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    कभी आसमान में बड़ी संख्या में दिखते थे गिद्ध, अब घटती आबादी के बीच उन्हें बचाने के लिए क्यों बनाए जा रहे हैं ‘रेस्टोरेंट’?
    कभी आसमान में बड़ी संख्या में दिखते थे गिद्ध, अब घटती आबादी के बीच उन्हें बचाने के लिए क्यों बनाए जा रहे हैं ‘रेस्टोरेंट’?

    By Mansi

    भारत में गिद्धों की संख्या तेजी से घट रही है, ये पक्षी प्रकृति के सफाईकर्मियों के रूप में कार्य करते हैं। ज़हरीली दवाओं, जैसे डाइक्लोफ़ेनाक, ने उनकी अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल दिया है। गिद्धों के संरक्षण के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग और सुरक्षित भोजन क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की हालिया रिपोर्ट ने इनकी नेस्टिंग साइट्स की स्थिति का उचित मूल्यांकन किया है।

    भारत में गिद्धों की संख्या तेजी से घट रही है, ये पक्षी प्रकृति के सफाईकर्मियों के रूप में कार्य करते हैं। ज़हरीली दवाओं, जैसे डाइक्लोफ़ेनाक, ने उनकी अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल दिया है। गिद्धों के संरक्षण के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग और सुरक्षित भोजन क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की हालिया रिपोर्ट ने इनकी नेस्टिंग साइट्स की स्थिति का उचित मूल्यांकन किया है।

    खेती में AI का बढ़ता इस्तेमाल, लेकिन किसान की कमाई कितनी बढ़ेगी? जानिए क्यों ज़रूरी है किसान-केंद्रित तकनीक
    खेती में AI का बढ़ता इस्तेमाल, लेकिन किसान की कमाई कितनी बढ़ेगी? जानिए क्यों ज़रूरी है किसान-केंद्रित तकनीक

    By Mansi

    कृषि में एआई तकनीक ने किसानों को सही फैसले लेने में सहारा दिया है। यह तकनीक मौसम, भूमि और कीटों की जानकारी प्रदान करते हुए उत्पादकता को बढ़ा सकती है। भारत सरकार 'भारत-विस्तार' जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से किसानों को डिजिटल प्लेटफार्मों की सहायता कर रही है। हालाँकि, यह सवाल उठता है कि किसानों के डेटा का संरक्षण और आर्थिक लाभ किसे मिलेगा।

    कृषि में एआई तकनीक ने किसानों को सही फैसले लेने में सहारा दिया है। यह तकनीक मौसम, भूमि और कीटों की जानकारी प्रदान करते हुए उत्पादकता को बढ़ा सकती है। भारत सरकार 'भारत-विस्तार' जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से किसानों को डिजिटल प्लेटफार्मों की सहायता कर रही है। हालाँकि, यह सवाल उठता है कि किसानों के डेटा का संरक्षण और आर्थिक लाभ किसे मिलेगा।

    अब अंतरिक्ष से दिखेगा खेत-खलिहान का हाल, ISRO का EOS-05 लॉन्च, जानिए क्यों है ख़ास
    अब अंतरिक्ष से दिखेगा खेत-खलिहान का हाल, ISRO का EOS-05 लॉन्च, जानिए क्यों है ख़ास

    By Mansi

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ईओएस-05 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है, जो भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट विशेष रूप से कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए जरूरी जानकारियां जुटाएगा। ईओएस-03 मिशन की असफलता के बाद यह सफलता भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो हमारी धरती निगरानी की क्षमता को और अधिक बढ़ाएगा।

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ईओएस-05 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है, जो भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट विशेष रूप से कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए जरूरी जानकारियां जुटाएगा। ईओएस-03 मिशन की असफलता के बाद यह सफलता भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो हमारी धरती निगरानी की क्षमता को और अधिक बढ़ाएगा।

    15 मिनट में नदी में समा गया पूरा बाज़ार, कैसे मची तबाही? ग्राउंड रिपोर्ट
    15 मिनट में नदी में समा गया पूरा बाज़ार, कैसे मची तबाही? ग्राउंड रिपोर्ट

