दीमक से फसल को कैसे बचाएं? छोटी लापरवाही से हो सकता है बड़ा नुकसान, जानिए बचाव के असरदार तरीके
Preeti Nahar | May 10, 2026, 13:03 IST
खेतों में दीमक फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती है। गर्मी और सूखे में इसका प्रकोप बढ़ता है। समय पर नियंत्रण न होने पर उत्पादन घटता है। गहरी जुताई, उचित नमी, सड़ी गोबर खाद, फसल अवशेष हटाना, नीम खली और जैविक उपाय दीमक से बचाव में सहायक हैं। जरूरत पड़ने पर रासायनिक दवाओं का प्रयोग भी किया जा सकता है।
फसलों को दीमक के बचाने के उपाए
How to Save Crops from Termites: दीमक एक छोटा कीट है, लेकिन यह किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। यह फसलों की जड़ों, तनों और खेत में बचे अवशेषों को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन घटा देता है। खासतौर पर गर्मी और सूखे मौसम में दीमक का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए तो फसल की वृद्धि रुक सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे में दीमक से बचाव के लिए सही कृषि प्रबंधन बेहद जरूरी है।
खेत में अत्यधिक सूखापन होने पर दीमक तेजी से फैलती है। इसके अलावा अधपकी या कच्ची गोबर खाद का उपयोग भी दीमक को बढ़ावा देता है। कई किसान कटाई के बाद फसल अवशेष खेत में ही छोड़ देते हैं, जिससे दीमक को पनपने का मौका मिलता है। मिट्टी में जैविक पदार्थों का असंतुलन भी इसका एक बड़ा कारण माना जाता है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करना बेहद फायदेमंद होता है। इससे मिट्टी में मौजूद दीमक के अंडे और कॉलोनियां नष्ट हो जाती हैं। तेज धूप के संपर्क में आने से कीटों की संख्या कम होती है और अगली फसल सुरक्षित रहती है।
सूखी मिट्टी में दीमक तेजी से फैलती है। इसलिए खेत में समय-समय पर सिंचाई करते रहें और मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें। इससे दीमक के प्रकोप को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कच्ची गोबर खाद दीमक को आकर्षित करती है, इसलिए खेत में हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद का ही इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है और कीटों का खतरा भी कम होता है।
फसल कटाई के बाद खेत में बचे डंठल, पत्तियां और अन्य अवशेष दीमक के लिए भोजन का काम करते हैं। इसलिए कटाई के बाद खेत की अच्छी तरह सफाई करें और अवशेषों को हटा दें।
बुवाई के समय नीम खली का इस्तेमाल करना दीमक नियंत्रण का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एकड़ 100 से 150 किलोग्राम नीम खली का उपयोग किया जा सकता है। यह प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण में मदद करती है।
दीमक नियंत्रण के लिए किसान जैविक उपाय भी अपना सकते हैं। ब्यूवेरिया बेसियाना (Beauveria bassiana) जैसे जैविक फफूंदनाशकों का उपयोग किया जा सकता है। यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
यदि दीमक का प्रकोप ज्यादा हो जाए तो कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना सलाह के किसी भी रसायन का उपयोग करने से नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दीमक से बचाव का सबसे अच्छा तरीका समय रहते रोकथाम करना है। अगर किसान सही प्रबंधन अपनाएं तो फसल को दीमक से बचाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं।