मध्य प्रदेश में बढ़ी मक्के की बुवाई, लेकिन देशभर में 5 प्रतिशत घटा रकबा, जानिए राज्यवार आँकड़े
Gaon Connection | Jul 24, 2026, 13:57 IST
मध्य प्रदेश में मक्के की बुवाई बढ़ी है, लेकिन कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति आगे उत्पादन तय करेगी
मक्के की खेती पर इस साल मानसून का सीधा असर पड़ा है
कृषि मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार 17 जुलाई तक देश में मक्के की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5 प्रतिशत कम रही। मध्य प्रदेश में रकबा बढ़ा है, जबकि कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गिरावट दर्ज की गई है। देश में खरीफ सीजन आगे बढ़ने के साथ मक्के की बुवाई की तस्वीर भी साफ होने लगी है। इस बार कई राज्यों में मानसून की धीमी शुरूआत और असमान बारिश का असर किसानों के खेतों तक पहुँचा है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं मिलने के कारण कई इलाकों में किसान तय अवधि में मक्के की बुवाई नहीं कर पाए। इसका नतीजा यह है कि देश में मक्के का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में कम दर्ज किया गया है। हालांकि मध्य प्रदेश ने इस गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन करते हुए मक्के की बुवाई बढ़ाई है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक देश में मक्के की बुवाई 67.89 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधी में यह 71.5 लाख हेक्टेयर में हुई थी। यानी इस बार मक्के का रकबा करीब 5 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा तो इसका असर खरीफ उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
इस बार मक्के की बुवाई में सबसे सकारात्मक तस्वीर मध्य प्रदेश की सामने आई है। यहाँ 17 जुलाई तक 23.37 लाख हेक्टेयर में मक्के की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 19 लाख हेक्टेयर थी। इसके विपरीत कर्नाटक में मक्के का रकबा घटकर 9.43 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम है। महाराष्ट्र में भी बुवाई घटकर 9.59 लाख हेक्टेयर रह गई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में भी मक्के का रकबा कम हुआ है, जबकि बिहार और आंध्र प्रदेश में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन राज्यों में मानसून समय पर नहीं पहुँचा या सामान्य से कम बारिश हुई, वहाँ बुवाई सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
मक्का खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों में शामिल है और इसकी बुवाई का समय सीमित होता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई में अधिक देरी होने पर पैदावार प्रभावित हो सकती है। अभी कुछ राज्यों में बारिश की स्थिति सुधरी है, लेकिन जिन इलाकों में बुवाई का उपयुक्त समय निकल चुका है, वहाँ नुकसान की भरपाई आसान नहीं होगी। यही वजह है कि इस बार मक्के के उत्पादन को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में बेहतर बुवाई से कुल उत्पादन पर पड़ने वाले असर को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।
कृषि मंत्रालय लगातार खरीफ फसलों की बुवाई पर नज़र बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह मक्के की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। यदि जुलाई के अंतिम दिनों और अगस्त की शुरुआत में पर्याप्त वर्षा होती है तो देर से बोई गई फसलों को लाभ मिल सकता है। लेकिन जिन राज्यों में बुवाई का रकबा पहले ही कम रह गया है, वहाँ पिछले वर्ष के बराबर उत्पादन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब मानसून की अगली चाल और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर टिकी है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक देश में मक्के की बुवाई 67.89 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधी में यह 71.5 लाख हेक्टेयर में हुई थी। यानी इस बार मक्के का रकबा करीब 5 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा तो इसका असर खरीफ उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश में बढ़ी बुवाई, कई राज्यों में आई गिरावट
समय पर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर पड़ सकता है असर
कृषि मंत्रालय लगातार खरीफ फसलों की बुवाई पर नज़र बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह मक्के की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। यदि जुलाई के अंतिम दिनों और अगस्त की शुरुआत में पर्याप्त वर्षा होती है तो देर से बोई गई फसलों को लाभ मिल सकता है। लेकिन जिन राज्यों में बुवाई का रकबा पहले ही कम रह गया है, वहाँ पिछले वर्ष के बराबर उत्पादन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब मानसून की अगली चाल और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर टिकी है।