Assam Floods: बाढ़ पीड़ित रफ़ीक़ुद्दीन अहमद का छलका दर्द, बोले-"ज़िंदा तो हूँ, लेकिन ज़िंदा लाश जैसा हो गया हूँ"
Mansi | Aug 04, 2026, 15:19 IST
गोलाघाट में आई भयंकर बाढ़ ने रफ़ीक़ुद्दीन अहमद के जीवन को हिला कर रख दिया है। लगातार हो रही बारिश और तेज़ बहाव ने उनकी जिंदगी की सारी मेहनत और संपत्ति को स्वाहा कर दिया। परिवार सुरक्षित बच गया, लेकिन अब उनसे कायम की गई धरोहर मात्र कुछ ही घंटों में खत्म हो गई। आज वे दिन-रात यह सोचकर परेशान हैं कि अपने जीवन को फिर से कैसे शुरू करें।
बाढ़ के बाद थमी लोगों की ज़िदगी
घंटे की बारिश और तेज़ बहाव ने रफ़ीक़ुद्दीन अहमद की पूरी दुनिया बदल दी। जिस घर को उन्होंने वर्षों की मेहनत से बसाया था, आज वहाँ चारों तरफ़ गाद, टूटा सामान और सन्नाटा पसरा है। कमरों में रखा फर्नीचर, बच्चों की किताबें, ज़रूरी कागज़, कपड़े और रोज़मर्रा का सामान मिट्टी और पानी में दब चुका है। बाढ़ से जान तो बच गई, लेकिन जीवनभर की कमाई देखते-देखते खत्म हो गई। अब हर दिन घर की सफ़ाई के साथ यह सोच भी सताती है कि ज़िंदगी फिर से कहाँ से शुरू करें।
गाँव कनेक्शन की टीम जब गोलाघाट के बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुँची, तो रफ़ीक़ुद्दीन अहमद अपने उजड़े घर के सामने खड़े मिले। चारों ओर फैली तबाही को देखते हुए उन्होंने कहा, "ज़िंदा तो हूँ, लेकिन ज़िंदा लाश जैसा हो गया हूँ।" उनके ये शब्द सिर्फ़ उनके परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उन हज़ारों लोगों की कहानी हैं, जिनकी मेहनत और सपने इस बाढ़ में बह गए।
रफ़ीक़ुद्दीन बताते हैं कि पानी इतनी तेज़ी से बढ़ा कि किसी को कुछ समेटने का समय ही नहीं मिला। सबसे पहले परिवार की जान बचाना ज़रूरी था। जब हालात सामान्य हुए और वे घर लौटे, तो अंदर का नज़ारा देखकर उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वे कहते हैं, "घर में जो भी था, सब खत्म हो गया। कपड़े, बर्तन, बच्चों की किताबें, ज़रूरी कागज़, फर्नीचर... A To Z जितना भी सामान था, सब मिट्टी में मिल गया। दो-एक चीज़ मिली भी तो अब किसी काम की नहीं रही।"
कुछ कीमती सामान को सुरक्षित रखने के लिए रफ़ीक़ुद्दीन ने उसे दूसरे घर में रख दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि वहाँ पानी नहीं पहुँचेगा, लेकिन बाढ़ ने वह सहारा भी छीन लिया। वे बताते हैं, "दुकान का कंप्यूटर, लैपटॉप और बाकी सामान दूसरे घर में रखा था। वहाँ भी पानी भर गया। चारपाई के ऊपर रखी चीज़ें भी डूब गईं। आखिर में कुछ भी नहीं बचा।"
![रफ़ीक़ुद्दीन अहमद]()
घर का सामान बर्बाद होने के साथ-साथ रफ़ीक़ुद्दीन की दुकान भी बुरी तरह प्रभावित हुई। कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे ज़रूरी सामान खराब हो जाने से उनका काम ठप पड़ गया है। अब परिवार के सामने सिर्फ़ घर दोबारा बसाने की नहीं, बल्कि रोज़ी-रोटी की भी बड़ी चुनौती है। वे कहते हैं कि सालों की मेहनत से थोड़ा-थोड़ा करके जो कुछ जोड़ा था, वह कुछ घंटों में खत्म हो गया। अब समझ नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें।
गोलाघाट के कई परिवार आज इसी दर्द से गुजर रहे हैं। लोग अपने घरों से गाद निकाल रहे हैं, टूटे सामान को अलग कर रहे हैं और जो बचा है, उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हर टूटी चीज़ उन्हें उस रात की याद दिला रही है, जब पानी ने सिर्फ़ घरों को नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत, उम्मीदों और सपनों को भी अपने साथ बहा दिया।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ़
गाँव कनेक्शन की टीम जब गोलाघाट के बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुँची, तो रफ़ीक़ुद्दीन अहमद अपने उजड़े घर के सामने खड़े मिले। चारों ओर फैली तबाही को देखते हुए उन्होंने कहा, "ज़िंदा तो हूँ, लेकिन ज़िंदा लाश जैसा हो गया हूँ।" उनके ये शब्द सिर्फ़ उनके परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उन हज़ारों लोगों की कहानी हैं, जिनकी मेहनत और सपने इस बाढ़ में बह गए।
"पूरा घर मिट्टी में मिल गया"
कुछ कीमती सामान को सुरक्षित रखने के लिए रफ़ीक़ुद्दीन ने उसे दूसरे घर में रख दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि वहाँ पानी नहीं पहुँचेगा, लेकिन बाढ़ ने वह सहारा भी छीन लिया। वे बताते हैं, "दुकान का कंप्यूटर, लैपटॉप और बाकी सामान दूसरे घर में रखा था। वहाँ भी पानी भर गया। चारपाई के ऊपर रखी चीज़ें भी डूब गईं। आखिर में कुछ भी नहीं बचा।"
रफ़ीक़ुद्दीन अहमद
रोज़गार का सहारा भी छिन गया
गोलाघाट के कई परिवार आज इसी दर्द से गुजर रहे हैं। लोग अपने घरों से गाद निकाल रहे हैं, टूटे सामान को अलग कर रहे हैं और जो बचा है, उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हर टूटी चीज़ उन्हें उस रात की याद दिला रही है, जब पानी ने सिर्फ़ घरों को नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत, उम्मीदों और सपनों को भी अपने साथ बहा दिया।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ़