UP NEWS: अल नीनो के ख़तरे के बीच खाद्यान्न सुरक्षा पर फोकस, गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण का प्लान, मंडी शुल्क में मिल सकती है राहत
Gaon Connection | May 20, 2026, 19:16 IST
उत्तर प्रदेश सरकार गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और मंडी व्यवस्था में सुधार की दिशा में नई रणनीति पर काम कर रही है। मंडियों को आधुनिक और बेहतर सुविधाओं से लैस बनाने के साथ-साथ राज्य के भीतर गेहूं प्रसंस्करण को प्रोत्साहन देने के लिए मंडी शुल्क में राहत पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे खाद्य उद्योग, रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
यूपी में गेहूं प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा, मंडी शुल्क में छूट पर विचार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों, उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और बेहतर प्रबंधन वाला बनाने के निर्देश देते हुए खाद्यान्न सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने अल नीनो के संभावित प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आगामी वर्षों में फसलों पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए प्रदेश को खाद्यान्न सुरक्षा के लिए अभी से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के खाद्यान्न भंडार पर्याप्त और मजबूत होने चाहिए।
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 372 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है, जबकि कुल उपलब्धता 407 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचती है। प्रदेश में लगभग 2.88 करोड़ किसान गेहूं उत्पादन से जुड़े हैं।
बैठक में बताया गया कि सीमित प्रसंस्करण क्षमता के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं कच्चे अनाज के रूप में दूसरे राज्यों में चला जाता है, जिससे मूल्य संवर्धन, जीएसटी राजस्व और रोजगार के अवसर प्रदेश से बाहर चले जाते हैं।
प्रदेश में 559 रोलर फ्लोर मिल्स हैं, जिनकी कुल मिलिंग क्षमता 218.4 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन वास्तविक उपयोग केवल 126.45 लाख मीट्रिक टन तक सीमित है। इसके अलावा 40 हजार से अधिक आटा चक्कियां भी संचालित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि राज्य के भीतर गेहूं प्रसंस्करण को बढ़ावा मिले तो रोजगार, बिजली खपत, जीएसटी संग्रह और खाद्य उद्योगों में बड़ा विस्तार हो सकता है। समिति ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश में पंजीकृत मिलों द्वारा राज्य के भीतर प्रसंस्करण हेतु खरीदे गए गेहूं पर मंडी शुल्क एवं विकास उपकर में छूट दी जाए, हालांकि व्यापारिक गतिविधियों पर यह छूट लागू नहीं होगी।
मंडियों के आधुनिकीकरण पर जोर
खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर सतर्कता
यूपी देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य
सीमित प्रसंस्करण क्षमता बनी चुनौती
प्रदेश में 559 रोलर फ्लोर मिल्स हैं, जिनकी कुल मिलिंग क्षमता 218.4 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन वास्तविक उपयोग केवल 126.45 लाख मीट्रिक टन तक सीमित है। इसके अलावा 40 हजार से अधिक आटा चक्कियां भी संचालित हैं।