Invest UP के मुताबिक उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। अब राज्य में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने (लैंड यूज चेंज) की प्रक्रिया को और आसान बना दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत निवेशकों को अब इस प्रक्रिया के लिए उपजिलाधिकारी (SDM) से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे न केवल उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्या हुआ फैसला
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भूमि उपयोग परिवर्तन
भूमि उपयोग परिवर्तन
सरकार के फैसले के अनुसार, जैसे ही किसी भूमि का नक्शा संबंधित प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत हो जाएगा, उसे स्वतः ही भूमि उपयोग परिवर्तन की श्रेणी में माना जाएगा। इससे पहले इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे परियोजनाओं में देरी होती थी और निवेशकों को अतिरिक्त समय व लागत का सामना करना पड़ता था।
कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी
यह महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। सरकार का मानना है कि इस सुधार से प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और राज्य में निवेश का माहौल और बेहतर बनेगा।
निवेशकों के लिए बड़ी राहत
नई व्यवस्था लागू होने से निवेशकों को अब कम समय में परियोजनाएं शुरू करने में मदद मिलेगी। पहले भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए अलग-अलग विभागों से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे प्रक्रिया जटिल और लंबी हो जाती थी। अब नक्शा स्वीकृत होते ही भूमि उपयोग परिवर्तन मान्य हो जाएगा, जिससे उद्योगों और व्यावसायिक परियोजनाओं को तेजी मिलेगी।
विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाना है। इस फैसले से औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में तेजी आएगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि से जुड़ी बाधाओं को कम करना निवेश आकर्षित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है और यह निर्णय उसी दिशा में एक बड़ा प्रयास है।