Assam Floods: "जो घर में रह गया, वो वहीं खत्म हो गया, अब उनकी लाशें निकल रही हैं..." चश्मदीद ने दर्द बयां किया
Mansi | Aug 03, 2026, 16:52 IST
गोलाघाट ज़िले के एक गाँव में अचानक आई बाढ़ ने महज दो घंटे में पाँच से दस फ़ीट तक पानी भर दिया। स्थानीय निवासी अपनी ज़िंदगी का सामान समेटने या सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का भी मौका नहीं पा सके। कुछ लोगों को रस्सियों के सहारे एक घर की छत पर दो दिन तक फँसे रहना पड़ा।
बाढ़ के बाद तबाही का मंजर
असम के गोलाघाट ज़िले का नेपाल कुटी गाँव इन दिनों सन्नाटे में डूबा है। जहाँ कभी बच्चों की आवाज़ें, मवेशियों की घंटियाँ और खेतों में काम करते किसानों की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहाँ अब टूटी दीवारें, कीचड़ से भरे घर और अपनों को खोने का दर्द दिखाई देता है। बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन गाँव के लोगों के ज़ख्म अभी भी ताज़ा हैं।
गाँव कनेक्शन की टीम जब पहुँची, तो हर घर की अपनी एक दर्दभरी कहानी थी। किसी ने अपने परिवार का सदस्य खोया, किसी की वर्षों की मेहनत से बनाया घर बह गया तो किसी के मवेशी बाढ़ में समा गए। ग्रामीण बताते हैं कि महज़ दो घंटे में पानी पाँच से दस फ़ीट तक पहुँच गया। लोगों को न सामान समेटने का मौका मिला, न सुरक्षित जगह तक पहुँचने का। जिसने जैसे-तैसे छत का सहारा ले लिया, उसकी जान बच गई और जो घरों में रह गया, वह बाढ़ की चपेट में आ गया
गाँव के रहने वाले प्रकाश ने गाँव कनेक्शन की टीम को बताया कि शाम तक किसी को अंदाज़ा नहीं था कि कुछ ही घंटों में पूरा गाँव जलमग्न हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देखते ही देखते पानी पाँच से दस फ़ीट तक पहुँच गया और लोगों के पास घर छोड़ने तक का समय नहीं बचा। प्रकाश बताते हैं, "समझ ही नहीं आया कि क्या करें। जाएँ तो जाएँ कहाँ? चारों तरफ़ पानी ही पानी था।"
![गाँव कनेक्शन की टीम को अपनी आपबीती साझा करते प्रकाश]()
प्रकाश ने टीम को बताया कि जब पानी लगातार बढ़ता गया, तो गाँव के लोगों ने रस्सियों की मदद से बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों समेत करीब 20 लोगों को एक घर की छत पर चढ़ाया। नीचे तेज़ बहाव था और ऊपर सिर्फ़ आसमान। वही छत उन लोगों के लिए ज़िंदगी की आख़िरी उम्मीद बन गई। उन्होंने बताया कि दो दिन तक सभी लोग उसी छत पर फँसे रहे। न नीचे उतरने का रास्ता था और न ही कहीं से मदद पहुँच पा रही थी। हर पल यही डर था कि अगर पानी और बढ़ गया तो शायद बचना मुश्किल हो जाएगा।
![बाढ़ के पानी में लगभग पूरी तरह डूबा मकान]()
बाढ़ का सबसे दर्दनाक मंजर अब सामने आ रहा है। प्रकाश ने गाँव कनेक्शन की टीम से कहा, "जो घर में रह गया, वो वहीं खत्म हो गया। अब उनकी लाशें निकल रही हैं।" पानी उतरने के बाद मलबे के नीचे दबे लोगों और मवेशियों के शव निकाले जा रहे हैं। कई जगह जेसीबी की मदद से टूटी दीवारें और मिट्टी हटाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब भी कई जानवरों के शव मलबे में दबे हुए हैं। गोलाघाट ज़िले में कई मकानों की दीवारें पानी के तेज़ बहाव में ढह गईं। खेत मोटी गाद से भर गए और घरों का सामान कीचड़ में दब गया। जिन घरों में कभी बच्चों की आवाज़ें गूँजती थीं, वहाँ अब सिर्फ़ सन्नाटा और टूटी हुई दीवारें बची हैं। ग्रामीण अपने घरों की सफ़ाई में जुटे हैं, लेकिन हर फावड़े के साथ उन्हें उस रात की याद भी फिर से सामने खड़ी मिलती है।
![बाढ़ के बीच नाव बनी ग्रामीणों का सहारा]()
नेपाल कुटी में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर चुका है, लेकिन लोगों के मन में उस रात का डर आज भी ज़िंदा है। जिन्होंने अपने परिवार के सदस्य, मवेशी, घर और वर्षों की मेहनत खो दी, उनके लिए यह सिर्फ़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि ज़िंदगी भर का घाव है। गाँव कनेक्शन की यह ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि बाढ़ का सबसे बड़ा नुकसान टूटी दीवारें नहीं, बल्कि वे ज़िंदगियाँ हैं, जिन्हें बचाने का लोगों को मौका तक नहीं मिला।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ़
गाँव कनेक्शन की टीम जब पहुँची, तो हर घर की अपनी एक दर्दभरी कहानी थी। किसी ने अपने परिवार का सदस्य खोया, किसी की वर्षों की मेहनत से बनाया घर बह गया तो किसी के मवेशी बाढ़ में समा गए। ग्रामीण बताते हैं कि महज़ दो घंटे में पानी पाँच से दस फ़ीट तक पहुँच गया। लोगों को न सामान समेटने का मौका मिला, न सुरक्षित जगह तक पहुँचने का। जिसने जैसे-तैसे छत का सहारा ले लिया, उसकी जान बच गई और जो घरों में रह गया, वह बाढ़ की चपेट में आ गया
"दो घंटे में पूरा गाँव पानी में डूब गया"
गाँव कनेक्शन की टीम को अपनी आपबीती साझा करते प्रकाश
रस्सियों के सहारे छत पर बचीं 20 ज़िंदगियाँ
बाढ़ के पानी में लगभग पूरी तरह डूबा मकान
"जो घर में रह गया, वो वहीं खत्म हो गया"
बाढ़ के बीच नाव बनी ग्रामीणों का सहारा
पानी उतर गया, लेकिन दर्द अभी बाकी है
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ़