असम के बाक्सा का 20 मीट्रिक टन शहद पहुँचा अमेरिका, मधुमक्खी पालकों को मिला वैश्विक बाज़ार, जानें क्यों खास है बाक्सा का शहद?
Preeti Nahar | May 10, 2026, 11:32 IST
असम के आकांक्षी जिले बाक्सा से पहली बार ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के तहत 20 मीट्रिक टन शुद्ध शहद अमेरिका निर्यात किया गया है। Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority की पहल से हुई इस बड़ी उपलब्धि से स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों को करीब 43% अधिक मुनाफा मिलने की उम्मीद है। यह कदम उत्तर-पूर्व भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
APEDA की पहल से अमेरिका पहुंचा बाक्सा का शहद
भारत के कृषि निर्यात को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। असम के आकांक्षी जिले बाक्सा से पहली बार ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के तहत शुद्ध शहद की 20 मीट्रिक टन खेप अमेरिका भेजी गई है। 9 मई 2026 को Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority की पहल पर रवाना हुई यह खेप न केवल असम के किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए बड़ी खुशखबरी है, बल्कि यह भारत के कृषि निर्यात को वैश्विक बाजार में मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
अमेरिका भेजी गई करीब 20 मीट्रिक टन शहद की इस पहली खेप का निर्यात Salt Range Foods Pvt. Ltd. ने किया है, जो APEDA के साथ पंजीकृत निर्यातक कंपनी है। यह कदम ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना को मजबूती देने के साथ-साथ आकांक्षी जिलों के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
असम में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। यहां की समृद्ध जैव विविधता, घने वन क्षेत्र और पारंपरिक मधुमक्खी पालन संस्कृति इस क्षेत्र को खास बनाती है। कार्बी, मिशिंग और बोडो जैसी जनजातियां लंबे समय से शहद संग्रहण का काम करती रही हैं। शहद का उपयोग यहां भोजन, औषधि और पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों में भी किया जाता है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में असम में लगभग 1,650 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ। बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के बाक्सा, कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी और तामुलपुर राज्य के प्रमुख शहद उत्पादक जिले हैं।
बाक्सा जिले का शहद पर्यावरण के अनुकूल और कीटनाशक मुक्त क्षेत्रों से प्राप्त होता है। इसकी गुणवत्ता बेहद उच्च मानी जाती है और इसमें लगभग ऑर्गेनिक गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे ODOP योजना के तहत चुना गया। यह शहद अपनी प्राकृतिक शुद्धता, बेहतर पोषण मूल्य और औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है।
इस निर्यात से स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, शहद उत्पादकों को स्थानीय बाजार की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक कीमत मिलेगी। इससे ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
APEDA ने इस निर्यात को सफल बनाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स में लैब उपकरण और गुणवत्ता जांच सुविधाओं को मजबूत किया, ताकि अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया जा सके। यह निर्यात पहल दिखाती है कि भारत अब केवल पारंपरिक कृषि उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय और विशिष्ट उत्पादों को भी वैश्विक बाजार में नई पहचान दिला रहा है। बाक्सा का शहद अमेरिका पहुँचना उत्तर-पूर्व भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता का बड़ा उदाहरण बन गया है।
APEDA की पहल से अमेरिका पहुँचा बाक्सा का शहद
20 मीट्रिक टन शहद की इस पहली खेप का निर्यात
असम में शहद उत्पादन की मजबूत परंपरा
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में असम में लगभग 1,650 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ। बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के बाक्सा, कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी और तामुलपुर राज्य के प्रमुख शहद उत्पादक जिले हैं।
क्यों खास है बाक्सा का शहद?
बाक्सा जिले का पारंपरिक शहद
किसानों को मिलेगा 43% ज्यादा फायदा
वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारत की पहचान
भारत के कृषि निर्यात को वैश्विक बाजार में मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम