यूरिया उत्पादन बढ़ाने को कैबिनेट की मंजूरी, नई निवेश नीति से लगेंगे गैस आधारित प्लांट; आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी

Umang | Jul 15, 2026, 17:57 IST
Share

केंद्र सरकार ने देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (एनआईपीयू-2026) राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत गैस आधारित यूरिया निर्माण इकाइयों में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर यूरिया की बढ़ती मांग को पूरा करना और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। नीति में निवेशकों के लिए कई नए प्रावधान किए गए हैं, जिनसे प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है।

नई यूरिया निवेश नीति से नए संयंत्रों को मिलेगी रफ्तार
नई यूरिया निवेश नीति से नए संयंत्रों को मिलेगी रफ्तार
देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (एनआईपीयू-2026) राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी। नई नीति के तहत गैस आधारित नई यूरिया निर्माण इकाइयों में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़ाकर देश की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

फिलहाल देश में 33 यूरिया निर्माण इकाइयां काम कर रही हैं, जिनकी कुल पुनर्मूल्यांकित/स्थापित क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है। इसके बावजूद उत्पादन और मांग के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है, जिसे पूरा करने के लिए भारत को हर साल यूरिया आयात करना पड़ता है। उर्वरक विभाग को नई यूरिया इकाइयां लगाने के कई प्रस्ताव मिले हैं। इन्हीं प्रस्तावों को देखते हुए सरकार ने नई निवेश नीति लागू करने का फैसला किया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे नए निवेश आएंगे, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराना आसान होगा।

नई नीति में क्या बदला, निवेशकों को कैसे होगा फायदा

नई निवेश नीति के तहत देश में लगने वाली सभी नई गैस आधारित यूरिया निर्माण इकाइयों को शामिल किया जाएगा। सरकार ने निवेशकों के लिए 12 से 16 फीसदी के बीच रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) का प्रावधान किया है। इसके अलावा फिक्स्ड और वेरिएबल लागत को अलग-अलग रखने की व्यवस्था की गई है, जिससे लागत निर्धारण अधिक पारदर्शी होगा। विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के जोखिम को कम करने के लिए चार साल बाद फिक्स्ड कॉस्ट को रुपये में बदलने का प्रावधान भी किया गया है।

सरकार का अनुमान है कि इन बदलावों से नई नीति के तहत स्थापित होने वाले प्रत्येक यूरिया संयंत्र पर पुरानी नीति के मुकाबले 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। इससे निवेशकों के लिए नई परियोजनाएं अधिक आकर्षक बनने की उम्मीद है।

2012 की नीति के बाद अब नया दांव, किसानों को क्या मिलेगा

इससे पहले वर्ष 2012 में लागू राष्ट्रीय निवेश नीति के तहत छह नई यूरिया इकाइयां स्थापित की गई थीं। इनमें चार इकाइयां सार्वजनिक क्षेत्र की संयुक्त उद्यम कंपनियों और दो निजी क्षेत्र ने लगाई थीं। हालांकि इस नीति के तहत नए निवेश की अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।

सरकार का मानना है कि नई नीति से देश में गैस आधारित यूरिया संयंत्रों की संख्या बढ़ेगी और घरेलू उत्पादन में इजाफा होगा। इससे यूरिया आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। किसानों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बुवाई और फसल के दौरान यूरिया की उपलब्धता बेहतर होगी और आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत हो सकेगी।
Tags:
  • Urea-2026 (NIPU-2026)
  • National Investment Policy
  • Urea Production
  • Fertiliser Sector
  • Gas-based Urea Plants
  • Department of Fertilisers
  • Urea Imports
  • Atmanirbhar Bharat
  • CCEA
  • Narendra Modi