Assam Flood: बाढ़ से मकान-दुकान, गाड़ियाँ सब तबाह; अब मदद का इंतज़ार, मलबे में अपनी दुनिया तलाश रहे नेपालकुटी के लोग
Gaon Connection | Jul 31, 2026, 16:50 IST
असम में बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी गोलाघाट ज़िले के नेपालकुटी गाँव में तबाही के निशान साफ़ दिखाई दे रहे हैं। गाँव कनेक्शन की टीम ने पाया कि घर, दुकानें और वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि कई परिवारों के आधार, पैन, ज़मीन के कागज़ और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ भी बह गए या ख़राब हो गए। पशुओं के शवों से बदबू और बीमारी का डर बना हुआ है। लोग कीचड़ हटाकर अपनी ज़िंदगी और रोज़गार को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
Assam Flood Ground Report
असम में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन अपने पीछे वह ऐसी तबाही छोड़ गया है जिसे मिटने में अभी लंबा समय लगेगा। राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है, जबकि प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 2.12 लाख रह गई है। गाँव कनेक्शन की टीम जब गोलाघाट ज़िले के नेपालकुटी गाँव पहुँची तो वहाँ पानी की जगह चारों ओर मोटी कीचड़, टूटी ज़िंदगियाँ और बिखरा सामान दिखाई दिया। नेपालकुटी गाँव में बाढ़ का दर्द सिर्फ़ टूटे घरों और कीचड़ तक सीमित नहीं है। बाढ़ के दौरान कई लोगों ने अपनों को खो दिया। पानी उतरने के बाद कई इलाक़ों से शव मिलने की घटनाओं ने पूरे गाँव को सदमे में डाल दिया। जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया, उनके लिए बाढ़ का ख़ौफ़ अभी भी ख़त्म नहीं हुआ है। लोग राहत का इंतज़ार करने के बजाय अपने हाथों से घर, दुकान और रोज़गार को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटे हैं।
गाँव की गलियों में अभी भी कीचड़ भरा है। कई जगह सड़कें टूट चुकी हैं और भारी वाहन मुश्किल से अंदर पहुँच पा रहे हैं। कुछ लोग ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से रास्ते साफ़ करा रहे हैं, तो कहीं परिवार अपने सामान को गाड़ियों में भरकर सुरक्षित जगह ले जाते नज़र आए। जिन घरों और दुकानों में कुछ दिन पहले तक रोज़मर्रा की ज़िंदगी चल रही थी, वहाँ अब दीवारों पर बाढ़ का निशान और फ़र्श पर जमी मोटी गाद दिखाई देती है।
बाढ़ का पानी तो उतर गया, लेकिन अपने पीछे कीचड़ के साथ पशुओं के शव भी छोड़ गया है। कई जगहों से उठती बदबू ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लोग दिनभर घरों से गाद निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें इस बात का भी डर सता रहा है कि कहीं गंदगी और सड़ते पशुओं के शवों से कोई बीमारी न फैल जाए। अब उनके सामने सिर्फ़ घर दोबारा बसाने की नहीं, बल्कि परिवार को सुरक्षित रखने की भी चुनौती है।
नेपालकुटी गाँव में कई परिवार अपने घरों और दुकानों से कीचड़ निकालने में लगे हैं। कई व्यक्ति बाल्टियों से गाद बाहर फेंकते दिखाई दिए, जबकि दूसरे स्थान पर लोग फावड़े और मशीनों की मदद से रास्ता और आसपास का इलाक़ा साफ़ कर रहे हैं। कई कमरों के भीतर अब भी मोटी परत में कीचड़ जमा है। अलमारियों और सामान पर मिट्टी चिपकी हुई है और लोगों की पहली कोशिश यही है कि किसी तरह रहने लायक माहौल फिर से तैयार हो सके।
