असम में बाढ़ में सब कुछ गंवाने वालों को राहत, सरकार ने लोन चुकाने पर दी 6 महीने की मोहलत, मृतकों की संख्या हुई 80

Gaon Connection | Jul 31, 2026, 15:55 IST
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असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत देते हुए शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट ज़िलों में सभी प्रकार के ऋणों की अदायगी पर छह महीने का मोराटोरियम देने की घोषणा की है। साथ ही ऋण अवधि सात साल तक बढ़ाने और छोटे दुकानदारों को 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता देने का भी फ़ैसला किया गया है। इस बीच राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 80 हो गई है, जबकि प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 2.12 लाख रह गई है।

बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार का राहत पैकेज
बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार का राहत पैकेज
असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार के बीच राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फ़ैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने घोषणा की है कि बाढ़ प्रभावित लोगों द्वारा लिए गए सभी प्रकार के ऋणों की किस्त (ईएमआई) चुकाने पर छह महीने की मोहलत (मोराटोरियम) दी जाएगी। यह राहत फिलहाल शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट ज़िलों के बाढ़ प्रभावित लोगों को मिलेगी। वहीं, राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है, जबकि प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 2.12 लाख रह गई है।

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर लाइव कार्यक्रम के दौरान बताया कि उन्होंने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), नाबार्ड, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य सभी वाणिज्यिक बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में बाढ़ प्रभावित ऋणधारकों को राहत देने के लिए कई फ़ैसले लिए गए।

बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकार ने क्या राहत दी?

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि एसएलबीसी ने शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट ज़िलों के ऋण लेने वाले ग्राहकों के लिए राहत योजना को मंज़ूरी दी है। इसके तहत इन ज़िलों के बाढ़ प्रभावित लोगों को सभी प्रकार के ऋणों की अदायगी पर छह महीने का मोराटोरियम मिलेगा। उन्होंने कहा कि बैंक पहले ग्राहकों की स्थिति का आकलन करेंगे और केवल बाढ़ से प्रभावित लोगों को ही यह सुविधा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अन्य सभी लोगों से अपील की कि यदि वे बाढ़ से प्रभावित नहीं हैं तो अपनी ईएमआई समय पर चुकाते रहें।

ऋणधारकों को और क्या सुविधाएँ मिलेंगी?

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों द्वारा लिए गए ऋण की अवधि सभी बैंकों में कर्ज़ के प्रकार के आधार पर एक साल से बढ़ाकर अधिकतम सात साल तक की जा सकती है। उन्होंने कहा, "ऐसे कई छोटे खुदरा दुकानदार हैं जिन्होंने ऋण लिया था। अब उनकी दुकानें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं और कुछ भी नहीं बचा है। बैंक उनके ऋण खातों में बिना किसी नए बंधक या ज़मानत के 10,000 रुपये की अतिरिक्त राशि देंगे।"

धार्मिक संस्थानों और राहत कार्यों के लिए क्या ऐलान हुआ?

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित शिवसागर और चराइदेव ज़िलों के प्रत्येक नामघर (वैष्णव धर्मावलंबियों के पूजा स्थल) के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार एकमुश्त 1.5 लाख रुपये की सहायता देगी। दूसरी ओर, असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का जायज़ा लिया और राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अभूतपूर्व बाढ़ से प्रभावित लोगों की राहत और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहायता पैकेज की मांग की है। इससे पहले विपक्षी असम जातीय परिषद (एजेपी) ने राज्य सरकार और आरबीआई से बाढ़ प्रभावित लोगों के सभी ऋण और ईएमआई पर तत्काल छह महीने का मोराटोरियम लागू करने की मांग की थी।

बाढ़ की ताज़ा स्थिति क्या है?

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के गुरुवार के बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दो लोगों की मौत हुई, जिनमें शिवसागर ज़िले में बाढ़ के पानी में डूबा एक लड़का भी शामिल है। इसके साथ ही इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। प्राधिकरण के अनुसार, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर ज़िलों में 2,12,400 से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे अधिक लगभग 80,000 लोग चराइदेव में प्रभावित हैं, जबकि शिवसागर में 71,000 और जोरहाट में 40,000 लोग प्रभावित हैं। बुधवार को प्रभावित लोगों की संख्या तीन लाख से अधिक थी, जिसके मुकाबले अब स्थिति में सुधार हुआ है। एएसडीएमए ने बताया कि प्रशासन चारों ज़िलों में 112 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, जहाँ इस समय 75,583 प्रभावित लोगों की देखभाल की जा रही है।
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