6-7 जून को होगा चौथा लैवेंडर फेस्टिवल, ‘Lavender Goes Global’ थीम के साथ दिखेगी पर्पल रिवोल्यूशन की सफलता
Preeti Nahar | Jun 04, 2026, 12:44 IST
जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में 6 और 7 जून को चौथा लैवेंडर फेस्टिवल आयोजित होगा। CSIR-IIIM के इस आयोजन में पर्पल रिवोल्यूशन की उपलब्धियों, लैवेंडर आधारित ग्रामीण उद्यमिता और किसानों की बढ़ती आय को प्रदर्शित किया जाएगा। 5,000 से अधिक किसान इस मिशन से लाभान्वित हो चुके हैं और 50 से ज्यादा डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं।
जम्मू में पर्पल रिवोल्यूशन ने बदली किसानों की तस्वीर
जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में 6 और 7 जून को आयोजित होने जा रहा चौथा लैवेंडर फेस्टिवल 2026 इस बार “Lavender Goes Global” थीम के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्पल रिवोल्यूशन की सफलता का जश्न मनाएगा। CSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (CSIR-IIIM) द्वारा आयोजित यह महोत्सव लैवेंडर आधारित उद्यमिता, किसानों की आय में वृद्धि और सुगंधित फसलों के बढ़ते वैश्विक बाजार पर केंद्रित रहेगा। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
कभी सीमित कृषि विकल्पों और कम आय से जूझने वाला भद्रवाह क्षेत्र आज देश में लैवेंडर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। CSIR-अरोमा मिशन के तहत किसानों को लैवेंडर की खेती, पौध सामग्री, प्रशिक्षण और विपणन सहायता उपलब्ध कराई गई। CSIR-IIIM के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद के अनुसार इस मिशन से जम्मू-कश्मीर में 5,000 से अधिक किसान और युवा उद्यमी लाभान्वित हुए हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर लैवेंडर तेल और अन्य उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 50 से अधिक स्थायी और मोबाइल डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित की गई हैं।
लैवेंडर केवल एक फसल नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता का नया मॉडल बनकर उभरा है। इसके फूलों और तेल का उपयोग कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम, अरोमा थेरेपी, औषधीय उत्पादों और वेलनेस उद्योग में किया जाता है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर आय प्राप्त हो रही है। कई युवा खेती के साथ-साथ लैवेंडर आधारित स्टार्टअप और प्रसंस्करण इकाइयां भी चला रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
डॉ. ज़बीर अहमद ने कहा कि भद्रवाह में आयोजित होने वाला लैवेंडर फेस्टिवल अब एक राष्ट्रीय मंच का रूप ले चुका है, जहाँ देशभर से वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उद्यमी, नीति निर्माता और किसान एकत्र होते हैं। यह आयोजन हिमालयी क्षेत्रों में सुगंधित फसलों के माध्यम से हुए सामाजिक और आर्थिक बदलाव को प्रदर्शित करता है। महोत्सव के दौरान किसानों को नई तकनीकों, बाजार अवसरों और मूल्य संवर्धन से जुड़ी जानकारियां भी दी जाएंगी।
इस वर्ष की थीम “Lavender Goes Global” इस बात का संकेत है कि भारत अब लैवेंडर उत्पादन और उससे जुड़े उत्पादों के वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात पर विशेष ध्यान दिया जाए तो लैवेंडर जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
लैवेंडर की खेती ने जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय इलाकों में कृषि का नया विकल्प प्रदान किया है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है बल्कि महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। चौथा लैवेंडर फेस्टिवल इस बदलाव की कहानी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर बनेगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।