अब आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्र, पोषण के साथ शुरुआती शिक्षा पर भी होगा जोर
Gaon Connection | Jul 24, 2026, 16:34 IST
देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंगनवाड़ी केंद्रों को उन्नत सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस कदम से महिलाओं और बच्चों को शिक्षा और पोषण की उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिलेंगी। मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत, पोषण ट्रैकर नामक डिजिटल एप्लिकेशन सहायता करेगा ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा सके। सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
2 लाख आंगवाड़ी केंद्र आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत देशभर के दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर सेवाएं मिल सकें।
देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने और छोटे बच्चों के बेहतर विकास के लिए सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी है। इन केंद्रों में बेहतर पोषण सेवाओं के साथ-साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत किया जाएगा।
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है। इसके लाभार्थियों में छह वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और किशोरियाँ शामिल हैं। आकांक्षी जिलों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।
मंजूरी प्राप्त दो लाख सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में एलईडी स्क्रीन, जल शोधन प्रणाली, पोषण वाटिका, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) से जुड़ी सामग्री तथा भवन आधारित शिक्षण सामग्री जैसी सुविधएं उपलब्ध कराई जाएगी । इसका उद्देश्य बच्चों को बेहतर पोषण देने के साथ-साथ उनकी शुरुआती शिक्षा और विकास को मजबूत करना है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाता है। जनवरी 2023 में संशोधित पोषण मानकों के बाद भोजन की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता और विविधता पर भी अधिक ध्यान दिया गया है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण भी उपलब्ध कराया जाता है।इस मिशन की निगरानी 'पोषण ट्रैकर' नामक डिजिटल एप्लीकेशन के माध्यम से की जाती है। यह सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली है, जिसके जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों से जुड़ी जानकारी लगभग वास्तविक समय में दर्ज की जाती है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुँच पर लगातार निगरानी रखी जा सकती है।
मिशन के तहत समुदाय आधारित कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लोगों को पोषण संबंधी अच्छी आदतों के बारे में जानकारी देने के लिए सितंबर में 'पोषण माह' और मार्च-अप्रैल में 'पोषण पखवाड़ा' जैसे अभियान चलाए जाते हैं। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रत्येक महीने दो सामुदायिक आधारित कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि लोगों की भागीदारी बढ़ाई जा सके। आयोग ने वर्ष 2020 में पोषण अभियान का तृतीय पक्ष मूल्यांकन किया था, जिसमें इसकी उपयोगिता को संतोषजनक माना गया। वर्ष 2025 में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का परिणाम आधारित मूल्यांकन भी कराया गया। संस्थागत आकलन और घरेलू सर्वेक्षणों के आधार पर यह भी बताया गया है कि छह से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार में 8.5 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है, जिसे आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और अन्य पोषण संबंधी हस्तक्षेपों का संभावित प्रभाव माना गया है।
देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने और छोटे बच्चों के बेहतर विकास के लिए सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी है। इन केंद्रों में बेहतर पोषण सेवाओं के साथ-साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत किया जाएगा।
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है। इसके लाभार्थियों में छह वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और किशोरियाँ शामिल हैं। आकांक्षी जिलों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।