नेपालकुटी गाँव में बाढ़ का पानी सिर्फ़ घर और सामान ही नहीं बहाकर ले गया, बल्कि लोगों की पहचान और भविष्य से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ भी अपने साथ ले गया। कई परिवारों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, ज़मीन के कागज़, बैंक पासबुक और दूसरे अहम दस्तावेज़ पानी में बह गए या कीचड़ में ख़राब हो गए। अब लोगों को सिर्फ़ घर दोबारा बसाने की ही नहीं, बल्कि यह चिंता भी सता रही है कि इन दस्तावेज़ों के बिना उन्हें सरकारी मुआवज़ा और दूसरी राहत योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा। कई परिवारों का कहना है कि उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ़ तबाही से उबरना नहीं, बल्कि अपनी पहचान और ज़रूरी कागज़ात दोबारा बनवाना भी है।
गाँव में कई छोटी दुकानें बाढ़ के पानी और कीचड़ से भर गईं। एक दुकानदार अपनी दुकान के दरवाज़े पर खड़ा अंदर फैली गाद और बिखरे सामान को देख रहा है। दुकान के भीतर रखे सामान, फ़र्श और दीवारों पर बाढ़ का असर साफ़ दिखाई देता है। गाँव के लोगों के लिए रोज़गार की शुरुआत अब सफ़ाई से हो रही है, क्योंकि कारोबार दोबारा शुरू करने से पहले पूरी दुकान को फिर से व्यवस्थित करना होगा।
नेपालकुटी गाँव में बाढ़ ने सिर्फ़ घरों को ही नहीं, बल्कि लोगों की गाड़ियों को भी बुरी तरह तबाह कर दिया है। कई कारें और अन्य वाहन कीचड़ में धँसे हुए हैं, जबकि कुछ बाढ़ के तेज़ बहाव में क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगह वाहनों के भीतर तक कीचड़ भर गया है। जिन गाड़ियों पर लोग रोज़मर्रा के काम और रोज़गार के लिए निर्भर थे, वे अब कबाड़ जैसी हालत में खड़ी हैं। गाँव में चारों ओर बिखरी तबाही यह बताती है कि बाढ़ का पानी अपने साथ लोगों की वर्षों की मेहनत और जमा-पूँजी भी बहा ले गया।
गाँव में कई जगह राहत सामग्री पहुँचती दिखाई दी। लोग वाहनों के आसपास इकट्ठा होकर ज़रूरी सामान लेते नज़र आए। वहीं दूसरी ओर जेसीबी मशीनें और अन्य वाहन रास्ते खोलने और मलबा हटाने में लगे हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती कीचड़ हटाने, टूटे रास्तों को दुरुस्त करने और सामान्य जीवन को पटरी पर लाने की है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 80 हो गई है और प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 2.12 लाख रह गई है। लेकिन नेपालकुटी गाँव की तस्वीरें बताती हैं कि पानी उतरने के बाद भी लोगों का संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ है। घरों की सफ़ाई, दुकानें फिर से खड़ी करना, रास्ते दुरुस्त करना और रोज़गार की शुरुआत करना, यही अब इस गाँव के लोगों की सबसे बड़ी चुनौती है।
गाँव की गलियों में अभी भी कीचड़ भरा है। कई जगह सड़कें टूट चुकी हैं और भारी वाहन मुश्किल से अंदर पहुँच पा रहे हैं। कुछ लोग ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से रास्ते साफ़ करा रहे हैं, तो कहीं परिवार अपने सामान को गाड़ियों में भरकर सुरक्षित जगह ले जाते नज़र आए। जिन घरों और दुकानों में कुछ दिन पहले तक रोज़मर्रा की ज़िंदगी चल रही थी, वहाँ अब दीवारों पर बाढ़ का निशान और फ़र्श पर जमी मोटी गाद दिखाई देती है।
कीचड़ हटाते-हटाते बीत रहा पूरा दिन
कीचड़ साफ करता शख्स
तबाही के साथ पहचान का संकट, ज़रूरी दस्तावेज़ भी हुए बर्बाद
दुकानें बचीं, लेकिन कारोबार थम गया
दुकान में भरा कीचड़
बाढ़ से तबाह हुई कार
राहत के साथ सफ़ाई और पुनर्निर्माण की चुनौती
राहत सामग्री लेते पीड़ित