इस पर मीडिया में कुछ भी नहीं बोल सकते।

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