AI और ड्रोन से बदलेगी खेती की तस्वीर! 6000 किसानों को नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी; गडकरी ने बताया भविष्य का रास्ता
Gaon Connection | Jul 18, 2026, 18:16 IST
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खेती में AI और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे पानी और उर्वरकों की खपत कम होगी तथा फसलों में रोगों की समय रहते पहचान हो सकेगी। विदर्भ में 1,000 संतरा और 5,000 गन्ना किसानों को AI आधारित खेती से जोड़ने की योजना बनाई गई है। किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर खेती को अधिक लाभकारी और वैज्ञानिक बनाने पर फ़ोकस किया जाएगा।
अब AI बताएगा फसल का हाल!
देश में खेती को अधिक आधुनिक, कम लागत वाली और टिकाऊ बनाने की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन तकनीक को अहम हथियार माना जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि आने वाले समय में खेती केवल पारंपरिक अनुभव के भरोसे नहीं, बल्कि डेटा और तकनीक के आधार पर भी संचालित होगी। उनका मानना है कि यदि किसानों तक AI आधारित समाधान पहुँचते हैं, तो सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और फसल सुरक्षा जैसे कई काम अधिक सटीक और कम लागत में किए जा सकेंगे।
गडकरी ने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीकों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों का खर्च घटाना और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना भी है। इसी सोच के साथ विदर्भ क्षेत्र में संतरा और गन्ना किसानों को AI आधारित खेती से जोड़ने की पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत हजारों किसानों को नई तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे अपने खेतों में इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।
नितिन गडकरी ने बताया कि एग्रोविजन फ़ाउंडेशन के माध्यम से विदर्भ में कम से कम 1,000 संतरा उत्पादकों और 5,000 गन्ना किसानों को AI आधारित कृषि तकनीकों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल के तहत किसानों को डिजिटल उपकरणों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग सिखाया जाएगा, जिससे फसल प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन सके।
गडकरी के अनुसार, AI तकनीक खेती में पानी की आवश्यकता का सटीक आकलन कर अनावश्यक सिंचाई को कम करने में मदद कर सकती है। इसी तरह उर्वरकों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार किया जा सकेगा, जिससे लागत घटेगी। उन्होंने कहा कि AI की मदद से फसलों में रोग या कीटों के शुरुआती लक्षणों की पहचान पहले ही हो सकती है, जिससे किसान समय रहते उपचार कर नुकसान कम कर सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक तभी सफल होगी, जब किसान उसे समझकर अपने खेतों में अपनाएँगे। इसलिए AI के साथ-साथ ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण भी बेहद ज़रूरी है। ड्रोन का उपयोग फसलों की निगरानी, पोषक तत्वों के छिड़काव और खेतों के सर्वेक्षण जैसे कार्यों को तेज़ और अधिक सटीक बना सकता है। उनका मानना है कि तकनीकी दक्षता बढ़ने से खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने तकनीक आधारित कृषि मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि जिन संस्थानों ने किसानों को प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा है, उनके अनुभवों को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और प्रशिक्षण का समन्वय ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान है। यदि किसान समय के साथ नई तकनीकों को अपनाते हैं, तो खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और संसाधन-कुशल बन सकती है।
गडकरी ने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीकों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों का खर्च घटाना और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना भी है। इसी सोच के साथ विदर्भ क्षेत्र में संतरा और गन्ना किसानों को AI आधारित खेती से जोड़ने की पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत हजारों किसानों को नई तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे अपने खेतों में इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।