ब्लू इकोनॉमी पर बड़ा फोकस, आंध्र प्रदेश में बनेगा एक्वा कॉरिडोर, 28 हज़ार करोड़ के कारोबार को मिलेगा बूस्ट
Gaon Connection | Jun 06, 2026, 12:10 IST
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती से नेल्लोर तक एक्वा कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य जलीय कृषि, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार "आंध्र श्रिम्प, इंडिया सीफूड" ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की भी तैयारी कर रही है।
सीफूड एक्सपोर्ट हब बनेगा आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र को नई गति देने के लिए एक बड़े एक्वा कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की है। यह कॉरिडोर अमरावती, भीमावरम, काकीनाडा, विशाखापट्टनम, कृष्णापट्टनम और नेल्लोर को जोड़ेगा तथा समुद्री खाद्य उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देगा। विशाखापट्टनम में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जलीय कृषि क्षेत्र के विकास के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे, तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य संवर्धन का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगी। दो दिवसीय इस कार्यशाला का आयोजन मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से आंध्र प्रदेश सरकार की भागीदारी में किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित एक्वा कॉरिडोर अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, नवाचार केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने "आंध्र श्रिम्प, इंडिया सीफूड" ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की भी घोषणा की और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
नायडू ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में **ब्लू इकोनॉमी** महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मत्स्य क्षेत्र की बड़ी भागीदारी होगी। उन्होंने "पॉन्ड टू पोर्ट", "फार्मर टू ग्लोबल कंज्यूमर" और "ब्लू इकोनॉमी टू विकसित भारत" की अवधारणाओं पर काम करने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के पास 1,053 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा है और बंदरगाहों व हवाई अड्डों की उपलब्धता राज्य को समुद्री खाद्य निर्यात के लिए विशेष बढ़त देती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आंध्र प्रदेश देश के कुल मछली उत्पादन में 28 प्रतिशत और झींगा उत्पादन में 66 प्रतिशत योगदान देता है। वहीं देश की कुल समुद्री खाद्य निर्यात आय में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है। राज्य से हर साल 28,000 करोड़ रुपये से अधिक का समुद्री खाद्य निर्यात होता है।
नायडू ने केंद्र सरकार से आंध्र प्रदेश में मत्स्य मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का आग्रह किया और इसके लिए 15 दिनों के भीतर भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इस पर केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भूमि उपलब्ध होते ही एक महीने के भीतर परियोजना का शिलान्यास कर दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत काकीनाडा में 72.42 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाह को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि यह बंदरगाह 400 से अधिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं को ठहरने की सुविधा देगा, बड़ी मात्रा में मछली उतराई को संभालेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि सरकार भारत को गुणवत्ता, टिकाऊ उत्पादन और मूल्य संवर्धन वाले समुद्री उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना चाहती है। वहीं केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने समुद्री खाद्य निर्यात को गति देने के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित एक्वा कॉरिडोर अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, नवाचार केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने "आंध्र श्रिम्प, इंडिया सीफूड" ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की भी घोषणा की और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
ब्लू इकोनॉमी बनेगी विकास की नई ताकत
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के पास 1,053 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा है और बंदरगाहों व हवाई अड्डों की उपलब्धता राज्य को समुद्री खाद्य निर्यात के लिए विशेष बढ़त देती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आंध्र प्रदेश देश के कुल मछली उत्पादन में 28 प्रतिशत और झींगा उत्पादन में 66 प्रतिशत योगदान देता है। वहीं देश की कुल समुद्री खाद्य निर्यात आय में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है। राज्य से हर साल 28,000 करोड़ रुपये से अधिक का समुद्री खाद्य निर्यात होता है।