देश में अब तक 13% कम हुई बारिश, सितंबर तक और बढ़ सकती है कमी; 45% से ज्यादा तहसीलों में सामान्य से कम वर्षा
Gaon Connection | Aug 18, 2026, 13:05 IST
मानसून के अगस्त अंत तक कमज़ोर होने की आशंका है जिसमें अल नीनो का असर भी शामिल है। देश में बारिश की कमी सामान्य से 13 प्रतिशत है, जो और बढ़ सकती है। खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी 27 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जहां खरीफ फसलों की बुवाई में कुछ सुधार हुआ है, वहीं धान और अन्य अनाज की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
सितंबर तक बारिश का घाटा बढ़ने की चेतावनी
भारत में मानसूनी बारिश की कमी आने वाले हफ्तों में और बढ़ सकती है। यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के अनुमान के मुताबिक, अगस्त के अंत तक मौजूदा बारिश का दौर कमजोर पड़ सकता है और सितंबर में अल नीनो का असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर और बढ़ने की संभावना है। 16 अगस्त तक देश में बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम है और सितंबर तक यह कमी और बढ़ सकती है। ऐसे संकेतों के बीच इस साल के मानसून का सबसे अच्छा दौर बीतने की आशंका जताई गई है।
ECMWF के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी सितंबर के मध्य के आसपास शुरू हो सकती है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने भी दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपना अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 85 प्रतिशत कर दिया है। सोमवार को स्काईमेट ने इस साल सूखे की 70 प्रतिशत संभावना जताई। हालांकि, अगस्त के बाकी दिनों में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में कुछ अच्छी बारिश हो सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, देश के इन हिस्सों में अभी भी बारिश की बेहतर संभावना बनी हुई है।
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। दक्षिणी प्रायद्वीप में 21 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 12 प्रतिशत की कमी है। इसके मुकाबले मध्य भारत की स्थिति बेहतर है और यहां बारिश में सिर्फ 1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
मौसम संबंधी उपखंडों में अरुणाचल प्रदेश में बारिश की कमी सबसे अधिक 39 प्रतिशत है। असम और मेघालय में भी 38-38 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पंजाब और तटीय आंध्र प्रदेश में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि रायलसीमा में यह कमी 35 प्रतिशत है। सरकार के सूखा निगरानी पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल 6,363 तहसीलों में से 45 प्रतिशत से अधिक में इस मानसून अब तक बारिश सामान्य से कम रही है।
अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) की क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने पिछले सप्ताह कहा था कि अल नीनो मजबूत हो रहा है। केंद्र ने उत्तरी गोलार्ध की 2026-27 की शरद और सर्दियों की अवधि में बेहद मजबूत अल नीनो बनने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक बताई है। बारिश की कमी का यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब IMD ने सोमवार को कोलकाता के पास एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की जानकारी दी। इसके चलते पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में मानसून अभी सक्रिय बना हुआ है। IMD के मुताबिक, अगस्त के बाकी हिस्से में भी सार्थक बारिश की सबसे अच्छी संभावना इन्हीं क्षेत्रों में है।
देश के बड़े हिस्से में मानसून अब कमजोर दौर में प्रवेश कर सकता है। हालांकि, अगस्त खत्म होने से पहले बंगाल की खाड़ी में कम से कम एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना बनी हुई है, जिससे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बारिश का एक और दौर आ सकता है।
कम बारिश के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई में पिछले कुछ हफ्तों में काफी सुधार हुआ है। 14 अगस्त को समाप्त सप्ताह तक कुल खरीफ बुवाई में कमी घटकर 1 प्रतिशत से भी कम रह गई है। 5 जुलाई को यही कमी 21 प्रतिशत थी। अब देश में खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 1,000 लाख हेक्टेयर का आंकड़ा पार कर चुका है।
हालांकि, धान और पोषक अनाज की बुवाई अभी भी पिछले साल से पीछे है। धान का रकबा सामान्य अवधि की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम है, जबकि पोषक अनाज की बुवाई में 2.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस तरह खरीफ बुवाई का कुल अंतर काफी कम हुआ है, लेकिन बारिश की क्षेत्रीय कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और कुछ उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सितंबर तक कमजोर मानसून रहने पर फसलों की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
ECMWF के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी सितंबर के मध्य के आसपास शुरू हो सकती है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने भी दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपना अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 85 प्रतिशत कर दिया है। सोमवार को स्काईमेट ने इस साल सूखे की 70 प्रतिशत संभावना जताई। हालांकि, अगस्त के बाकी दिनों में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में कुछ अच्छी बारिश हो सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, देश के इन हिस्सों में अभी भी बारिश की बेहतर संभावना बनी हुई है।
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी सबसे ज्यादा
मौसम संबंधी उपखंडों में अरुणाचल प्रदेश में बारिश की कमी सबसे अधिक 39 प्रतिशत है। असम और मेघालय में भी 38-38 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पंजाब और तटीय आंध्र प्रदेश में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि रायलसीमा में यह कमी 35 प्रतिशत है। सरकार के सूखा निगरानी पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल 6,363 तहसीलों में से 45 प्रतिशत से अधिक में इस मानसून अब तक बारिश सामान्य से कम रही है।
अल नीनो मजबूत हुआ तो सितंबर में और कमजोर हो सकता है मानसून
देश के बड़े हिस्से में मानसून अब कमजोर दौर में प्रवेश कर सकता है। हालांकि, अगस्त खत्म होने से पहले बंगाल की खाड़ी में कम से कम एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना बनी हुई है, जिससे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बारिश का एक और दौर आ सकता है।
बारिश की कमी के बावजूद खरीफ बुवाई में सुधार
हालांकि, धान और पोषक अनाज की बुवाई अभी भी पिछले साल से पीछे है। धान का रकबा सामान्य अवधि की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम है, जबकि पोषक अनाज की बुवाई में 2.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस तरह खरीफ बुवाई का कुल अंतर काफी कम हुआ है, लेकिन बारिश की क्षेत्रीय कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और कुछ उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सितंबर तक कमजोर मानसून रहने पर फसलों की स्थिति पर असर पड़ सकता है।