Donkey Farming : गधा पालें, लाखों पाएं, केंद्र सरकार दे रही 50 लाख सब्सिडी, जानिए कैसे शुरू कर सकते हैं यह बिजनेस?
Preeti Nahar | Mar 06, 2026, 19:04 IST
केंद्र सरकार ने गधा पालन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। इस योजना के भीतर गधा पालन करने वाले युवा उद्यमियों और किसानों को 50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। यह राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे गधों की संख्या में कमी को रोका जा सकेगा।
गधा पालन पर मिलेगी 50 लाख कर की सब्सिडी
पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए केंद्र सरकार ने एक खास योजना शुरू की है। इस योजना के तहत अगर कोई किसान या उद्यमी गधा पालन (डंकी फार्मिंग) शुरू करना चाहता है, तो उसे सरकार की तरफ से 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। यह सहायता राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission – NLM) के तहत दी जा रही है।
सरकार का कहना है कि देश में गधों की संख्या तेजी से घट रही है। इसलिए इस योजना का उद्देश्य एक तरफ गधों की नस्ल को बचाना है और दूसरी तरफ पशुपालन के जरिए ग्रामीण युवाओं को नया व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह पहल देश में गधों की घटती आबादी को देखते हुए की गई है, जो पिछले 14 वर्षों में 60% तक कम हो गई है।
इस योजना के तहत सरकार परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी देती है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये है। यानी अगर कोई व्यक्ति लगभग एक करोड़ रुपये की परियोजना शुरू करता है, तो उसे सरकार की ओर से 50 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है।
इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसानों को ही नहीं बल्कि किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी संस्थाएं, संयुक्त देयता समूह (JLG) और सेक्शन-8 कंपनियां भी ले सकती हैं। इससे पशुपालन क्षेत्र में छोटे उद्यमियों और समूह आधारित खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
गधा पालन की इकाई स्थापित करने के लिए एक तय मानक भी रखा गया है। इसके तहत आमतौर पर एक यूनिट में कम से कम 50 मादा गधे और 5 नर गधे होने चाहिए। इस तरह की ब्रीडिंग यूनिट बनाने के लिए सरकार सब्सिडी देती है, जिससे बेहतर नस्ल के गधों का संरक्षण और उत्पादन बढ़ सके। सरकारी दिशानिर्देशों के मुताबिक इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का उपयोग पशुओं की खरीद, शेड निर्माण, बीमा, चारा उत्पादन के लिए जमीन की तैयारी और जरूरी उपकरण खरीदने में किया जा सकता है। हालांकि जमीन खरीदने या व्यक्तिगत वाहन खरीदने जैसे खर्चों पर सब्सिडी नहीं मिलती।
सरकार की ओर से गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देने की खबरों के बीच इस विषय पर गाँव कनेक्शन ने पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. कुंदन से बात की। बातचीत में उन्होंने बताया कि आज के समय में गधा पालन क्यों महत्वपूर्ण है, गधों की संख्या क्यों कम हो रही है और अगर कोई इसे व्यवसाय के रूप में शुरू करना चाहता है तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
इस सवाल पर डॉ. कुंदन बताते हैं कि गधों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार कम हुई है। ऐसे में सरकार उन्हें बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में गधों का उपयोग सामान ढोने और कई दूसरे कामों में होता था, लेकिन धीरे-धीरे मशीनों और वाहनों के बढ़ने से उनका उपयोग कम हो गया। यही कारण है कि अब सरकार इस पशु को बचाने और पालन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं ला रही है।
डॉ. कुंदन के अनुसार, गधी के दूध को लेकर थोड़ा चलन बढ़ा है, लेकिन यह सिर्फ मादा गधों से ही मिलता है। नर गधे दूध उत्पादन के लिए उपयोगी नहीं होते। उन्होंने बताया कि गधी के दूध की कुछ अलग गुणवत्ता हो सकती है, लेकिन इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अभी कोई विशेष तकनीक या व्यवस्था बड़े स्तर पर विकसित नहीं हुई है। सामान्य दूध की तरह यह भी कुछ समय बाद खराब हो जाता है।
इस पर डॉ. कुंदन कहते हैं कि सबसे पहले किसान को यह देखना चाहिए कि उसके क्षेत्र में कौन-सी नस्ल (ब्रीड) उपलब्ध है। इसके बाद वह उसी के आधार पर योजना बना सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार की नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) योजना के तहत पशुपालन के लिए सब्सिडी दी जाती है, जिसमें गधा पालन भी शामिल हो सकता है।
डॉ. कुंदन के अनुसार, अभी गधा पालन कुछ राज्यों में ही ज्यादा देखने को मिलता है। खासकर राजस्थान में गधों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भी लोगों ने गधा पालन शुरू किया है। वहीं उत्तर प्रदेश में अभी बड़े स्तर पर गधा पालन के फार्म बहुत ज्यादा विकसित नहीं हुए हैं।
इस सवाल पर उन्होंने बताया कि आमतौर पर नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत मिलने वाली सब्सिडी पशुओं के हिसाब से बहुत ज्यादा अलग नहीं होती। किसान को योजना के दिशा-निर्देश देखकर यह समझना चाहिए कि किस प्रकार की परियोजना पर कितनी सहायता मिल सकती है।
अगर सही जानकारी और योजना के साथ गधा पालन किया जाए तो यह किसानों के लिए आय का एक नया विकल्प बन सकता है। सरकार की योजनाओं और सब्सिडी का लाभ लेकर किसान पशुपालन के इस क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं। अगर आप भी सरकार की इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो सीधे इसकी आधिकारिक वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाइए। वहाँ आवेदन करने की पूरी व्यवस्था है। आवेदन करने के बाद बैंक से लोन लेकर आप अपना प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं।
सरकार का कहना है कि देश में गधों की संख्या तेजी से घट रही है। इसलिए इस योजना का उद्देश्य एक तरफ गधों की नस्ल को बचाना है और दूसरी तरफ पशुपालन के जरिए ग्रामीण युवाओं को नया व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह पहल देश में गधों की घटती आबादी को देखते हुए की गई है, जो पिछले 14 वर्षों में 60% तक कम हो गई है।
50 प्रतिशत तक मिलेगी पूंजीगत सब्सिडी
कोई भी कर सकता है गधा पालन
इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसानों को ही नहीं बल्कि किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी संस्थाएं, संयुक्त देयता समूह (JLG) और सेक्शन-8 कंपनियां भी ले सकती हैं। इससे पशुपालन क्षेत्र में छोटे उद्यमियों और समूह आधारित खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
गधा पालन के जरूरी नियम
गधा पालन पर सरकार की सब्सिडी और इसके उपयोग पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बढ़ रही है गधों की बेरोजगारी
गधा पालन आज के समय में कितना महत्वपूर्ण है?
क्या गधी के दूध की भी मांग बढ़ रही है?
गधी के दूध की बढ़ती माँग
अगर कोई किसान गधा पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहे तो क्या करे?
भारत में किन राज्यों में ज्यादा हो रहा है गधा पालन?
क्या अलग-अलग नस्लों के लिए सब्सिडी अलग होती है?
गधा पालन बना नया बिजनेस