PMAY-G: राजस्थान में 2.89 लाख परिवारों को मिलेगा पक्का घर, आवास योजना के नियम भी बदले
Mansi | Aug 18, 2026, 12:03 IST
राजस्थान के कच्चे घरों में रह रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत दो लाख से अधिक नए घरों की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के पात्रता नियमों में बदलाव कर अधिक परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। किसानों की समृद्धि और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी खास घोषणाएं की गई हैं।
राजस्थान में 2.89 लाख पीएम आवास को मंजूरी
राजस्थान के उन परिवारों के लिए बड़ी ख़बर है, जो अब तक कच्चे घर में रह रहे हैं और पक्के मकान का इंतज़ार कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत राजस्थान में 2 लाख 89 हज़ार 355 नए घरों को मंज़ूरी दी है। इन घरों पर करीब 3,473 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार, 17 अगस्त को बारां में आयोजित कार्यक्रम में इसकी स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपा।
लेकिन इस कार्यक्रम में सिर्फ़ नए घरों की घोषणा नहीं हुई। आवास योजना में पात्रता के नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिससे कुछ ऐसे ग्रामीण परिवार अब योजना के दायरे में आ सकेंगे, जो पहले बाहर हो जाते थे। इसके अलावा राजस्थान में कृषि विकास के लिए 340.59 करोड़ रुपये की मंज़ूरी, महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य बढ़ाने और गाँवों के विकास के लिए बड़ी राशि खर्च करने जैसी घोषणाएं भी की गईं।
राजस्थान में आवास की ज़रूरत वाले 29 लाख 13 हज़ार 749 नए संभावित लाभार्थियों का सर्वे भी पूरा कर लिया गया है। हालांकि, सिर्फ़ सर्वे में नाम आने से घर मिलना तय नहीं होगा। पात्र परिवारों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा और इसके बाद योग्य पाए जाने वाले परिवारों को आवास की मंज़ूरी दी जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभार्थियों की सूची ज़िला और पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाए, ताकि लोग अपना नाम देख सकें। अगर किसी पात्र परिवार का नाम छूट गया है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल है, तो उस पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका भी दिया जाएगा।
ग्रामीण इलाक़ों में सरकारी योजनाओं का लाभ कई बार जानकारी या दस्तावेज़ों की गड़बड़ी के कारण सही परिवार तक नहीं पहुँच पाता। ऐसे में सूची को सार्वजनिक करने और आपत्तियाँ सुनने की व्यवस्था उन परिवारों के लिए अहम हो सकती है, जिन्हें वास्तव में पक्के घर की ज़रूरत है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में पात्रता को लेकर भी तीन बड़े बदलाव किए गए हैं। अब दोपहिया वाहन रखने वाला परिवार सिर्फ़ इस वजह से आवास योजना से बाहर नहीं होगा। पहले दोपहिया वाहन होना पात्रता में रुकावट बन सकता था। इसके अलावा, हर महीने 15 हज़ार रुपये तक कमाने वाली महिलाएँ भी आवास सहायता के लिए पात्र हो सकेंगी। पहले यह आय सीमा 10 हज़ार रुपये थी। छोटे किसानों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब 5 एकड़ तक असिंचित ज़मीन या 2.5 एकड़ तक सिंचित ज़मीन रखने वाले छोटे किसान भी योजना के तहत घर के लिए पात्र हो सकते हैं।
इन बदलावों का सीधा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है। गाँवों में दोपहिया वाहन अब सिर्फ़ सुविधा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुका है। इसी तरह छोटे किसानों के पास थोड़ी ज़मीन होना भी आम बात है। ऐसे में पुराने नियमों के कारण अगर कोई परिवार आवास सहायता से बाहर हो रहा था, तो नए नियम उसके लिए राहत लेकर आ सकते हैं।
बारां के कार्यक्रम में राजस्थान के लिए 340.59 करोड़ रुपये की कृषि विकास योजनाओं और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मंज़ूरी दी गई। किसानों को खाद की कीमतों को लेकर भी चौहान ने भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में यूरिया की एक बोरी की क़ीमत करीब 3,000 रुपये होने के बावजूद किसानों को यह 266 रुपये प्रति बोरी में उपलब्ध कराया जा रहा है और क़ीमत का बड़ा बोझ सरकार उठा रही है। उन्होंने खाद की कालाबाज़ारी पर कार्रवाई की बात भी कही। नक़ली कीटनाशकों और घटिया बीजों को लेकर भी सरकार ने सख़्त रुख़ अपनाने का संकेत दिया है। चौहान के मुताबिक़, मौजूदा क़ानून ऐसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए संसद के अगले सत्र में कीटनाशक और बीजों से जुड़े नए क़ानून लाए जाएंगे, जिनमें ग़लत काम करने वालों के लिए सख़्त सज़ा का प्रावधान होगा।
महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए राजस्थान में लखपति दीदी का लक्ष्य भी बढ़ाकर 32 लाख कर दिया गया है। अभी तक राज्य में करीब 16 लाख महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। चौहान ने बताया कि महिलाओं को कारोबार और आजीविका से जोड़ने के लिए अलग-अलग बैंकों के ज़रिए अब तक 13,400 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
ग्रामीण विकास को लेकर चौहान ने विकसित भारत-जी राम जी योजना का भी ज़िक्र किया। राजस्थान के लिए अगले नौ महीनों में करीब 12 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत हर ग्राम पंचायत तक विकास कार्यों का पैसा पहुँचाने की योजना है और प्रत्येक पंचायत के लिए सालाना करीब 80 लाख रुपये के विकास कार्यों का लक्ष्य बताया गया है। ख़ास बात यह है कि गाँव में किस तरह का विकास होना चाहिए, इसका फ़ैसला सिर्फ़ दिल्ली या जयपुर से करने के बजाय पंचायत स्तर पर लोगों की ज़रूरत के हिसाब से करने की बात कही गई है। यानी गाँव की सड़क, पानी, रोज़गार या दूसरी ज़रूरतों में प्राथमिकता किसे मिलेगी, इसमें स्थानीय लोगों की भूमिका अहम होगी।
इसके साथ ही कोटा-जालावाड़ क्षेत्र के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक व्यापक कृषि रोडमैप तैयार करने की बात भी कही गई है। इसमें सिर्फ़ फसल उगाने तक सीमित रहने के बजाय नई फसलें, प्रसंस्करण, बाज़ार और निर्यात को जोड़ा जाएगा, ताकि किसान को खेत से लेकर बड़े बाज़ार तक अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सके।
कुल मिलाकर राजस्थान में की गई ये घोषणाएँ सिर्फ़ पक्के घर देने तक सीमित नहीं हैं। आवास के साथ खेती, महिलाओं की आमदनी और गांवों के विकास पर भी ज़ोर दिया गया है। अब सबसे अहम बात यह होगी कि इन घोषणाओं का लाभ सही मायने में उन परिवारों तक पहुँचे, जो आज भी कच्चे घरों में रह रहे हैं, छोटी खेती पर निर्भर हैं या बेहतर आमदनी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
लेकिन इस कार्यक्रम में सिर्फ़ नए घरों की घोषणा नहीं हुई। आवास योजना में पात्रता के नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिससे कुछ ऐसे ग्रामीण परिवार अब योजना के दायरे में आ सकेंगे, जो पहले बाहर हो जाते थे। इसके अलावा राजस्थान में कृषि विकास के लिए 340.59 करोड़ रुपये की मंज़ूरी, महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य बढ़ाने और गाँवों के विकास के लिए बड़ी राशि खर्च करने जैसी घोषणाएं भी की गईं।
29 लाख से ज़्यादा परिवारों का सर्वे
ग्रामीण इलाक़ों में सरकारी योजनाओं का लाभ कई बार जानकारी या दस्तावेज़ों की गड़बड़ी के कारण सही परिवार तक नहीं पहुँच पाता। ऐसे में सूची को सार्वजनिक करने और आपत्तियाँ सुनने की व्यवस्था उन परिवारों के लिए अहम हो सकती है, जिन्हें वास्तव में पक्के घर की ज़रूरत है।
दोपहिया वाहन, कमाई और ज़मीन को लेकर बदले नियम
इन बदलावों का सीधा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है। गाँवों में दोपहिया वाहन अब सिर्फ़ सुविधा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुका है। इसी तरह छोटे किसानों के पास थोड़ी ज़मीन होना भी आम बात है। ऐसे में पुराने नियमों के कारण अगर कोई परिवार आवास सहायता से बाहर हो रहा था, तो नए नियम उसके लिए राहत लेकर आ सकते हैं।
महिलाओं और किसानों के लिए भी कई बड़े ऐलान
महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए राजस्थान में लखपति दीदी का लक्ष्य भी बढ़ाकर 32 लाख कर दिया गया है। अभी तक राज्य में करीब 16 लाख महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। चौहान ने बताया कि महिलाओं को कारोबार और आजीविका से जोड़ने के लिए अलग-अलग बैंकों के ज़रिए अब तक 13,400 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
पंचायत तय करेगी गाँव का विकास, किसानों के लिए बनेगा रोडमैप
इसके साथ ही कोटा-जालावाड़ क्षेत्र के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक व्यापक कृषि रोडमैप तैयार करने की बात भी कही गई है। इसमें सिर्फ़ फसल उगाने तक सीमित रहने के बजाय नई फसलें, प्रसंस्करण, बाज़ार और निर्यात को जोड़ा जाएगा, ताकि किसान को खेत से लेकर बड़े बाज़ार तक अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सके।
कुल मिलाकर राजस्थान में की गई ये घोषणाएँ सिर्फ़ पक्के घर देने तक सीमित नहीं हैं। आवास के साथ खेती, महिलाओं की आमदनी और गांवों के विकास पर भी ज़ोर दिया गया है। अब सबसे अहम बात यह होगी कि इन घोषणाओं का लाभ सही मायने में उन परिवारों तक पहुँचे, जो आज भी कच्चे घरों में रह रहे हैं, छोटी खेती पर निर्भर हैं या बेहतर आमदनी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।