भारत से पहली बार समुद्री मार्ग से सिंगापुर पहुँचे बंगनपल्ली आम, 5 मीट्रिक टन खेप का निर्यात, किसानों को मिली दोगुनी क़ीमत

Gaon Connection | Jun 25, 2026, 15:47 IST
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एपीडा ने पहली बार भारत से सिंगापुर के लिए बंगनपल्ली आमों की व्यावसायिक समुद्री खेप भेजने में सफलता हासिल की है। आंध्र प्रदेश के जीएपी प्रमाणित बागों से लिए गए आमों की गुणवत्ता सिंगापुर के मानकों पर खरी उतरी। इस निर्यात से किसानों को घरेलू बाज़ार की तुलना में लगभग दोगुनी क़ीमत मिली। सरकार का मानना है कि समुद्री मार्ग से ताज़े फलों के निर्यात को नई गति मिलेगी।

आंध्र प्रदेश से सिंगापुर पहुँचे बंगनपल्ली आम
आंध्र प्रदेश से सिंगापुर पहुँचे बंगनपल्ली आम
भारत के प्रीमियम आमों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने पहली बार व्यावसायिक स्तर पर समुद्री मार्ग से प्रीमियम बंगनपल्ली आमों की खेप सिंगापुर भेजने में सफलता हासिल की है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय बागवानी उत्पादों के निर्यात को कम लागत वाला, टिकाऊ और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस निर्यात से किसानों को घरेलू बाज़ार की तुलना में लगभग दोगुनी क़ीमत मिली। जहाँ देश के भीतर बंगनपल्ली आम 25 से 26 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे थे, वहीं निर्यात की गई खेप का मूल्य लगभग 50 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि वैज्ञानिक भंडारण, कोल्ड-चेन और समुद्री परिवहन के ज़रिए भारतीय ताज़े फलों का निर्यात और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

पाँच मीट्रिक टन आमों की भेजी गई खेप

मंत्रालय के अनुसार, यह खेप पाँच मीट्रिक टन बंगनपल्ली आमों की थी, जिसे एम/एस ओसम फ़ूड सॉल्यूशंस एलएलपी ने निर्यात किया। यह खेप 11 जून 2026 को भारत से रवाना हुई और 24 जून 2026 को सिंगापुर पहुँची।

एपीडा और सीआईएसएच ने मिलकर पूरी की पहल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि एपीडा ने आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ के सहयोग से इस पहली व्यावसायिक समुद्री खेप को सफलतापूर्वक सिंगापुर पहुँचाया। मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य प्रीमियम भारतीय आमों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तैयार करना और समुद्री परिवहन को निर्यात का व्यवहारिक विकल्प बनाना है।

आंध्र प्रदेश के बागों से चुने गए आम

मंत्रालय ने बताया कि आम आंध्र प्रदेश के गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज़ (GAP) प्रमाणित बागों से लिए गए थे। इसके बाद कर्नाटक स्थित एपीडा से मान्यता प्राप्त पैकहाउस में उनकी ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और पैकिंग की गई। पूरी खेप को सिंगापुर के गुणवत्ता और पादप स्वच्छता (फाइटोसैनिटरी) मानकों के अनुरूप तैयार किया गया।

सिंगापुर के आयातक ने गुणवत्ता की सराहना की

मंत्रालय के अनुसार, सिंगापुर की आयातक कंपनी ईसी-लिंक्स प्राइवेट लिमिटेड ने खेप पहुँचने के बाद आमों की गुणवत्ता की सराहना की। कंपनी ने आमों की मिठास, एकसमान पकने की क्षमता, लंबे समय तक ताज़ा रहने की गुणवत्ता और फाइटोसैनिटरी स्थिति को बेहतर बताया।

वैज्ञानिक प्रबंधन और कोल्ड-चेन की सफलता

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि यह खेप सभी आयात मानकों पर खरी उतरी। इससे यह साबित हुआ कि वैज्ञानिक कटाई-पश्चात प्रबंधन, कोल्ड-चेन अवसंरचना और समुद्री परिवहन के दौरान बेहतर लॉजिस्टिक्स के ज़रिए ताज़े फलों का सुरक्षित निर्यात संभव है।

किसानों को मिला लगभग दोगुना दाम

मंत्रालय के अनुसार, इस निर्यात से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई। घरेलू बाज़ार में बंगनपल्ली आम की क़ीमत 25 से 26 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि निर्यात की गई खेप का मूल्य लगभग 50 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। इससे किसानों को लगभग दोगुना लाभ मिला।

समुद्री मार्ग से बढ़ेगी भारतीय फलों की प्रतिस्पर्धा

मंत्रालय ने कहा कि इस सफलता से यह स्पष्ट हुआ है कि समुद्री मार्ग ताज़े फलों के निर्यात के लिए कम लागत वाला, पर्यावरण-अनुकूल और बड़े पैमाने पर उपयोगी विकल्प बन सकता है। बेहतर कोल्ड-चेन, वैज्ञानिक प्रबंधन और कुशल लॉजिस्टिक्स के सहारे भारतीय बागवानी उत्पाद वैश्विक बाज़ार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मज़बूत कर सकते हैं।

बंगनपल्ली आम की विदेशों में बढ़ रही माँग

मंत्रालय के अनुसार, बंगनपल्ली भारत की सबसे लोकप्रिय आम की किस्मों में से एक है। इसका सुनहरा पीला रंग, रेशारहित गूदा, ख़ुशबू और मिठास इसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी लोकप्रिय बनाती है। एपीडा ताज़े फल और सब्ज़ियों के समुद्री निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाज़ार विकास, अवसंरचना सहायता और क्षमता निर्माण से जुड़े कई कार्यक्रम चला रहा है।
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