उत्तर प्रदेश में गन्ना बीज पंजीकरण अनिवार्य: किसानों के लिए नई व्यवस्था लागू
Gaon Connection | Jan 08, 2026, 15:53 IST
उत्तर प्रदेश में अब गन्ना बीज की बिक्री के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा, जो 7 जनवरी 2026 से लागू होगा। यह कदम किसानों को बेहतरीन गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है। नियम का उल्लंघन करने पर दंड या सजा हो सकती है। केवल मान्यता प्राप्त किस्में ही बाजार में बिकेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बीज गन्ना कारोबार में बड़ा कदम उठाते हुए सभी गन्ना बीज उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। यह व्यवस्था 07 जनवरी 2026 से लागू हो गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाला और भरोसेमंद बीज उपलब्ध कराना है, साथ ही फर्जी बीज बेचने वालों पर अंकुश लगाना है। अपर मुख्य सचिव (चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास) श्रीमती वीना कुमारी के निर्देश पर, उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने यह सख्त नियम जारी किए हैं।
क्या-क्या नियम बनाए गए हैं?
अब गन्ना बीज का व्यापार करने वाले हर किसान को बीज अधिनियम 1966 का पालन करना होगा। नियम तोड़ने पर ₹1000 का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल हो सकती है। पंजीकृत किसान केवल वही गन्ना किस्म उगा और बेच सकेंगे जो सरकार द्वारा स्वीकृत हैं। गन्ना बीज बेचने से पहले उसका प्रमाणीकरण संबंधित वरिष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से कराना अनिवार्य होगा। दूसरे राज्यों या विदेश से बीज लाकर उसका उत्पादन और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, ऐसे मामलों में क्वारंटाइन नियम लागू होंगे।
कीमत भी सरकार तय करेगी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गन्ना बीज या सीडलिंग को बेचना केवल सरकार द्वारा तय दरों पर ही किया जाएगा। यदि कोई किसान तय दाम से ज्यादा कीमत वसूलता पाया गया, तो उसका पंजीकरण सीधे निरस्त कर दिया जाएगा। पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए किसानों को निर्धारित फॉर्म, स्वघोषणा पत्र, शपथ-पत्र और भूमि से जुड़े दस्तावेज अपने गन्ना विकास परिषद में जमा करने होंगे। इसके बाद उप गन्ना आयुक्त की अनुमति से गन्ना आयुक्त स्तर पर रजिस्ट्रेशन होगा।
जांच में कई फर्जी किसान पकड़े गए
इस नई व्यवस्था के तहत, अब तक पंजीकृत 2823 गन्ना बीज उत्पादकों में से जांच के बाद केवल 593 किसान ही सही पाए गए हैं। बाकी 2230 फर्जी गन्ना बीज उत्पादकों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। यह कदम गन्ने की किस्मों की शुद्धता बनाए रखने, रोग-कीट नियंत्रण और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
किसानों को अपने आवेदन में अपनी कुल खेती योग्य जमीन, गन्ना का रकबा, बीज के रूप में उगाई जा रही गन्ना किस्म, तैयार होने वाली सीडलिंग की मात्रा और बीज के स्रोत जैसी पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही, उन्हें एक स्वघोषणा पत्र भी देना होगा कि किसी शिकायत की स्थिति में विभाग उनके खिलाफ बीज अधिनियम 1966 और अन्य नियमों के तहत कार्रवाई कर सकता है।
खेत में लगाना होगा साइन बोर्ड
इसके अलावा, गन्ना बीज उत्पादक किसानों को अपने खेत में 4×2 फीट का एक साइन बोर्ड लगाना होगा, जिस पर गन्ना किस्म, बुवाई की तारीख और बीज का स्रोत स्पष्ट रूप से लिखा होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को सही जानकारी मिल सकेगी। कुल मिलाकर, यह फैसला गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इससे उन्हें सही बीज मिलेगा, फर्जीवाड़ा रुकेगा और प्रदेश में गन्ना उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
क्या-क्या नियम बनाए गए हैं?
अब गन्ना बीज का व्यापार करने वाले हर किसान को बीज अधिनियम 1966 का पालन करना होगा। नियम तोड़ने पर ₹1000 का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल हो सकती है। पंजीकृत किसान केवल वही गन्ना किस्म उगा और बेच सकेंगे जो सरकार द्वारा स्वीकृत हैं। गन्ना बीज बेचने से पहले उसका प्रमाणीकरण संबंधित वरिष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से कराना अनिवार्य होगा। दूसरे राज्यों या विदेश से बीज लाकर उसका उत्पादन और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, ऐसे मामलों में क्वारंटाइन नियम लागू होंगे।
कीमत भी सरकार तय करेगी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गन्ना बीज या सीडलिंग को बेचना केवल सरकार द्वारा तय दरों पर ही किया जाएगा। यदि कोई किसान तय दाम से ज्यादा कीमत वसूलता पाया गया, तो उसका पंजीकरण सीधे निरस्त कर दिया जाएगा। पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए किसानों को निर्धारित फॉर्म, स्वघोषणा पत्र, शपथ-पत्र और भूमि से जुड़े दस्तावेज अपने गन्ना विकास परिषद में जमा करने होंगे। इसके बाद उप गन्ना आयुक्त की अनुमति से गन्ना आयुक्त स्तर पर रजिस्ट्रेशन होगा।
जांच में कई फर्जी किसान पकड़े गए
इस नई व्यवस्था के तहत, अब तक पंजीकृत 2823 गन्ना बीज उत्पादकों में से जांच के बाद केवल 593 किसान ही सही पाए गए हैं। बाकी 2230 फर्जी गन्ना बीज उत्पादकों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। यह कदम गन्ने की किस्मों की शुद्धता बनाए रखने, रोग-कीट नियंत्रण और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
किसानों को अपने आवेदन में अपनी कुल खेती योग्य जमीन, गन्ना का रकबा, बीज के रूप में उगाई जा रही गन्ना किस्म, तैयार होने वाली सीडलिंग की मात्रा और बीज के स्रोत जैसी पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही, उन्हें एक स्वघोषणा पत्र भी देना होगा कि किसी शिकायत की स्थिति में विभाग उनके खिलाफ बीज अधिनियम 1966 और अन्य नियमों के तहत कार्रवाई कर सकता है।
खेत में लगाना होगा साइन बोर्ड
इसके अलावा, गन्ना बीज उत्पादक किसानों को अपने खेत में 4×2 फीट का एक साइन बोर्ड लगाना होगा, जिस पर गन्ना किस्म, बुवाई की तारीख और बीज का स्रोत स्पष्ट रूप से लिखा होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को सही जानकारी मिल सकेगी। कुल मिलाकर, यह फैसला गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इससे उन्हें सही बीज मिलेगा, फर्जीवाड़ा रुकेगा और प्रदेश में गन्ना उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा।