कृषि में बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल, 528 करोड़ किसानों तक पहुँची मौसम आधारित सलाह
Gaon Connection | Jul 25, 2026, 13:05 IST
कृषि क्षेत्र में सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर रही है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली में एआई की सहायता से कीटों की पहचान करना संभव हो गया है। साथ ही, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग किसानों को मौसम संबंधी जानकारी और सलाह प्रदान कर रहा है। भारत विस्तार प्लेटफॉर्म किसानों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं तक पहुँच दे रहा है, जो कृषि को आधुनिक करने में सहायक है।
डिजिटल तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर
खेती में नई तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और अब एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) भी कृषि क्षेत्र का हिस्सा बनती जा रही है। किसानों को समय पर मौसम की जानकारी, फसलों में लगने वाले कीटों की पहचान, सरकारी योजनाओं तक पहुँच और कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न एआई आधारित पहल चला रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने संसद में दी गई जानकारी में बताया है कि डिजिटल कृषि मिशन के तहत राज्यों को एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन , इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी आधिनिक तकनीकों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सहायता दी जा रही है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों तक सही समय पर सही जानकारी पहुँचाना आसान हो रहा है। इसी उद्देश्य से मौसम पूर्वानुमान, कीट एवं रोग प्रबंधन, सरकारी योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली में एआई मशीन लर्निंग का उपयोग किया जा रहा है। यह प्रणाली फसलों में कीटों के प्रकोप का समय रहते पता लगाने में मदद करती है, जिससे फसल नुकसान कम करने के लिए समय पर कदम उठाए जा सकें। सरकार ने बताया कि वर्तमान में 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ता इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इसके माध्यम से किसान कीटों की तस्वीर लेकर उनकी पहचान करा सकते हैं। फिलहाल यह प्रणाली 73 फसलों और 436 प्रकार के कीटों की निगरानी में सहायता प्रदान कर रही है।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग किसानों के लिए एआई आधारित मानसून और मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध करा रहा है। इन सलाहों के आधार पर किसान स्थानीय मौसम को ध्यान में रखते हुए खेती से जुड़े निर्णय ले सकते हैं। सरकार ने संसद में बताया कि इस पहल का लाभ अब तक लगभग 5.28 करोड़ किसानों तक पहुँच चुका है। मौसम आधारित सलाह किसानों को बुवाई, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद करती है।
कृषि मंत्रालय ने बताया कि भारत विस्तार एक बहुभाषी एआई आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है। यह प्लेटफॉर्म किसानों को वास्तविक समय और स्थान आधारित कृषि सलाह के साथ सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराता है। सरकार के अनुसार, अब तक इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 3 लाख से अधिक किसानों को सेवाएँ दी जा चुकी हैं, जबकि 72 लाख से अधिक कृषि संबंधी प्रश्नों का समाधान किया गया है। यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार की 18 योजनाओं से जुड़ी जानकारी, फसल एवं पशुधन संबंधी सलाह, मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव, कीट एवं रोग पहचान, मृदा स्वास्थ्य संबंधी सुझाव और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
मंत्रालय के अनुसार, भारत विस्तार प्लेटफॉर्म वेब पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन, एआई चैटबॉट और समर्पित टेलीफोन सेवा के माध्यम से उपलब्ध है। टेलीफोन सेवा फिलहाल हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, जबकि चैटबॉट, वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप 10 भाषाओं में किसानों के लिए सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र में एआई आधारित तकनीकों के प्रभाव का आकलन करने के लिए अभी तक कोई अलग व्यापक मूल्यांकन नहीं किया गया है। हालांकि डिजिटल कृषि मिशन के तहत इन तकनीकों का उपयोग किसान परामर्श, फसल पहचान, कीट नियंत्रण, बीमा, योजना लाभ वितरण और प्रशासनिक विश्लेषण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों तक समय पर जानकारी और सेवाएँ पहुँचाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है, ताकि कृषि क्षेत्र को आधुनिक और अधिक दक्ष बनाया जा सके।
सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों तक सही समय पर सही जानकारी पहुँचाना आसान हो रहा है। इसी उद्देश्य से मौसम पूर्वानुमान, कीट एवं रोग प्रबंधन, सरकारी योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है।