राशन कार्ड धारकों को अब मिलेगा बेहतर चावल, 30 साल बाद बदले गुणवत्ता के नियम, सरकार को ₹2,161 करोड़ की बचत का अनुमान
Gaon Connection | Jul 02, 2026, 16:41 IST
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राशन में दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता सुधारने के लिए टूटे दानों की सीमा घटा दी है। इससे 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर चावल मिलेगा। अतिरिक्त टूटा चावल इथेनॉल और पशु आहार में इस्तेमाल होगा। साथ ही क्यूआर कोड टैगिंग और बेहतर प्रबंधन से सरकार को हर साल लगभग ₹2,161 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।
राशन के चावल में सुधार, टूटे दानों की सीमा घटी
राशन कार्ड धारकों को अब पहले से बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से वितरित किए जाने वाले चावल में टूटे दानों की अनुमेय सीमा घटाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। करीब 30 साल बाद चावल की गुणवत्ता से जुड़े मानकों में यह बड़ा बदलाव किया गया है, जिससे 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिल सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह फ़ैसला केवल चावल की गुणवत्ता सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। टूटे चावल की मात्रा कम होने से बड़ी मात्रा में अतिरिक्त टूटा चावल उपलब्ध होगा, जिसका बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही परिवहन, भंडारण और प्रशासनिक खर्च में कमी आने से सरकार को हर साल लगभग ₹2,161 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कच्चे (रॉ) चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी है। वहीं उसना (पारबॉयल्ड) चावल में यह सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है।
सरकार के अनुसार, इस बदलाव से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत हर महीने मुफ़्त राशन पाने वाले 80 करोड़ से अधिक लोगों को पहले की तुलना में बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा।
अधिकारियों के मुताबिक़, गुणवत्ता मानकों में बदलाव के बाद 80 से 90 लाख टन अतिरिक्त टूटा चावल उपलब्ध होगा। इसका उपयोग इथेनॉल उत्पादन के साथ-साथ पशु आहार में भी किया जा सकेगा, जिससे खरीदे गए प्रत्येक दाने का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित होगा। सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और दक्ष बनाने के लिए चावल की बोरियों पर एंड-टू-एंड ट्रेसबिलिटी के लिए क्यूआर (QR) कोड टैगिंग भी करेगी। इससे बेहतर इन्वेंट्री प्रबंधन में मदद मिलेगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि इस व्यवस्था से परिवहन, भंडारण और प्रशासनिक खर्च में कमी आएगी, जिससे सरकार को हर वर्ष लगभग ₹2,161 करोड़ की लागत बचत होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्र सरकार 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को हर महीने 5 किलोग्राम चावल या गेहूँ मुफ़्त उपलब्ध कराती है।
सरकार का कहना है कि यह फ़ैसला केवल चावल की गुणवत्ता सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। टूटे चावल की मात्रा कम होने से बड़ी मात्रा में अतिरिक्त टूटा चावल उपलब्ध होगा, जिसका बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही परिवहन, भंडारण और प्रशासनिक खर्च में कमी आने से सरकार को हर साल लगभग ₹2,161 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।
कच्चे और उसना चावल के लिए बदले गुणवत्ता के मानक
सरकार के अनुसार, इस बदलाव से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत हर महीने मुफ़्त राशन पाने वाले 80 करोड़ से अधिक लोगों को पहले की तुलना में बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा।
टूटे चावल का होगा बेहतर उपयोग, बढ़ेगी पारदर्शिता
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि इस व्यवस्था से परिवहन, भंडारण और प्रशासनिक खर्च में कमी आएगी, जिससे सरकार को हर वर्ष लगभग ₹2,161 करोड़ की लागत बचत होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्र सरकार 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को हर महीने 5 किलोग्राम चावल या गेहूँ मुफ़्त उपलब्ध कराती है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी निर्णय लिया गया है।
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) July 1, 2026
लगभग तीन दशकों में पहली बार #PMGKAY के अंतर्गत वितरित किए जाने वाले चावल के… pic.twitter.com/WbklxvKpPy