12 घंटे तक उल्टियाँ फिर भारत के गाँव के सरकारी अस्पताल में पहुँचा अमेरिकी पर्यटक, मुफ्त इलाज पाकर रहा हैरान, कही ये बात

Mansi | Aug 18, 2026, 18:50 IST
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अमेरिकी फिल्म निर्देशक माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान अचानक से तबीयत खराब हो गई। उन्हें तत्काल एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनको उचित देखभाल समय पर मिली। माइक ने बताया कि यदि यह स्थिति अमेरिका में होती, तो इलाज की लागत हजारों डॉलर तक पहुंच सकती थी। यह अनुभव भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।

माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ गई<br>
माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ गई
भारत घूमने आए अमेरिकी फिल्ममेकर माइक नून की ओडिशा यात्रा का एक अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है। घूमने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहाँ एक तरफ वह अस्पताल की सुविधाओं और भाषा से बिल्कुल अनजान थे, वहीं दूसरी तरफ उन्हें समय पर इलाज मिला। ठीक होने के बाद उन्होंने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया और भारत में इलाज की लागत की तुलना अमेरिका से की।

माइक के मुताबिक़, भारत आने के महज़ पाँचवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ी। करीब 12 घंटे तक उन्हें लगातार उल्टियाँ होती रहीं और एक समय ऐसा आया जब लगभग हर 15 मिनट में उल्टी हो रही थी। इसके बाद उन्हें ओडिशा के एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उन्हें आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने की दवा और इंजेक्शन दिए गए। इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से वीडियो बनाकर अपनी स्थिति के बारे में बताया।

गाँव के अस्पताल तक कैसे पहुँचा अमेरिकी पर्यटक?

माइक ने बताया कि वह जिस अस्पताल में पहुँचे, वह ग्रामीण इलाक़े में था और वहाँ लिखी भाषा तक उनके लिए समझना मुश्किल थी। इसके बावजूद उन्हें इलाज मिला और उनकी हालत में सुधार हुआ। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि उनकी तबीयत खराब होने की वजह फूड पॉइज़निंग नहीं थी। उनके मुताबिक़, उन्हें स्थानीय खाना इतना पसंद आया कि उन्होंने जरूरत से ज़्यादा खा लिया। इसके बाद उन्हें उल्टी और दूसरी परेशानियां शुरू हो गईं।

यह अनुभव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आम तौर पर ग्रामीण सरकारी अस्पतालों को लेकर चर्चा स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य सुविधाओं और पहुँच के संदर्भ में होती है। इस मामले में एक विदेशी पर्यटक ने भी ऐसे ही अस्पताल में इलाज मिलने का अपना अनुभव सामने रखा।

इलाज के बाद अमेरिका के खर्च से की तुलना

माइक ने वीडियो में बताया कि भारत में इलाज मिलने के बाद उन्हें सबसे ज़्यादा हैरानी इसके खर्च को लेकर हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने वाली दवा और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा सुविधाओं पर उन्हें हज़ारों डॉलर तक खर्च करना पड़ सकता था। इसके उलट, उनके मुताबिक़ जिस ग्रामीण सरकारी अस्पताल में उनका इलाज हुआ, वहां उनसे इलाज के लिए कोई पैसा नहीं लिया गया। उन्होंने इस बात को अपने अंदाज़ में बताया और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना अमेरिका की महंगी चिकित्सा व्यवस्था से की।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव

माइक के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। कई यूज़र्स ने भारत में कम लागत वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ़ की। कुछ लोगों ने उन्हें ओडिशा में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया, तो कुछ ने बीमारी के बाद खान-पान को लेकर सलाह दी। हालांकि, इस एक अनुभव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर विदेशी नागरिक को भारत के हर सरकारी अस्पताल में हर तरह का इलाज मुफ़्त मिलता है। अस्पताल और इलाज के प्रकार के हिसाब से नियम और शुल्क अलग हो सकते हैं।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की भी दिखी एक तस्वीर

माइक का अनुभव केवल एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है। यह ग्रामीण भारत के सरकारी अस्पतालों की उस भूमिका की ओर भी ध्यान खींचता है, जहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता मिल सकती है।

ओडिशा में घूमने आए एक विदेशी पर्यटक का ग्रामीण अस्पताल तक पहुँचना और वहाँ इलाज पाना इस बात को सामने लाता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ ग्रामीण इलाक़ों में कितनी अहम भूमिका निभाती हैं। माइक के लिए यह यात्रा का एक अप्रत्याशित पड़ाव था, लेकिन उनके अनुभव ने सोशल मीडिया पर भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज की लागत को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
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