अल नीनो से निपटने की तैयारी तेज़, हर हफ़्ते होगी समीक्षा बैठक; कपास और दलहन उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर
Gaon Connection | Jun 16, 2026, 15:46 IST
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ़ 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अल नीनो से निपटने के लिए साप्ताहिक बैठकें करने के निर्देश दिए। कम वर्षा वाले जिलों के लिए विशेष कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा। बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरकों की उपलब्धता और किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुँचाने पर भी ज़ोर दिया गया।
अल नीनो के जोखिम वाले जिलों के लिए बनेगा विशेष प्लान
खरीफ़ सीज़न 2026 की तैयारियों और संभावित अल नीनो के असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र की निगरानी और तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कम बारिश और वर्षा असमानता की आशंका वाले जिलों के लिए पहले से ठोस रणनीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी।
बैठक में अल नीनो की संभावित स्थिति, खरीफ़ फसलों की बुआई, उर्वरकों की उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों में जल भंडारण और राज्यवार कृषि तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अल नीनो की स्थिति पर लगातार नज़र रखी जाएगी और इसकी समीक्षा के लिए हर हफ़्ते बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में कम बारिश या वर्षा में असमानता की आशंका है उनकी पहचान कर फसलवार कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि पानी संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतरफसली खेती (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने जैसी रणनीतियाँ ज़मीनी स्तर पर लागू की जाएँ, ताकि किसानों को मौसम की मार से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिन 9 से 10 राज्यों में अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है, वहाँ जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और विस्तार तंत्र के साथ विशेष बैठकें आयोजित की जाएँ। इन बैठकों के माध्यम से किसानों को समय रहते सलाह और सुरक्षित फसल विकल्पों की जानकारी दी जाएगी।
बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिक खेती, उन्नत किस्मों के उपयोग, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतरफसली खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन उपायों के ज़रिए कपास की उत्पादकता और किसानों की आय दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।
केंद्र सरकार ने दलहन उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रयास तेज़ करने का फैसला किया है। बैठक में अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों के उत्पादन विस्तार पर चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों के सहयोग से बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और फसल चक्र को बढ़ावा देकर देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
समीक्षा बैठक के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और राज्यवार स्टॉक की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और मानसून की प्रगति के साथ राज्यों तथा जिलों तक आपूर्ति को और मज़बूत किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहाँ भी कमी की आशंका दिखाई दे, वहाँ पहले से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी तभी उपयोगी है जब वह समय पर खेत तक पहुँचे और किसान उसे अपनाकर लाभ उठा सके। उन्होंने अधिकारियों से सतत संवाद, नियमित समीक्षा और ज़मीनी फीडबैक के आधार पर खरीफ़ 2026 को सफल बनाने की अपील की।
बैठक में अल नीनो की संभावित स्थिति, खरीफ़ फसलों की बुआई, उर्वरकों की उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों में जल भंडारण और राज्यवार कृषि तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अल नीनो की स्थिति पर लगातार नज़र रखी जाएगी और इसकी समीक्षा के लिए हर हफ़्ते बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।