    By Mansi

    सिर्फ 15–20 मिनट के सैलाब ने पूरे बाज़ार की तस्वीर बदल दी। जहाँ कुछ दिन पहले मेला, नाच-गाना और खुशियों का माहौल था, वहीं आज मातम और तबाही का मंजर है। त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ ने घरों, दुकानों, सड़कों और खेतों को बर्बाद कर दिया। नुआकोट के देवीघाट का बाजार देखते ही देखते नदी में समा गया। दो नदियों का पानी चारों तरफ फैल गया, जिससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए। कई घर और सामान पानी में बह गए, जबकि राहत और बचाव टीमें अब भी लोगों और शवों की तलाश में जुटी हैं। इस वीडियो में देखिए उस दर्दनाक बाढ़ की पूरी कहानी, जिसने कुछ ही मिनटों में लोगों की जिंदगी बदल दी।

    सिर्फ 15–20 मिनट के सैलाब ने पूरे बाज़ार की तस्वीर बदल दी। जहाँ कुछ दिन पहले मेला, नाच-गाना और खुशियों का माहौल था, वहीं आज मातम और तबाही का मंजर है। त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ ने घरों, दुकानों, सड़कों और खेतों को बर्बाद कर दिया। नुआकोट के देवीघाट का बाजार देखते ही देखते नदी में समा गया। दो नदियों का पानी चारों तरफ फैल गया, जिससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए। कई घर और सामान पानी में बह गए, जबकि राहत और बचाव टीमें अब भी लोगों और शवों की तलाश में जुटी हैं। इस वीडियो में देखिए उस दर्दनाक बाढ़ की पूरी कहानी, जिसने कुछ ही मिनटों में लोगों की जिंदगी बदल दी।

    FAO Report: जिस मिट्टी से उगता है हमारा खाना, उसकी सेहत बिगड़ रही! खेती पर क्यों बढ़ा ख़तरा, जानिए पूरी वजह
    FAO Report: जिस मिट्टी से उगता है हमारा खाना, उसकी सेहत बिगड़ रही! खेती पर क्यों बढ़ा ख़तरा, जानिए पूरी वजह

    By Mansi

    दुनिया भर में मिट्टी का क्षरण जारी है और इसे बचाने के तरीके धीमी गति से अपनाए जा रहे हैं। एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार, मिट्टी का कटाव सबसे गंभीर खतरा है जो खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है। मिट्टी के भीतर रहने वाले सूक्ष्मजीव और केंचुए जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टिकाऊ मिट्टी प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर नीतियों की आवश्यकता है।

    दुनिया भर में मिट्टी का क्षरण जारी है और इसे बचाने के तरीके धीमी गति से अपनाए जा रहे हैं। एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार, मिट्टी का कटाव सबसे गंभीर खतरा है जो खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है। मिट्टी के भीतर रहने वाले सूक्ष्मजीव और केंचुए जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टिकाऊ मिट्टी प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर नीतियों की आवश्यकता है।

    WMO Alert: अल नीनो हुआ बेहद ताक़तवर, 2026 के अंत में चरम पर पहुँचने का अनुमान; बारिश, सूखे और गर्मी का बढ़ेगा ख़तरा
    WMO Alert: अल नीनो हुआ बेहद ताक़तवर, 2026 के अंत में चरम पर पहुँचने का अनुमान; बारिश, सूखे और गर्मी का बढ़ेगा ख़तरा

    By Mansi

    प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो स्थिति का निर्माण हो चुका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने बताया है कि यह प्रभाव 2026 के अंत तक अत्यंत शक्तिशाली हो सकता है। अल नीनो के चलते भारत में वर्षा के पैटर्न में बदलाव आएगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो स्थिति का निर्माण हो चुका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने बताया है कि यह प्रभाव 2026 के अंत तक अत्यंत शक्तिशाली हो सकता है। अल नीनो के चलते भारत में वर्षा के पैटर्न में बदलाव आएगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    MP के किसानों को मिली सौगात: घर बैठे किसान क्रेडिट कार्ड, 12 महीने में कर्ज़ चुकाने की सुविधा, दिन में 10 घंटे बिजली; ‘दूध की राजधानी’ बनाने का लक्ष्य
    MP के किसानों को मिली सौगात: घर बैठे किसान क्रेडिट कार्ड, 12 महीने में कर्ज़ चुकाने की सुविधा, दिन में 10 घंटे बिजली; ‘दूध की राजधानी’ बनाने का लक्ष्य

    By Mansi

    मध्य प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए एक विशेष ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल की शुरुआत की है। जिन किसानों को कृषक कवच योजना से लाभ नहीं मिला, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। अगले ढाई साल में सिंचाई के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन लाने का लक्ष्य है, जहां 100 लाख हेक्टेयर तक रकबा बढ़ाया जाएगा।

    मध्य प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए एक विशेष ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल की शुरुआत की है। जिन किसानों को कृषक कवच योजना से लाभ नहीं मिला, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। अगले ढाई साल में सिंचाई के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन लाने का लक्ष्य है, जहां 100 लाख हेक्टेयर तक रकबा बढ़ाया जाएगा।

    Rajasthan: गाँवों में 3,219 KM सड़कें बनेगी, हजारों खेत तालाबों का लक्ष्य, पंचायत में खुलेंगे अटल ज्ञान केंद्र
    Rajasthan: गाँवों में 3,219 KM सड़कें बनेगी, हजारों खेत तालाबों का लक्ष्य, पंचायत में खुलेंगे अटल ज्ञान केंद्र

    By Mansi

    राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की एक नई लहर आएगी। सड़क और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करते हुए, 2026-27 तक 1,500 किलोमीटर नई सड़कें बनाई जाएँगी। किसानों के लिए 18,000 खेत तालाब और 8,000 डिग्गियों का निर्माण किया जाएगा। युवा प्रतिभाओं के लिए व्यवसाय और खेल में अवसर प्रदान करने के साथ-साथ, ग्राम पंचायतों में अटल ज्ञान केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

    राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की एक नई लहर आएगी। सड़क और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करते हुए, 2026-27 तक 1,500 किलोमीटर नई सड़कें बनाई जाएँगी। किसानों के लिए 18,000 खेत तालाब और 8,000 डिग्गियों का निर्माण किया जाएगा। युवा प्रतिभाओं के लिए व्यवसाय और खेल में अवसर प्रदान करने के साथ-साथ, ग्राम पंचायतों में अटल ज्ञान केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

    ‘‘एड नहीं, जस्टिस और कंपेंसेशन चाहिए”: नेपाल की तबाही ने उठाया क्लाइमेट जस्टिस का सवाल
    ‘‘एड नहीं, जस्टिस और कंपेंसेशन चाहिए”: नेपाल की तबाही ने उठाया क्लाइमेट जस्टिस का सवाल

    By Mansi

    पिछले कुछ समय में नेपाल और तिब्बत में आए भयानक बाढ़ ने जलवायु न्याय के मुद्दों को फिर से उजागर किया है। ये बाढ़ उस असमानता को दर्शाती हैं, जहां कम उत्सर्जन करने वाले देश जलवायु परिवर्तन के भयंकर परिणामों के सामने हैं, जबकि विकसित देशों का ऐतिहासिक योगदान काफी अधिक है। नेपाल जैसे देश अब केवल सहायता नहीं, बल्कि सही मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे हैं।

    पिछले कुछ समय में नेपाल और तिब्बत में आए भयानक बाढ़ ने जलवायु न्याय के मुद्दों को फिर से उजागर किया है। ये बाढ़ उस असमानता को दर्शाती हैं, जहां कम उत्सर्जन करने वाले देश जलवायु परिवर्तन के भयंकर परिणामों के सामने हैं, जबकि विकसित देशों का ऐतिहासिक योगदान काफी अधिक है। नेपाल जैसे देश अब केवल सहायता नहीं, बल्कि सही मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे हैं।

    Nepal Flood: 1600 बच्चों का स्कूल हुआ तबाह, त्रिशूली बाजार में बाढ़ ने बदल दी पूरी तस्वीर, स्कूल से लेकर बस स्टैंड और दुकानों तक सब पानी में समाए
    Nepal Flood: 1600 बच्चों का स्कूल हुआ तबाह, त्रिशूली बाजार में बाढ़ ने बदल दी पूरी तस्वीर, स्कूल से लेकर बस स्टैंड और दुकानों तक सब पानी में समाए

    By Mansi

    नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने त्रिशूली बाज़ार के स्कूल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। तेज़ी से आई बाढ़ ने सड़कें, दुकानें और पुल सब कुछ तबाह कर दिया। शुक्र है कि बच्चों को समय पर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया जा सका, जिससे एक बड़ी घटना टल गई। जहाँ कल बच्चे पढ़ते थे, अब वहाँ बाढ़ का पानी और मलबा भरा हुआ है।

    नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने त्रिशूली बाज़ार के स्कूल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। तेज़ी से आई बाढ़ ने सड़कें, दुकानें और पुल सब कुछ तबाह कर दिया। शुक्र है कि बच्चों को समय पर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया जा सका, जिससे एक बड़ी घटना टल गई। जहाँ कल बच्चे पढ़ते थे, अब वहाँ बाढ़ का पानी और मलबा भरा हुआ है।