खरीफ फसलों को अल नीनो से खतरा! फिर भी दालों की नहीं होगी कमी; सरकार ने पहले ही कर ली है ये बड़ी तैयारी
Gaon Connection | Jun 04, 2026, 17:00 IST
अल नीनो की संभावित चुनौती और मानसून को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत तैयारी की है। सरकार का कहना है कि यदि खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ता है या बाजार में आपूर्ति बाधित होती है, तो बफर स्टॉक का उपयोग कर कीमतों को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।
क्या अल नीनो बढ़ाएगा दालों के दाम
अल नीनो की आशंका और मानसून को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अहम तैयारी की है। सरकार का कहना है कि किसी भी संभावित आपूर्ति संकट या कीमतों में उछाल की स्थिति से निपटने के लिए उसके पास पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने गुरुवार को कहा कि यदि अल नीनो का असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ता है तो सरकार के पास मौजूद दालों का बफर स्टॉक बाजार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस स्टॉक को जारी करने की जरूरत नहीं है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के पास इस समय 43 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है। यह मई 2025 के 18 लाख टन और मई 2024 के 21 लाख टन की तुलना में काफी अधिक है। दालों के भंडार में यह वृद्धि केंद्र की सुनिश्चित खरीद नीति का परिणाम मानी जा रही है।
सरकार ने किसानों से दालों की खरीद बढ़ाने के लिए सुनिश्चित खरीद नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और उपभोक्ताओं को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाना है। इसी नीति के चलते पिछले कुछ वर्षों में दालों का सरकारी भंडार तेजी से बढ़ा है।
निधि खरे ने कहा कि दालें जल्दी खराब होने वाली वस्तु नहीं हैं और इन्हें दो से तीन वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में रिकॉर्ड स्तर के बफर स्टॉक के भंडारण और उपयोग को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जून से सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना जताई है। विभाग ने आने वाले महीनों में अल नीनो विकसित होने की आशंका भी व्यक्त की है। अल नीनो का असर पड़ने पर वर्षा प्रभावित हो सकती है, जिससे खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
संभावित स्थिति को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने भी खरीफ फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार करनी शुरू कर दी हैं। सरकार का मानना है कि दालों का रिकॉर्ड बफर स्टॉक किसी भी संभावित संकट के दौरान उपभोक्ताओं और बाजार दोनों के लिए राहत का काम करेगा।