अल नीनो पर सस्पेंस: कब आएगा, कमजोर रहेगा या बनेगा ‘खतरनाक’? ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने दिया बड़ा संकेत

Gaon Connection | Apr 30, 2026, 13:25 IST
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अल नीनो के आने की आहट सुनाई दे रही है। इसकी ताकत और समय को लेकर अभी अनिश्चितता है। प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ रहा है, जो अल नीनो के संकेत दे रहा है। यह स्थिति बारिश और गर्मी दोनों को प्रभावित कर सकती है। हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) और अन्य जलवायु संकेतक भी बदल रहे हैं।
मौसम में बड़ा उलटफेर!
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इस साल बनने वाले अल नीनो की ताकत को लेकर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) के मुताबिक, मॉडल्स के अनुमान कमजोर से मध्यम स्तर के अल नीनो से लेकर बेहद मजबूत अल नीनो तक के संकेत दे रहे हैं। यह स्थिति मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर (Niño3.4 इंडेक्स) में तापमान बढ़ोतरी के स्तर पर निर्भर करेगी।

कब बनेगा अल नीनो, समय को लेकर भी मतभेद

BoM के अनुसार, ज्यादातर मॉडल्स इस बात पर सहमत हैं कि आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ेगा और साल के अंत तक अल नीनो की स्थिति बन सकती है। हालांकि, इसके बनने के समय को लेकर मतभेद हैं। कुछ मॉडल्स मई में ही इसकी शुरुआत का संकेत देते हैं, जबकि अन्य के अनुसार यह प्रक्रिया धीमी हो सकती है और जुलाई तक जाकर अल नीनो की स्थिति बनेगी।

समुद्र का तापमान बढ़ा, बारिश और गर्मी दोनों पर असर संभव

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया के आसपास समुद्र का तापमान मिला-जुला है, लेकिन भविष्य में समुद्र के और गर्म होने के संकेत हैं। मई से जुलाई के बीच समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है, खासकर तस्मान सागर में। गर्म समुद्री पानी बारिश के लिए अधिक नमी और ऊर्जा उपलब्ध कराता है, जिससे भारी बारिश की संभावना बढ़ सकती है।

ENSO फिलहाल न्यूट्रल, लेकिन तेजी से बदल रहे संकेत

रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल एल नीनो-सदर्न ऑस्सिलेशन (ENSO) न्यूट्रल स्थिति में है। 26 अप्रैल 2026 को Niño-3.4 इंडेक्स 0.23°C दर्ज किया गया, जो न्यूट्रल रेंज (−0.80 से +0.80°C) में आता है। हालांकि पिछले दो हफ्तों में इसमें 0.5°C की तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जो आगे और गर्मी बढ़ने का संकेत देती है। साथ ही वायुमंडलीय संकेतक जैसे ट्रेड विंड, दबाव और बादलों का पैटर्न अभी भी न्यूट्रल स्थिति को दर्शा रहे हैं।

IOD और अन्य जलवायु संकेतक भी अनिश्चित, असर बढ़ सकता है

हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) फिलहाल न्यूट्रल है और इसका इंडेक्स +0.09°C दर्ज किया गया है। हालांकि मॉडल्स के अनुसार सर्दियों और बसंत के दौरान यह पॉजिटिव हो सकता है, जिससे मौसम पर असर पड़ सकता है। वहीं सदर्न ऑस्सिलेशन इंडेक्स (SOI) का 30 दिन का मान −10.6 है, जो अल नीनो की दिशा में बदलाव का संकेत देता है। इसके अलावा मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO) के भी सक्रिय होने की संभावना है, जिससे प्रशांत महासागर में और गर्मी बढ़ सकती है।

अल नीनो का असर तय नहीं, कई कारकों पर निर्भर

BoM ने स्पष्ट किया है कि Niño3.4 क्षेत्र में मजबूत संकेत होने का मतलब यह नहीं है कि असर भी उतना ही मजबूत होगा। ENSO कई कारकों में से सिर्फ एक है, जो मौसम को प्रभावित करता है। इसलिए अल नीनो के असर की तीव्रता अभी तय नहीं है और आने वाले महीनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।
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