भारत में हर दिन सड़क हादसों में 546 लोगों की मौत, बाइक सवार सबसे ज़्यादा शिकार, NCRB रिपोर्ट में खुलासा
Gaon Connection | May 07, 2026, 18:28 IST
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ट्रैफिक हादसों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। हर दिन करीब 546 लोगों की जान जा रही है। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। तेज रफ्तार सड़क हादसों का मुख्य कारण बनी। दोपहिया वाहन चालकों की मौतें सबसे अधिक दर्ज की गईं।
देश में बढ़े ट्रैफिक हादसे
भारत में सड़कें हर दिन औसतन 546 लोगों की जान ले रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक देश में ट्रैफिक हादसों में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1.99 लाख पहुंच गया है। इनमें सबसे ज्यादा मौतें सड़क हादसों में हुईं और तेज रफ्तार सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आई। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र ट्रैफिक हादसों में सबसे ज्यादा मौत वाले राज्य रहे।
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में देशभर में ट्रैफिक हादसों में 1.99 लाख लोगों की मौत हुई जो 2023 के मुकाबले 0.79 प्रतिशत ज्यादा है। यानी हर दिन करीब 546 लोगों की जान गई। 2023 में यह आंकड़ा 1.98 लाख था। ट्रैफिक हादसों में सड़क दुर्घटनाएं, रेलवे ट्रैक हादसे, रेलवे परिसर में होने वाली घटनाएं और रेलवे क्रॉसिंग दुर्घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में कुल ट्रैफिक हादसों की संख्या 4.91 लाख से बढ़कर 4.95 लाख हो गई, जबकि 4.52 लाख लोग घायल हुए। सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में 27,071 दर्ज की गईं। इसके बाद तमिलनाडु में 20,390 और महाराष्ट्र में 19,475 लोगों की मौत हुई। ये तीनों राज्य मिलकर देश के कुल ट्रैफिक हादसों में हुई मौतों का 33.6 प्रतिशत हिस्सा हैं।
रिपोर्ट बताती है कि 1.99 लाख ट्रैफिक मौतों में से 1.75 लाख यानी 88 प्रतिशत मौतें सड़क हादसों में हुईं। सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें दोपहिया वाहन चालकों की हुईं। 2024 में 84,599 बाइक सवारों की जान गई। इसके बाद पैदल चलने वालों की 25,769 और कार सवारों की 23,739 मौतें दर्ज की गईं।
तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में दोपहिया हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। वहीं SUV, कार और जीप दुर्घटनाओं में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार है, जो कुल मौतों के 58 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार रही। इसके बाद लापरवाही से वाहन चलाना 26.3 प्रतिशत, खराब मौसम 2.9 प्रतिशत और शराब या नशे की हालत में ड्राइविंग 1.9 प्रतिशत कारण रहे।
देश में कुल सड़क नेटवर्क का केवल 2.1 प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्गों का है, लेकिन यहां 29.8 प्रतिशत सड़क हादसे हुए। राज्य राजमार्गों पर 22 प्रतिशत और बाकी सड़कों पर 48.2 प्रतिशत हादसे दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा सड़क हादसे शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच हुए, जो कुल हादसों का 20.8 प्रतिशत हैं।
हालांकि 2024 में किसी बड़े रेलवे दुर्घटना की रिपोर्ट नहीं हुई, लेकिन ट्रेन से गिरने या रेलवे ट्रैक पर टक्कर की घटनाओं में 17,029 लोगों की मौत हुई। रेलवे परिसरों में आग या विस्फोट जैसी घटनाओं में 5,384 लोगों की जान गई, जबकि रेलवे क्रॉसिंग हादसों में 1,888 मौतें दर्ज की गईं। रेलवे ट्रैक हादसों में महाराष्ट्र सबसे ऊपर रहा, जहां कुल मौतों का 28.9 प्रतिशत हिस्सा दर्ज हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि मुंबई की उपनगरीय लोकल ट्रेन नेटवर्क में भीड़भाड़ के कारण चलती ट्रेन पकड़ने या फुटबोर्ड पर सफर करने की वजह से ऐसे हादसे ज्यादा होते हैं। रेलवे क्रॉसिंग हादसों में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहे। कुल मौतों में यूपी की हिस्सेदारी 32.3 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल की 29.1 प्रतिशत और केरल की 14.1 प्रतिशत रही।
2024 में बढ़े ट्रैफिक हादसा
सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें
तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में दोपहिया हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। वहीं SUV, कार और जीप दुर्घटनाओं में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार है, जो कुल मौतों के 58 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार रही। इसके बाद लापरवाही से वाहन चलाना 26.3 प्रतिशत, खराब मौसम 2.9 प्रतिशत और शराब या नशे की हालत में ड्राइविंग 1.9 प्रतिशत कारण रहे।