Bhopal Protest: मूंग की खरीद पर क्यों नाराज़ हैं मध्य प्रदेश के किसान? जानिए भोपाल के प्रदर्शन के पीछे की पूरी कहानी
Mansi | Jul 29, 2026, 15:50 IST
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग की फसल की पूरी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग को लेकर किसानों ने प्रदर्शन किया। नर्मदापुरम, हरदा, मंदसौर समेत कई जिलों से पहुँचे किसानों ने खरीद व्यवस्था, ई-टोकन प्रणाली और बढ़ती कृषि लागत को लेकर अपनी चिंताएं जताईं। जानिए आखिर क्यों नाराज़ हैं किसान और सरकार से क्या चाहते हैं अन्नदाता।
Protest in Bhopal
भोपाल में किसानों का प्रदर्शन तेज़ हो गया है। नर्मदापुरम, हरदा, मंदसौर समेत कई जिलों से पहुँचे किसान मूंग की पूरी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने की मांग को लेकर राजधानी में जुटे रहे। किसानों का कहना है कि उन्होंने बढ़ती लागत और मेहनत के बाद मूंग की फसल तैयार की है, लेकिन सरकारी खरीद व्यवस्था की सीमाओं के कारण उन्हें अपनी पूरी उपज बेचने में परेशानी हो रही है।
किसानों का कहना है कि सिर्फ एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसान की फसल तय कीमत पर खरीदी जाए। किसान एमएसपी की गारंटी, मूंग की शत-प्रतिशत खरीद, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भोपाल पहुँचे हैं।
मध्य प्रदेश में मूंग की खेती करने वाले किसानों की सबसे बड़ी नाराज़गी सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर है। किसानों का कहना है कि इस बार मूंग का उत्पादन अच्छा हुआ है, लेकिन सीमित खरीद के कारण कई किसान अपनी पूरी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने प्रति एकड़ तय मात्रा में ही खरीद की व्यवस्था की है, जबकि कई किसानों के पास इससे अधिक उत्पादन है। ऐसे में बची हुई फसल बेचने की चिंता किसानों को परेशान कर रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार पूरी उपज नहीं खरीदेगी तो उन्हें मजबूरी में व्यापारियों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ सकती है।
अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए किसानों ने भोपाल की ओर मार्च किया। बड़ी संख्या में किसान राजधानी पहुँचे और अपनी समस्याओं को सामने रखा। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और कई जगहों पर बैरिकेड लगाए। किसानों की मुख्य मांग है कि मूंग की पूरी खरीद एमएसपी पर की जाए। इसके अलावा वे ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने और किसानों को समय पर भुगतान दिलाने की मांग भी उठा रहे हैं।
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि खेती लगातार महंगी होती जा रही है। बीज, खाद, यूरिया, डीएपी, मजदूरी और सिंचाई का खर्च बढ़ने के बावजूद किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
मंदसौर के किसान इंदिरा सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या उनकी उपज का सही दाम नहीं मिलना है। उन्होंने कहा कि किसानों को एमएसपी की गारंटी चाहिए, ताकि उन्हें भरोसा रहे कि उनकी फसल कम से कम तय कीमत पर बिक जाएगी। उन्होंने कहा कि खाद, यूरिया, डीएपी और दूसरी कृषि सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फसल से मिलने वाला लाभ उस अनुपात में नहीं बढ़ रहा। उन्होंने लहसुन जैसी फसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी भाव बहुत कम हो जाते हैं और कभी बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, लेकिन किसान को स्थिर और उचित मूल्य की जरूरत है।
किसानों ने मूंग के अलावा पिछली फसलों की खरीद व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं खरीद के दौरान भी कई किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
इंदिरा सिंह चौहान ने बताया कि कई बार खरीद की तारीख आगे बढ़ती रही और किसानों को मजबूरी में अपनी फसल बाजार में बेचनी पड़ी। किसानों की मांग है कि सरकार खरीद प्रक्रिया को समय पर पूरा करे, जिससे उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।
किसानों के मार्च और प्रदर्शन के कारण भोपाल के कुछ इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुँचाना है।
आंदोलन के बीच सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई। प्रशासन की ओर से किसानों की समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने की बात कही गई है, लेकिन किसान अपनी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक एमएसपी और खरीद व्यवस्था को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भोपाल का यह आंदोलन एक बार फिर एमएसपी और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर रहा है। किसानों का कहना है कि खेती को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है कि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिले और खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो।
किसानों का कहना है कि सिर्फ एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसान की फसल तय कीमत पर खरीदी जाए। किसान एमएसपी की गारंटी, मूंग की शत-प्रतिशत खरीद, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भोपाल पहुँचे हैं।
मूंग खरीद को लेकर किसान क्यों हैं नाराज़?
क्या हैं उनकी मांगे?
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि खेती लगातार महंगी होती जा रही है। बीज, खाद, यूरिया, डीएपी, मजदूरी और सिंचाई का खर्च बढ़ने के बावजूद किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
मंदसौर के किसान इंदिरा सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या उनकी उपज का सही दाम नहीं मिलना है। उन्होंने कहा कि किसानों को एमएसपी की गारंटी चाहिए, ताकि उन्हें भरोसा रहे कि उनकी फसल कम से कम तय कीमत पर बिक जाएगी। उन्होंने कहा कि खाद, यूरिया, डीएपी और दूसरी कृषि सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फसल से मिलने वाला लाभ उस अनुपात में नहीं बढ़ रहा। उन्होंने लहसुन जैसी फसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी भाव बहुत कम हो जाते हैं और कभी बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, लेकिन किसान को स्थिर और उचित मूल्य की जरूरत है।
गेहूं खरीद को लेकर किसानों ने क्या सवाल उठाए?
इंदिरा सिंह चौहान ने बताया कि कई बार खरीद की तारीख आगे बढ़ती रही और किसानों को मजबूरी में अपनी फसल बाजार में बेचनी पड़ी। किसानों की मांग है कि सरकार खरीद प्रक्रिया को समय पर पूरा करे, जिससे उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।
प्रदर्शन का भोपाल पर क्या असर पड़ा?
आंदोलन के बीच सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई। प्रशासन की ओर से किसानों की समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने की बात कही गई है, लेकिन किसान अपनी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक एमएसपी और खरीद व्यवस्था को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भोपाल का यह आंदोलन एक बार फिर एमएसपी और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर रहा है। किसानों का कहना है कि खेती को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है कि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिले और खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो।