500 युवा बदलेंगे बॉर्डर के गांवों की तस्वीर, केंद्र ने शुरू किया वाइब्रेंट विलेज मिशन 2026, जानिए एक हफ्ते तक क्या-क्या करेंगे
Gaon Connection | Jun 03, 2026, 17:26 IST
युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने माई भारत के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 शुरू किया है। इसके तहत देशभर से चुने गए 500 युवा स्वयंसेवक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के 100 सीमावर्ती गांवों में विकास गतिविधियों में भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, युवा सहभागिता और सीमावर्ती क्षेत्रों के सतत विकास को बढ़ावा देना है।
विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026
भारत के सीमावर्ती गांवों को विकास और युवा सहभागिता से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने 'मेरा युवा भारत' (माई भारत) के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीवीपी) 2026 के पहले चरण का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर सतत विकास को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के तहत देशभर से चुने गए 500 युवा स्वयंसेवकों को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में भेजा जाएगा। ये स्वयंसेवक गांवों में रहकर स्थानीय समुदायों के साथ काम करेंगे और विकास गतिविधियों में भाग लेंगे।
माई भारत के 500 स्वयंसेवकों का चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता के जरिए किया गया, जिसमें तीन लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया था। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन युवाओं को दो चरणों में सीमावर्ती गांवों में तैनात किया जा रहा है। पहले चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गतिविधियां संचालित कर रहे हैं जबकि शेष 250 स्वयंसेवक जून के अंत तक दूसरे चरण में 50 अन्य गांवों में कार्य करेंगे।
यह कार्यक्रम युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन को नजदीक से समझने का अवसर देगा। स्वयंसेवक गांववासियों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ संवाद करेंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं को जानेंगे।
सात दिवसीय कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, ग्राम विकास, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय एकता और सामुदायिक जीवन जैसे विषयों पर काम करेंगे। वे घर-घर सर्वेक्षण करेंगे, ग्राम सभाओं में भाग लेंगे, स्वच्छता एवं पर्यावरण अभियानों से जुड़ेंगे और गांवों में विकास की संभावनाओं की पहचान करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक 'नेशन फर्स्ट चैलेंज' अभियान को भी बढ़ावा देंगे। इसके तहत पांच प्रमुख विषयों पर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का संचालन गृह मंत्रालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर विशेष तैयारियां की गई हैं। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, कंट्रोल रूम की स्थापना और ग्राम कार्य योजनाएं भी तैयार की गई हैं।
केंद्र सरकार का मानना है कि यह कार्यक्रम युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाएगा और सीमावर्ती गांवों के साथ उनका सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक जुड़ाव मजबूत करेगा। यह पहल विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
3 लाख युवाओं में से चुने गए 500 स्वयंसेवक
गांवों में रहकर समझेंगे जमीनी हकीकत
सात दिन का विशेष प्रशिक्षण और सर्वे
'नेशन फर्स्ट चैलेंज' पर रहेगा विशेष फोकस
- स्वदेशी उत्पादों को अपनाना
- स्वस्थ भोजन और खाना पकाने की आदतें
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और ईंधन बचत
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
- स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहन