Assam Floods: बाढ़ का पानी लौटा, लेकिन तबाही अब भी बाकी, जानें असम के गाँवों में अब कैसे कट रही है ज़िंदगी | Ground Report
Mansi | Aug 01, 2026, 16:35 IST
असम में आई बाढ़ के बाद तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। उजड़े घर और टूटी सड़कें स्थानीय लोगों की कठिनाइयों को दर्शाती हैं, जबकि कई परिवार अब भी सुरक्षित ठिकानों की खोज में हैं। बाढ़ ने ना केवल उनके आशियाने छीन लिए, बल्कि उन्होंने अपने प्यारे लोगों को भी खो दिया है।
असम में बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई घर मलबे, कीचड़ और तबाही के बीच
असम में आई भीषण बाढ़ का पानी अब कई इलाकों से उतर चुका है, लेकिन तबाही के निशान आज भी हर गाँव में दिखाई दे रहे हैं। शिवसागर ज़िले के बिहुबर समेत कई गाँवों में लोग अब बाढ़ से नहीं, बल्कि उसके बाद आई मुश्किलों से जूझ रहे हैं। उजड़े घर, टूटी सड़कें, गाद से भरे आँगन और बिखरा सामान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पानी भले ही लौट गया हो, लेकिन लोगों की ज़िंदगी अब भी सामान्य नहीं हो सकी है।
गाँव कनेक्शन की टीम जब शिवसागर ज़िले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुँची तो हर तरफ़ तबाही का मंजर दिखाई दिया। कई घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जबकि कुछ मकानों की दीवारें गिर गई थीं। घरों और गलियों में मोटी गाद जमी थी। कई लोग अपने हाथों से कीचड़ साफ़ कर रहे थे, तो कुछ अपने घरों से बचा-खुचा सामान निकालने की कोशिश में जुटे थे। ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि राहत मिलने के बावजूद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने की है। कई परिवारों के पास अब भी रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।
बिहुबर में गाँव कनेक्शन की टीम की मुलाकात एक ऐसी महिला से हुई, जिसकी घर पूरी तरह बह गया और घर का सारा सामान भी पानी में समा गया। अब उसके पास रहने के लिए सुरक्षित छत तक नहीं बची है। मजबूरी में उसका छोटा बच्चा दूसरे लोगों के घरों में रात गुज़ार रहा है। महिला का कहना है कि बाढ़ ने उससे सिर्फ़ उसका घर नहीं छीना, बल्कि अपने बच्चे के साथ रहने का सहारा भी छीन लिया। उसकी कहानी उन हज़ारों परिवारों की पीड़ा बयां करती है, जो आज भी पुनर्वास का इंतज़ार कर रहे हैं।
![पीड़िता महिला ने गाँव कनेक्शन की टीम को अपनी आपबीती सुनाई]()
गाँव कनेक्शन की टीम से बातचीत के दौरान देवीराम ने अपनी दर्दभरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया, "मेरी पत्नी और चार साल का बेटा बाढ़ के पानी में बह गए। पत्नी का शव मिल गया, लेकिन मेरे बेटे का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।" उनकी आँखों में आज भी बेटे के लौट आने की उम्मीद दिखाई देती है।
![बाढ़ की त्रासदी के बीच अपन लापता बच्चे की तलाश और उजड़े जीवन की दर्दभरी कहानी सुनाता पीड़ित]()
ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के दौरान किसी तरह जान बच गई, लेकिन अब घरों को फिर से रहने लायक बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। घरों के भीतर मोटी गाद जमी हुई है, घरेलू सामान बर्बाद हो चुका है और कई परिवारों के पास रोज़मर्रा की ज़रूरतों का सामान भी नहीं बचा। लोग सुबह से शाम तक मलबा हटाने और घरों की सफ़ाई में जुटे हैं। प्रभावित गाँवों में कई परिवार अपने टूटे घरों और रास्तों को बाँस तथा स्थानीय संसाधनों की मदद से दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सहायता के साथ-साथ वे अपने स्तर पर भी पुनर्निर्माण में जुटे हैं। कई जगह पड़ोसी एक-दूसरे का हाथ बँटाते हुए दिखाई दिए।
ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री से शुरुआती मदद तो मिली, लेकिन अब सबसे बड़ी ज़रूरत स्थायी पुनर्वास की है। कई परिवारों के सामने भोजन, सुरक्षित आवास और आजीविका की समस्या बनी हुई है। जिनका सब कुछ बाढ़ में बह गया, उनके लिए नई शुरुआत आसान नहीं है।
गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट में कैद तस्वीरें सिर्फ़ बाढ़ की तबाही नहीं दिखातीं, बल्कि लोगों के हौसले की कहानी भी बयां करती हैं। कोई अपने घर से गाद निकाल रहा है, कोई टूटी दीवारें खड़ी कर रहा है, तो कोई अपने परिवार के लिए फिर से एक सुरक्षित छत बनाने की कोशिश कर रहा है। असम के इन गाँवों में पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन ज़िंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की लड़ाई अभी भी जारी है।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ
गाँव कनेक्शन की टीम जब शिवसागर ज़िले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुँची तो हर तरफ़ तबाही का मंजर दिखाई दिया। कई घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जबकि कुछ मकानों की दीवारें गिर गई थीं। घरों और गलियों में मोटी गाद जमी थी। कई लोग अपने हाथों से कीचड़ साफ़ कर रहे थे, तो कुछ अपने घरों से बचा-खुचा सामान निकालने की कोशिश में जुटे थे। ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि राहत मिलने के बावजूद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने की है। कई परिवारों के पास अब भी रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।
"अब मेरे पास बच्चे को घर लाने की भी जगह नहीं है"
पीड़िता महिला ने गाँव कनेक्शन की टीम को अपनी आपबीती सुनाई
"पत्नी का शव मिला, लेकिन चार साल का बेटा आज भी लापता है"
बाढ़ की त्रासदी के बीच अपन लापता बच्चे की तलाश और उजड़े जीवन की दर्दभरी कहानी सुनाता पीड़ित
पानी उतरने के बाद शुरू हुई सबसे कठिन लड़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री से शुरुआती मदद तो मिली, लेकिन अब सबसे बड़ी ज़रूरत स्थायी पुनर्वास की है। कई परिवारों के सामने भोजन, सुरक्षित आवास और आजीविका की समस्या बनी हुई है। जिनका सब कुछ बाढ़ में बह गया, उनके लिए नई शुरुआत आसान नहीं है।
हर तस्वीर में तबाही के साथ हौसला भी दिखाई देता है
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