आंध्र प्रदेश में फसल बीमा को लेकर बड़ा बदलाव, गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी 1,263% बढ़ी; 42.44 लाख आवेदन आए

Mansi | Sept 02, 2026, 18:57 IST
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आंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान गैर-ऋणी किसानों की फसल बीमा में भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में आवेदन में 220% की वृद्धि देखी गई है। कुल 16.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ने बीमा कवरेज प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर बीमा कवरेज में यह वृद्धि हासिल हुई है, जिससे किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं से बचने के लिए वित्तीय सुरक्षा मिली है।

फसल को मौसम की मार से बचाने के लिए किसान बड़ी संख्या में बीमा कवरेज का सहारा ले रहे हैं<br>
फसल को मौसम की मार से बचाने के लिए किसान बड़ी संख्या में बीमा कवरेज का सहारा ले रहे हैं
मौसम की अनिश्चितता के बीच आंध्र प्रदेश के किसानों में फसल बीमा को लेकर इस खरीफ सीज़न में बड़ी दिलचस्पी देखने को मिली है। खास तौर पर उन किसानों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जिन्होंने खेती के लिए बैंक से कर्ज़ नहीं लिया है। खरीफ 2026 में गैर-ऋणी किसानों का बीमा पंजीकरण पिछले सीज़न के करीब 2 लाख से बढ़कर 25.26 लाख हो गया। यानी इस श्रेणी में करीब 1,263% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

राज्य कृषि विभाग के निदेशक मनाज़िर जीलानी सामून की ओर से 31 अगस्त तक के आंकड़े जारी किए गए हैं। इनके मुताबिक़, आंध्र प्रदेश में इस खरीफ सीज़न में कुल 23.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई है। इसमें 16.77 लाख हेक्टेयर, यानी वास्तविक बोए गए क्षेत्र का करीब 72%, फसल बीमा के दायरे में आया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की ओर से किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने और अधिक से अधिक क्षेत्र को बीमा सुरक्षा में लाने की अपील के बाद यह बढ़ोतरी हुई है।

बीमित क्षेत्र में 215% की बढ़ोतरी

खरीफ 2026 और पिछले खरीफ सीज़न की तुलना करें तो बीमा कवरेज में बड़ा बदलाव दिखाई देता है। 2025 में 7.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ था, जो 2026 में बढ़कर 16.88 लाख हेक्टेयर हो गया। यानी बीमित क्षेत्र में करीब 215 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मौसम की मार से फसल खराब होने पर किसान को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बीमा कवरेज बढ़ने से कम से कम उन किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा का रास्ता मजबूत होता है, जो योजना के तहत पात्र हैं और अपनी फसल का बीमा कराते हैं।

42.44 लाख आवेदन, पिछले साल से 220% ज्यादा

फसल बीमा के लिए किसानों के आवेदन भी इस बार काफी बढ़े हैं। खरीफ 2025 में जहां 19.50 लाख आवेदन मिले थे, वहीं खरीफ 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 42.44 लाख हो गई। यानी आवेदनों में करीब 220% की वृद्धि हुई। इनमें 32.06 लाख आवेदन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत और 10.37 लाख आवेदन पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के तहत आए। PMFBY में इस खरीफ सीज़न के लिए 15 फसलों को कवर किया गया था। इसका पंजीकरण 31 अगस्त को बंद हुआ। वहीं RWBCIS के तहत 7 फसलों को बीमा सुरक्षा दी गई और इसका पंजीकरण 15 अगस्त को समाप्त हो गया।

बीमा कराने वाले किसानों की संख्या भी दोगुने से ज्यादा

सिर्फ़ आवेदन ही नहीं, बीमा के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। खरीफ 2025 में करीब 7.57 लाख किसान बीमित थे। खरीफ 2026 में यह संख्या बढ़कर 15.95 लाख हो गई। यानी इसमें करीब 210% की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान ऋणी किसानों की संख्या में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ। पिछले खरीफ सीज़न में 17.49 लाख ऋणी किसान बीमा से जुड़े थे, जबकि इस बार यह संख्या 17.65 लाख रही। इसके उलट गैर-ऋणी किसानों की संख्या करीब 2 लाख से बढ़कर 25.26 लाख पहुंच गई। यही इस सीज़न के फसल बीमा आंकड़ों की सबसे बड़ी खासियत है।

