यूपी में 2.28 लाख पशुओं का होगा बीमा, 85% प्रीमियम देगी सरकार; जानें कब और कैसे मिलेगा लाभ
Umang | Jul 06, 2026, 18:34 IST
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी दे दी है। योजना के तहत 60 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2026-27 में 2.28 लाख से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी देगा। महामारी, दैविक आपदा, दुर्घटना या स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलेगी। योजना प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में लागू होगी।
यूपी में पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी
उत्तर प्रदेश के पशुपालकों, डेयरी संचालकों और किसानों को पशुओं की मृत्यु, महामारी, दैविक आपदा और दुर्घटनाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से राहत देने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस राज्य योजना की कार्ययोजना और वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को देनी होगी।
सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश पशुधन के मामले में देश का सबसे बड़ा प्रदेश है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की अहम भूमिका है। ऐसे में यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालकों की आय पर सीधा असर पड़ता है। नई बीमा योजना का उद्देश्य ऐसे आर्थिक जोखिम को कम करना और पशुपालकों को समय पर वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फ़ार्म संचालक और अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा या आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है अथवा वह स्थायी रूप से अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि दावा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। पशु की मृत्यु के बाद दावा स्वीकृत होने पर बीमा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार की विभिन्न पशुपालन और डेयरी विकास योजनाओं से जुड़े पशुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
कैबिनेट से मंज़ूर योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इनमें 1,86,800 पशुओं को सामान्य मद और 41,550 पशुओं को एससीएसपी (SCSP) घटक के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।
योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी। इसमें 51 प्रतिशत केंद्र सरकार और 34 प्रतिशत राज्य सरकार का योगदान होगा, जबकि 15 प्रतिशत प्रीमियम लाभार्थी को देना होगा। सरकार के अनुसार, दावा स्वीकृत होने के बाद एक महीने के भीतर बीमा कंपनी लाभार्थी के खाते में बीमा राशि का भुगतान करेगी।
धर्मपाल सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पशुधन का योगदान लगभग 5.50 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की जीडीपी में पशुधन की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। पशुपालन ग्रामीण आय बढ़ाने के साथ विदेशी मुद्रा अर्जित करने का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए लगभग 7,500 गोसंरक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ करीब 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इनकी देखभाल पर राज्य सरकार प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज और वन विभाग की भूमि पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश पशुधन के मामले में देश का सबसे बड़ा प्रदेश है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की अहम भूमिका है। ऐसे में यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालकों की आय पर सीधा असर पड़ता है। नई बीमा योजना का उद्देश्य ऐसे आर्थिक जोखिम को कम करना और पशुपालकों को समय पर वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
महामारी, दैविक आपदा और दुर्घटना से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा
उन्होंने बताया कि दावा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। पशु की मृत्यु के बाद दावा स्वीकृत होने पर बीमा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार की विभिन्न पशुपालन और डेयरी विकास योजनाओं से जुड़े पशुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
2.28 लाख से अधिक पशुओं का होगा बीमा, एक महीने में मिलेगा भुगतान
योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी। इसमें 51 प्रतिशत केंद्र सरकार और 34 प्रतिशत राज्य सरकार का योगदान होगा, जबकि 15 प्रतिशत प्रीमियम लाभार्थी को देना होगा। सरकार के अनुसार, दावा स्वीकृत होने के बाद एक महीने के भीतर बीमा कंपनी लाभार्थी के खाते में बीमा राशि का भुगतान करेगी।
प्रदेश के 75 ज़िलों में लागू होगी योजना
उन्होंने बताया कि प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए लगभग 7,500 गोसंरक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ करीब 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इनकी देखभाल पर राज्य सरकार प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज और वन विभाग की भूमि पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।