Mushroom Farming: मशरूम की खेती शुरु करना चाहते हैं? यूपी सरकार दे रही है 50 % तक सब्सिडी, जानिए कैसे उठाएँ लाभ

Mansi | Aug 03, 2026, 13:44 IST
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उत्तर प्रदेश मशरूम उत्पादन में देश का सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। सरकार किसानों को सब्सिडी और प्रशिक्षण देकर इस खेती को बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने लगभग 51 हजार मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन किया। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 40 से 50% तक अनुदान दिया जाता है। यह खेती महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।

मशरूम उत्पादन में यूपी देश में नंबर-1
मशरूम उत्पादन में यूपी देश में नंबर-1
कम जगह, कम समय और बेहतर मुनाफ़े की वजह से मशरूम की खेती किसानों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश अब मशरूम उत्पादन में देश का सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। सरकार का कहना है कि किसानों को सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देकर इस खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 51 हज़ार मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हुआ। यह देश के कुल 4.27 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लगभग 13 % है। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की बढ़ती भागीदारी और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की वजह से यह उपलब्धि हासिल हुई है।

मशरूम की खेती पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?

उद्यान एवं कृषि विपणन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए मशरूम जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत मशरूम उत्पादन इकाइयों की स्थापना पर किसानों को 40 से 50 % तक अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा पिछले वर्ष मशरूम उत्पादन, कंपोस्ट और स्पॉन निर्माण की 30 इकाइयों को 40 % अनुदान देने की मंज़ूरी दी गई।

छोटे स्तर पर खेती शुरू करने वालों को भी मिलेगा लाभ

अगर कोई किसान कम लागत में मशरूम की खेती शुरू करना चाहता है तो उसके लिए भी सरकार की योजना उपलब्ध है। दिनेश प्रताप सिंह के अनुसार 200 वर्ग फुट के छप्पर मॉडल के तहत मशरूम उत्पादन इकाई लगाने पर अधिकतम एक लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रदेश में अब तक 80 मशरूम इकाइयाँ स्थापित की जा चुकी हैं।

इन ज़िलों के किसान अपना रहे हैं मशरूम की खेती

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज, सहारनपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, हरदोई, बस्ती, मेरठ, प्रतापगढ़, रायबरेली और सोनभद्र समेत कई ज़िलों में किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में उद्यान विभाग किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।

महिलाओं के लिए भी रोज़गार का अच्छा विकल्प

दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि मशरूम की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी स्वरोज़गार का प्रभावी माध्यम बन रही है। कम ज़मीन और कम लागत में होने वाली यह खेती तीन से चार सप्ताह में तैयार हो जाती है। यही वजह है कि स्वयं सहायता समूहों और महिला किसानों की इसमें रुचि लगातार बढ़ रही है।

क्यों बढ़ रही है मशरूम की खेती की लोकप्रियता?

मशरूम की खेती के लिए बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती और इसे नियंत्रित वातावरण में कम जगह पर भी किया जा सकता है। कम समय में फ़सल तैयार होने और बाज़ार में अच्छी माँग रहने के कारण यह खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। सरकार का मानना है कि सब्सिडी और प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं से आने वाले समय में और अधिक किसान इस खेती से जुड़ सकेंगे।
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