धान में सबसे ज्यादा आवेदन

PMFBY के तहत धान किसानों की पसंद में सबसे आगे रहा। धान के लिए 21.46 लाख आवेदन मिले और करीब 3.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ। यह राज्य में धान के वास्तविक खेती क्षेत्र का करीब 37% है। इसके बाद अरहर का स्थान रहा। इसके लिए 4.94 लाख आवेदन आए और 3.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बीमा के दायरे में आया, जो वास्तविक क्षेत्र का 172% बताया गया है। लाल मिर्च के लिए 2.15 लाख आवेदन मिले और 1.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ। वहीं मक्का के लिए 1.83 लाख आवेदन आए और 66,962 हेक्टेयर क्षेत्र बीमित हुआ।

मौसम आधारित बीमा में मूंगफली आगे

RWBCIS के तहत मूंगफली सबसे आगे रही। इसके लिए 5.89 लाख आवेदन मिले और 3.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बीमा के तहत आया। यह वास्तविक खेती क्षेत्र का 259% बताया गया है। इसके बाद कपास रहा। कपास के लिए 3.62 लाख आवेदन मिले और करीब 2.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बीमा सुरक्षा मिली, जो वास्तविक खेती क्षेत्र का 54% है।

गैर-ऋणी किसानों की बढ़ी भागीदारी क्यों अहम?

फसल बीमा में गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी बढ़ना इसलिए अहम है क्योंकि ऐसे किसान अपनी फसल का बीमा स्वेच्छा से कराते हैं। यानी इस बार बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी बीमा व्यवस्था से जुड़े हैं, जो बैंक ऋण लेने की वजह से स्वतः इस प्रक्रिया में नहीं आते। कृषि विभाग के निदेशक मनाज़िर जीलानी सामून ने इस बढ़ोतरी का श्रेय सरकार के जागरूकता अभियान और ज़मीनी स्तर पर प्रशासन की सक्रियता को दिया है। विभाग का कहना है कि किसानों को मौसम से जुड़े जोखिमों और फसल बीमा के फायदे समझाने पर अधिक किसान योजना से जुड़ने के लिए आगे आए।

मौसम के जोखिम के बीच बढ़ी बीमा की अहमियत

आंध्र प्रदेश में खेती करने वाले किसानों के लिए बारिश, सूखा और मौसम में अचानक बदलाव जैसे जोखिम हमेशा बड़ी चुनौती रहे हैं। इस साल एल नीनो के संभावित असर को देखते हुए भी फसल सुरक्षा पर जोर दिया गया है। ऐसे में बीमा कवरेज बढ़ने से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा का एक अतिरिक्त सहारा मिल सकता है। हालांकि, बीमा में पंजीकरण बढ़ना अपने आप में मुआवज़े की गारंटी नहीं है। नुकसान की स्थिति में संबंधित योजना के नियमों, अधिसूचित फसल और क्षेत्र, नुकसान के आकलन तथा अन्य निर्धारित शर्तों के आधार पर दावा तय होता है।

खरीफ 2026 में आंध्र प्रदेश ने फसल बीमा के मामले में पिछले साल के मुकाबले बड़ा विस्तार देखा है। 42.44 लाख आवेदन, 15.95 लाख बीमित किसान और गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी में 1,263% की छलांग इस बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर पेश करती है। अब फसल सीज़न के दौरान मौसम कैसा रहता है और वास्तविक नुकसान की स्थिति में बीमा व्यवस्था किसानों तक कितनी प्रभावी ढंग से मदद पहुंचाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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