चारपाई पर अस्पताल ले जानी पड़ीं गर्भवती महिलाएं, एक साल में 53 मौतों पर NHRC सख्त, मध्य प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट
Preeti Nahar | Jun 02, 2026, 18:14 IST
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वर्ष के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश मौतें जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव, डॉक्टरों की कमी और समय पर इलाज न मिलने के कारण हुईं। कई गाँवों में सड़क संपर्क कमजोर होने से गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर उठाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है, जिससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सीधी जिले में 53 मातृ मृत्यु के मामले का स्वतः संज्ञान
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिले में प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि के दौरान 53 महिलाओं की मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों के संभावित गंभीर उल्लंघन का मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला केवल स्वास्थ्य सेवाओं की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, सड़क संपर्क और मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है।
द इंडियन एक्सप्रेस की 29 मई 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि मध्य प्रदेश के सीधी जिले में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 53 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसवोत्तर अवधि में मौत हो गई। रिपोर्ट में स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी, कमजोर रेफरल व्यवस्था, खराब सड़क संपर्क तथा दूरदराज के गाँवों में गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर उठाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाने जैसी गंभीर समस्याओं को उजागर किया गया था।
रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। आयोग ने इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सीधी जिले में 53 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हुई। इनमें अधिकांश महिलाएं पहली या दूसरी बार माँ बनने वाली थीं। मृत महिलाओं की औसत आयु लगभग 26 वर्ष बताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ मृत्यु दर किसी भी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण संकेतक होती है और इतनी बड़ी संख्या गंभीर चिंता का विषय है।
मीडिया रिपोर्ट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी का उल्लेख किया गया है। कई मामलों में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रीवा रेफर किया जाता है। लेकिन लंबी दूरी और परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण कई गर्भवती महिलाओं की स्थिति रास्ते में ही गंभीर हो जाती है।
सीधी जिले के कई गाँवों में आज भी बेहतर सड़क संपर्क का अभाव है। एम्बुलेंस चालकों के अनुसार कई गाँव ऐसे हैं जहाँ वाहन सीधे नहीं पहुंच सकते। विशेषकर बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। कई मामलों में गर्भवती महिलाओं को दो से तीन किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव संबंधी आपात स्थितियों में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
खबरों के अनुसार राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित सामुदायिक मातृ स्वास्थ्य लीग की रैंकिंग में सीधी जिला लगातार सबसे निचले तीन जिलों में शामिल रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिले में लंबे समय से चुनौतियां बनी हुई हैं। मातृ मृत्यु के अधिकांश मामलों को समय पर चिकित्सा सुविधा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, बेहतर रेफरल सिस्टम और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से रोका जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है, क्योंकि सीधी जिले में एक वर्ष के भीतर 53 मातृ मृत्यु का मामला केवल एक जिले की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों का संकेत है। NHRC की दखल के बाद अब निगाहें मध्य प्रदेश सरकार की रिपोर्ट और संभावित सुधारात्मक कदमों पर टिकी हैं। यह घटना याद दिलाती है कि मातृ स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे, परिवहन, जागरूकता और प्रशासनिक जवाबदेही का भी मुद्दा है।